BHABHI KI CHDAI DESI BHABHI STORY IN HINDI

मेरा नाम रामु है। मैन सोल्लेगे मेन परहता हुन। मेरि उमरा अब बीस साल है। मैन एक साल से अपने भैया और BHABHI के साथ रह रहा हुन। भैया एक बरि सोमपनी मेन कम करते हैन। मेरि BHABHI कनचन बहुत हि सुनदेर है। भैया कि शादि को दो साल हो चुके हैन। BHABHI कि उमरा 24 साल है। मैन BHABHI कि बहुत इज़्ज़त करता हुन और वोह भि मेझे बहुत चहति है। हुम दोनो मेन खूब दोसति है और हनसि मज़क चलता रहता है। BHABHI परहै मेन भि मेरि सहयता करति है। वोह मुझे मथस परहति है।

एक दिन कि बात है, BHABHI मुझे परहा रहि थि और भैया अपने कमरे मेन लेते हुए थे। रात के दस बजे थे। इतने मेन भैया कि अवज़ आइ ” कनचन, और कितनि देर है जलदि आओ ना”। BHABHI अधे मेन से उथते हुए बोलि ” रमु बकि कल करेनगे तुमहरे भैया आज कुस्सह जदा हि उतवले हो रहे हैन।” यह कह कर वोह जलदि से अपने कमरे मेन चलि गयि। मुझे BHABHI कि बात कुस्सह थीक से समझ नहि आइ। कफ़ि देर तक सोचता रहा, फिर अचनक हि दिमग कि तुबे लिघत जलि और मेरि समझ मेन आ गया कि भैया को किस बात कि उतवलि हो रहि थि। मेरे दिल कि धकन तेज़ हो गयि। आज तक मेरे दिल मेन BHABHI को ले कर बुरे विचर नहि अये थे, लेकिन BHABHI के मुनह से उतवले वलि बात सुन कर कुस्सह अजीब सा लग रहा था। मुझे लगा कि BHABHI के मुनह से अनयस हि येह निकल गया होगा। जैसे हि BHABHI के कमरे कि लिघत बुनद हुइ मेरे दिल कि धकन और तेज़ हो गयि। मैने जलदि से अपने कमरे कि लिघत भि बुनद कर दि और चुपके से BHABHI के कमरे के दरवज़े से कान लगा कर खरा हो गया। उनदेर से फुसफुसने कि अवज़ आ रहि थि पर कुस्सह कुस्सह हि साफ़ सुनै दे रहा था।

” कयोन जि आज इतने उतवले कयोन हो रहे हो?”

” मेरि जान कितने दिन से तुमने दि नहि। इतना जुलम तो ना किया करो।”

“चलिये भि,मैने कब रोका है, आप हि को फुरसत नहि मिलति। रमु का कल एक्सम है उसे परहना ज़रूरि था।”

” अब सरिमति जि कि इज़ज़त हो तो अपकि CHOOT का उदघतन करुन।”

” है रम! कैसि बतेन बोलते हो।शरम नहि आति”

” शरम कि कया बात है। अब तो शादि को दो साल हो चुके हैन, फिर अपनि हि बिबि को चोदने मेन शरम कैसि”

” बरे खरब हो। अह।।आअ।।अह है रम…।औइ माअ……आआह…… धीरे करो रजा अभि तो सरि रात बकि है”

मैन दरवज़े पर और ना खरा रह सका। पसीने से मेरे कपरे भीग चुके थे। मेरा लुनद उनदेरवेअर फर कर बहर आने को तयर था। मैन जलदि से अपने बिसतेर पर लैत गया पर सरि रत BHABHI के बरे मेन सोचता रहा। एक पल भि ना सो सका।ज़िनदगि मेन पहलि बर BHABHI के बरे मेन सोच कर मेरा लुनद

खरा हुअ था। सुबह भैया ओफ़्फ़िसे चले गये। मैन BHABHI से नज़रेन नहि मिला पा रहा था जबकि BHABHI मेरि कल रात कि करतूत से बेखबर थि। BHABHI कितचेन मेन कम कर रहि थि। मैन भि कितचेन मेन खरा हो गया। ज़िनदगि मेन पहलि बर मैने BHABHI के जिसम को गौर से देखा। गोरा भरा हुअ गदरया सा बदन,लुमबे घने कले बाल जो BHABHI के घुतने तक लतकते थे, बरि बरि अनखेन, गोल गोल आम के अकर कि चुचिअन जिनका सिज़े 38 से कम ना होगा, पतलि कमर और उसके नीचे फैलते हुए चौरे, भरि नितमब । एक बर फिर मेरे दिल कि धकन बरह गयि । इस बर मैने हिम्मत कर के BHABHI से पूच हि लिया।

” BHABHI, मेरा आज एक्सम है और आप को तो कोइ चिनता हि नहि थि। बिना परहहे हि आप कल रात सोने चल दि”

” कैसि बातेन करता है रमु, तेरि चिनता नहि करुनगि तो किसकि करुनगि?”

” झूत, मेरि चिनता थि तो गयि कयोन?”

” तेरे भैया ने जो शोर मचा रखा था।”

” BHABHI, भैया ने कयोन शोर मचा रखा था” मैने बरे हि भोले सवर मेन पूचा। BHABHI शयद मेरि चलकि समझ गयि और तिरचि नज़र से देखते हुए बोलि,

” धत बदमश, सब समझता है और फिर भि पूच रहा है। मेरे खयल से तेरि अब शादि कर देनि चहिये। बोल है कोइ लदकि पसनद?”

” BHABHI सच कहुन मुझे तो आप हि बहुत अछि लगति हो।

” चल नलयक भग येहन से और जा कर अपना एक्सम दे।”

मैन एक्सम तो कया देता, सरा दिन BHABHI के हि बरे मेन सोचता रहा। पहलि बर BHABHI से ऐसि बतेन कि थि और BHABHI बिलकुल नरज़ नहि हुइ। इस्से मेरि हिम्मत और बधने लगि। मैन BHABHI का दिवना होता जा रहा था। BHABHI रोज़ रात को देर तक परहति थि । मुझे महसुस हुअ शयद भैया BHABHI को महीने मेन दो तीन बर हि चोदते थे। मैन अकसर सोचता, अगर BHABHI जैसि खूबसूरत औरत मुझे मिल जये तो दिन मेन चर दफ़े चोदुन।

 

BHABHI KI CHDAI

 

दिवलि के लिये BHABHI को मयके जना था। भैया ने उनहेन मयके ले जने का कम मुझे सोनपा कयोनकि भैया को छुत्ति नहि मिल सकि। बहुत भीर थि। मैन BHABHI के पीचे रैलवय सततिओन पर रेसेरवतिओन कि लिने मेन खरा था। धक्का मुक्कि के करन अदमि अदमि से सता जा रहा था। मेरा लुनद बर बर BHABHI के मोते मोते नितमबोन से रगर रहा था।मेरे दिल कि धकन तेज़ होने लगि। हलकि मुझे कोइ धक्का भि नहि दे रहा था, फिर भि मैन BHABHI के पीचे चिपक के खरा था। मेरा लुनद फनफना कर उनदेरवेअर से बहर निकल कर BHABHI के चुतरोन के बीच मेन घुसने कि कोशिश कर रहा था। BHABHI ने हलके से अपने चुत्रोन को पीचे कि तरफ़ धक्का दिया जिससे मेरा लुनद और जोर से उनके चुतरोन से रगरने लगा। लगता है BHABHI को मेरे लुनद कि गरमहत महसुस हो गयि थि और उसका हाल पता था लेकिन उनहोनेन दूर होने कि कोशिश नहि कि। भीर के करन सिरफ़ BHABHI को हि रेसेरवतिओन मिला। त्रैन मेन हुम दोनो एक हि सेअत पर थे। रात को BHABHI के कहने पर मैने अपनि तनगेन BHABHI के तरफ़ और उनहोने अपनि तनगेन मेरि तरफ़ कर लिन और इस परकर हुम दोनो असनि से लैत गये। रात को मेरि अनख खुलि तो त्रैन के निघत लमप कि हलकि हलकि रोशनि मेन मैने देखा, BHABHI गहरि नीनद मेन सो रहि थि और उसकि सरि जनघोन तक सरक गयि थि । BHABHI कि गोरि गोरि ननगि तनगेन और मोति मनसल जनघेन देख कर मैन अपना सोनत्रोल खोने लगा। सरि का पल्लु भि एक तरफ़ गिरा हुअ था और बरि बरि चुचिअन बलौसे मेन से बहर गिरने को हो रहि थि। मैन मन हि मन मनने लगा कि सरि थोरि और उपर उथ जये तकि BHABHI कि CHOOT के दरशन कर सकुन।

मैने हिम्मत करके बहुत हि धीरे से सरि को उपर सरकना शुरु किया। सरि अब BHABHI कि CHOOT से सिरफ़ 2 इनच हि नीचे थि पर कम रोशनि होने के करन मुझे यह नहि समझ आ रहा था कि 2इनच उपर जो कलिमा नज़र आ रहि थि वोह कले रनग कि कछि थि या BHABHI कि झतेन। मैने सरि को थोरा और उपर उथने कि जैसे हि कोशिसक कि, BHABHI ने करवत बदलि और सरि को नीचे खीनच लिया। मैने गहरी सनस लि और फिर से सोने कि कोशिश करने लगा।

मयके मेन BHABHI ने मेरि बहुत खतिरदरि कि। दस दिन के बद हुम वपस लोत आये। वपसि मेन मुझे BHABHI के साथ लैतने का मोका नहि लगा। भैया BHABHI को देख कर बहुत खुश हुए और मैन समझ गया कि आज रात BHABHI कि चुदै निशचित है। उस रात को मैन पहले कि तरह BHABHI के दरवज़े से कन लगा कर खरा हो गया।भैया कुछ ज़यदा हि जोश मेन थे । उनदेर से अवज़ेन साफ़ सुनै दे रहि थि।

” कनचन मेरि जान, तुमने तो हमेन बहुत सतया। देखो ना हमरा लुनद तुमहरि CHOOT के लिये कैसे तरप रहा है। अब तो इनका मिलन करवा दो।”

” है रम, आज तो येह कुछ ज़यदा हि बरा धिख रहा है। ओह हो! थहरिये भि, सरि तो उतरने दिजिये।”

“बरा कयोन नहि उतरि मेरि जान, पूरि तरह ननगि करके हि तो चोदने मेन मज़ा आता है। तुमहरे जैसि खूबसूरत औरत को CHODNA हर अदमि कि किसमत मेन नहिन होता।”

“झूत! ऐसि बात है तो आप तो महीने मेन सिरफ़ दो तीन बर हि ……।।”

” दो तीन बर हि कया?”

” ओह हो, मेरे मुनह से गनदि बात बुलवना चहते हैन”

” बोलो ना मेरि जान, दो तीन बर कया।”

” अछा बबा, बोलति हुन; महीने मेन दो तीन बर हि तो चोदते हो। बुस!!”

” कनचन, तुमहरे मुनह से चुदै कि बात सुन कर मेरा लुनद अब और इनतज़र नहिन कर सकता। थोरा अपनि तनगेन और चौरि करो। मुझे तुमहरि CHOOT बहुत अछि लगति है, मेरि जान।”

” मुझे भि अपका बहुत……। आआह…।।मर गयि…।ऊओह…।आह…ऊफ़।।औइ मा, बहुत अछा लग रहा है…।थोरा धीरे…हन थीक है…।थोरा ज़ोर से…आह।।अह।।अह ।”

उनदेर से BHABHI के करहने कि अवज़ के सथ सथ फुच।।फुच।।फुच जैसि अवज़ भि आ रहि थि जो मैन समझ नहिन सका।बहर खरे हुए मैन अपने आप को सोनत्रोल नहिन कर सका और मेरा लुनद झर गया। मैन जलदि से वपस आ कर अपने बिसतर पर लैत गया। अब तो मैन रात दिन BHABHI को चोदने के सपने देखने लगा। मैने आज तक किसि लदकि को नहिन चोदा था लेकिन चुदै कि कला से भलि भनति परिचित था। मैने एनगलिश कि बहुत सि गनदि विदेओ फ़िलमस देख रखि थि और हिनदि तथा एनगलिश के कयि गनदे नोवेल भि परहे थे। मैन अकसर कलपना करने लगा कि BHABHI बिलकुल ननगि होकर कैसि लगति होगि। जितने लुमबे और घने बाल उनके सिर पर थे ज़रूर उतने हि घने बाल उनहि CHOOT पर भि होनगे। भैया BHABHI को कोन कोन सि मुदरावँ मेन चोदते होनगे। एकदुम ननगि BHABHI तनगेन फैलै हुए चुदवने कि मुदरा मेन बहुत हि सेक्सी लगति होगि। यह सुब सोच कर मेरि BHABHI के लिये कम वसना दिन परतिदिन बरहति जा रहि थि।

मैन भि लुमबा तगरा अदमि हुन। कद करिब 6 फ़ूत है। अपने सोल्लेगे का बोदी बुइलदिनग का चमपिओन हुन। रोज़ दो घनते कसरत और मालिश करता हुन। लेकिन सुबसे खस चीसे है मेरा लुनद। धीलि अवसथा मेन भि 8 इनच लुमबा और 3 इनच मोता किसि हथोरे के मफ़िक लतकता रेहता है। यदि मैन उनदेरवेअर ना पहनुन तो पनत के उपर से भि उसका अकर साफ़ दिखै देता है। खरा हो कर तो उसकि लुमबै करीब 10 इनच और मोतै 4इनच हो जति है। एक दोसतोर ने मुझे बतया था कि इतना लुमबा और मोता लुनद बहुत कम लोगोन का होता है। मैन अकसर वरनदह मेन अपनि लुनगि को घुतनोन तक उथा कर बैथ जता था और नेवसपपेर परहने का नतक करता था। जब भि कोइ लदकि घर के समने से निकलति, मैन अपनि तनगोन को थोरा सा इस परकर से चौरा करता कि उस लदकि को लुनगि के उनदेर से झनकता हुअ लुनद नज़र आ जये। मैने नेवसपपेर मेन छोता सा छेद कर रखा था। नेवसपपेर से अपना चेहरा छुपा कर उस छेद मेन से लदकि कि परतिकरिया देखने मेन बहुत मज़ा आता था। लदकिओन को लगता था कि मैन अपने लुनद कि नुमैश से बेखबर हुन। एक भि लदकि ऐसि ना थि जिसने मेरे लुनद को देख कर मुनह फेर लिया हो। धीरे धीरे मैन शदिशुदा औरतोन को भि लुनद दिखने लगा कयोनकि उनहेन हि लुमबे ,मोते लुनद का महतवा पता था।

एक दिन मैन अपने कमरे मेन परह रहा था कि BHABHI ने अवज़ लगै,

” रमु, ज़रा बहर जो कपरे सूख रहे हैन उनहेन उनदेर ले आओ। बरिश आने वलि है।”

” अछा BHABHI!” मैन कपरे लेने बहर चला गया। घने बदल छये हुए थे, BHABHI भि जलदि से मेरि हेलप करने आ गयि। दोरि पर से कपरे उतरते समय मैने देखा कि BHABHI कि बरा और कछि भि तनगि हुइ थि। मैने BHABHI कि बरा को उतर कर सिज़े परह लिया; सिज़े था 38स। उसके बाद मैने BHABHI कि कछि को हाथ मेन लिया। गुलबि रनग कि वो कछि करीब करीब परदरशि थि और इतनि छोति सि थि जैसे किसि दस साल कि बछि कि हो। BHABHI कि कछि का सपरश मुझे बहुत अननद दे रहा था और मैन मन हि मन सोचने लगा कि इतनि छोति सि कछि BHABHI के विशल नितमबोन और CHOOT को कैसे धकति होगि। शयद येह कछि BHABHI भैया को रिझने के लिये पहनति होगि। मैने उस छोति सि कछि को सूनघना शुरु कर दिया तकि BHABHI कि CHOOT कि कुछ खुशबू पा सकुन। BHABHI ने मुझे करते हुए देख लिया और बोलि

” कया सूनघ रहे हो रमु ? तुमहरे हाथ मेन कया है?”

मेरि चोरि पकरि गयि थि। बहना बनते हुए बोला

” देखो ना BHABHI ये छोति सि कछि पता नहिन किसकि है? येहन कैसे आ गयि।”

BHABHI मेरे हाथ मेन अपनि कछि देख कर झेनप गयि और छीनति हुइ बोलि

” लाओ इधेर दो।”

“किसकि है BHABHI ?” मैने अनजान बनते हुए पूचा।

” तुमसे कया मतलब, तुम अपना काम करो” BHABHI बनवति गुस्सा दिखते हुए बोलि।

“बता दो ना । अगर पदोस वलि बछि कि है तो लोता दुन।

” जी नहिन, लेकिन तुम सूनघ कया रहे थे?”

“अरे BHABHI मैन तो इसको पहनने वलि कि खुशबू सूनघ रहा था। बरि मदक खुशबू थि। बता दो ना किसकि है?’

BHABHI का चेहरा ये सुन कर शरम से लाल हो गया और वोह जलदि से उनदेर भाग गयि।

उस रात जब वोह मुझे परहने आई तो मैने देखा कि उनहोनेन एक सेक्सी सि निघतिए पहन रखि थि। निघतिए थोदि सि परदरशि थि। BHABHI जब कुछ उथने के लिये नीचे झुकि तो मुझे साफ़ नज़र आ रहा था कि BHABHI ने निघतिए के नीचे वोहि गुलबि रनग कि कछि पहन रखि थि। झुकने कि वजह से कछि कि रूप रेखा साफ़ नज़र आ रहि थि।मेरा अनदज़ा सहि था। कछि इतनि छोति थि कि BHABHI के भरि नितमबोन के बीच कि दरर मेन घुसि जा रहि थि। मेरे लुनद ने हरकत करनि शुरु कर दि। मुझसे ना रहा गया और मैन बोल हि परा,

“BHABHI अपने तो बतया नहिन लेकिन मुझे पता चल गया कि वो छोति सि कछि किसकि थि।”

” तुझे कैसे पता चल गया?” BHABHI ने शरमते हुए पूचा।

” कयोनकि वोह कछि आपने इस वकत निघतिए के नीचे पहन रखि है।”

” हुत बदमश! तु ये सुब देखता रहता है?”

” BHABHI एक बात पूछुन? इतनि छोति सि कछि मेन आप फ़ित कैसे होति हैन?” मैने हिम्मत जुता कर पूछ हि लिया।

” कयोन मैन कया तुझे मोति लगति हुन?”

” नहिन BHABHI, आप तो बहुत हि सुनदेर हैन। लेकिन आपका बदन इतना सुदोल और गथा हुअ है, आपके नितमब इतने भरि और फैले हुए हैन कि इस छोति सि कछि मेन समा हि नहिन सकते। आप इसे कयोन पहनति हैन? यह तो आपकि जयदाद को छुपा हि नहिन सकति और फिर यह तो परदरशि है , इसमे से तो आपका सुब कुछ दिखता होगा।”

” चुप नलयक, तु कुछ ज़यदा हि समझदर हो गया है। जब तेरि शादि होगि ना तो सुब अपने आप पता लग जयेगा। लगता है तेरि शादि जलदि हि करनि होगि, शैतन होता जा रहा है।”

” जिसकि इतनि सुनदेर BHABHI हो वोह किसि दूसरि लदकि के बारे मेन कयोन सोचने लगा?”

” ओह हो! अब तुझे कैसे समझावँ? देख रमु, जिन बातोन के बारे मेन तुझे अपनि बिवि से पता लग सकता है और जो चीसे तेरि बिवि तुझे दे सकति है वोह BHABHI तो नहिन दे सकति ना? इसि लिये कह रहि हुन शादि कर ले।”

” BHABHI ऐसि कया चीसे है जो सिरफ़ बिवि दे सकति है और आप नहिन दे सकति” मैने बहुत अनजान बनते हुए पूचा। अब तो मेरा लुनद फनफनने लगा था।

” मैन सुब समझति हुन चलाक कहिन का! तुझे सुब मलूम है फिर भि अनजान बनता है” BHABHI लजते हुए बोलि। ” लगता है तुझे परहना लिखना नहिन है, मैन सोने जा रहि हुन।”

” लेकिन भैया ने तो आपको नहिन बुलया” मैने शररत भरे सवर मेन पूचा। BHABHI जबब मेन सिरफ़ मुसकुरते हुए अपने कमरे कि ओर चल दि। उनकि मसतनि चाल, मतकते हुए भरि नितमब और दोनो चुत्रोन के बीच मेन पिस रहि बेचरि कछि को देख कर मेरे लुनद का बुरा हाल था।

अगले दिन भिया के ओफ़्फ़िसे जने के बाद BHABHI और मैन वरनदह मेन बैथे चाय पी रहे थे। इतने मेन समने सरक पर एक गुय गुज़रि। उसके पीचे पीचे एक भरि भरकुम सानद हुनहर भरता हुअ आ रहा था। सानद का लुमबा मोता लुनद नीचे झूल रहा था। सानद के लुनद को देख कर BHABHI के माथे पर पसीना छलक अया। वोह उसके लुमबे तगरे लुनद से नज़रेन ना हता सकि। इतने मेन सानद ने जोर से हुनकर भरि और गुय पर चरह कर उसकि योनि मेन पूरा का पूरा लुनद उतर दिया। यह देख कर BHABHI के मुनह से सिसकरि निकले गयि। वोह सानद कि रास लीला और ना देख सकि और शरम के मारे उनदेर भाग गयि। मैन भि पीचे पीचे उनदेर गया। BHABHI कितचेन मेन थि। मैने बहुत हि भोले सवर मेन पूचा

” BHABHI वोह सानद कया कर रहा था?”

” तुझे नहिन मलूम?” BHABHI ने झूता गुस्सा दिखते हुए कहा।

” तुमहरि कसम BHABHI मुझे कैसे मलूम होगा ? बतैये ना।” हलनकि कि BHABHI को अछि तरह पता था कि मैन जान कर अनजान बुन रहा हुन लेकिन अब उसे भि मेरे साथ ऐसि बातेन करने मेन मज़ा आने लगा था। वोह मुझे समझते हुए बोलि

” देख रमु, सानद वोहि काम कर रहा था जो एक मरद अपनि बिवि के साथ शादि के बाद करता है।”

” आपका मतलब है कि मरद भि अपनि बिवि पर ऐसे हि चरहता है?”

” है रम! कैसे कैसे सवल पूचता है। हान और कया ऐसे हि चरहता है।”

” ओह! अब समझा, भैया आपको रात मेन कयोन बुलते हैन।”

” चुप नलयक, ऐसा तो सभि शादिशुदा लोग करते हैन।”

” जिनकि शादि नहिन हुइ वोह नहिन कर सकते?”

” कयोन नहिन कर सकते? वोह भि कर सकते हैन, लेकिन…।।” मैन तपक से बीच मेन हि बोल परा

” वाह BHABHI तुब तो मैन भि आप पर छरह……।।” BHABHI एकदुम मेरे मुनह पर हाथ रख कर बोलि ” चुप, जा येहन से और मुझे काम करने दे।” और यह कह कर उनहोनेन मुझे कितचेन से बहर धकेल दिया।

इस घतना के दो दिन के बाद कि बात अहि। मैन छत पर परहने जा रहा था। BHABHI के कमरे के समने से गुज़रते समय मैने उनके कमरे मेन झनका। BHABHI अपने बिसतर पर लैती हुइ कोइ नोवेल परह रहि थि। उसकि निघतिए घुतनोन तक उपर चरहि हुइ थि। निहगतिए इस परकर से उथि हुइ थि कि BHABHI कि गोरि गोरि तनगेन, मोति मनसल जनघेन और जनघोन के बीच मेन सफ़ेद रनग कि कछि साफ़ नज़र आ रहि थि।मेरे कदम एकदुम रुक गये और इस खूबसूरत नज़रे को देखने के लिये मैन छुप कर खिरकि से झनकेने लगा।येह कछि भि उतनि हि छोति थि और बरि मुशकिल से BHABHI कि CHOOT को धक रहि थि। BHABHI कि घनि कलि झनतेन दोनो तरफ़ से कछि के बहर निकल रहि थि। वोह बेचरि छोति सि कछि BHABHI कि फूलि हुइ CHOOT के उभर से बुस किसि तरह चिपकि हुइ थि। CHOOT कि दोनो फनकोन के बीच मेन दबि हुइ कछि ऐसे लग रहि थि जैसे हनसते वकत BHABHI के गालोन मेन दिमपले पर जतेन हैन। अचनक BHABHI कि नज़र मुझ पर परह गयि । उनहोनेन झत से तनगेन नीचे करते हुए पूचा ” कया देख रहा है रमु”

चोरि पकरि जाने के करन मैन सकपका गया और ” कुछ नहिन BHABHI” कहता हुअ छत पर भाग गया। अब तो रात दिन BHABHI कि सफ़ेद कछि मेन चिपि हुइ CHOOT कि यद सतने लगि।

मेरे दिल मेन विचर अया, कयोन ना BHABHI को अपने विशल लुनद के दरशन करावँ। BHABHI रोज़ सवेरे मुझे दूध का गलस्स देने मेरे कमरे मेन आति थि। एक दिन सवेरे मैन अपनि लुनगि को घुतनोन तक उथा कर नेवसपपेर परहने का नतक करते हुए इस परकर बैथ गया कि सामने से आति हुइ BHABHI को मेरा लतकता हुअ लुनद नज़र आ जये। जैसे हि मुझे BHABHI के आने कि आहत सुनै दि,मैने नेवसपपेर अपने चेहरे के सामने कर लिया, तनगोन को थोरा और चौरा कर लिया तकि BHABHI को पूरे लुनद के आसनि से दरशन हो सकेन और नेवसपपेर के बीच के छेद से BHABHI कि परतिकरिया देखने के लिये रेअदी हो गया। जैसे हि BHABHI दूध का गलस्स लेकर मेरे कमरे मेन दखिल हुइ, उनकि नज़र लुनगि के नीचे से झनकते मेरे 8 इनच लुमबे मोते हथोरे के मफ़िक लतकते हुए लुनद पे पर गयि। वोह सकपका कर रुक गयि, अनखेन अशचरया से बरि हो गयि और उनहोनेन अपना नीचला होनथ दनतोन से दबा दिया। एक मिनुते बाद उनहोनेन होश समभला और जलदि से गलस्स रख कर भग गयि। करीब 5 मिनुते के बाद फिर BHABHI के कदमोन कि आहत सुनै दि। मैने झत से पहले वला पोसे धरन कर लिया और सोचने लगा, BHABHI अब कया करने आ रहि है। नेवसपपेर के छेद मेन से मैने देखा BHABHI हाथ मेन पोचे का कपरा ले कर उनदेर आयि और मुझसे करीब 5 फ़ूत दूर ज़मीन पर बैथ कर कुछ साफ़ करने का नतक करने लगि। वोह नीचे बैथ कर लुनगि के नीचे लतकता हुअ लुनद थीक से देखना चहति थि। मैने भि अपनि तनगोन को थोरा और चौरा कर दिया जिस्से BHABHI को मेरे विशल लुनद के साथ मेरि बल्लस के भि दरशन अछि परकर से हो जयेन। BHABHI कि अनखेन एकतक मेरे लुनद पर लगि हुइ थि, उनहोनेन अपने होनथ दनतोन से इतनि ज़ोर से कात लिये कि उनमे थोरा सा खून निकल आया। माथे पर पसीने कि बुनदेन उभर आयि। BHABHI कि यह हलत देख कर मेरे लुनद ने फिर से हरकत शुरु कर दि। मैने बिना नेवसपपेर चेहरे से हतय BHABHI से पूछा

 

DESI BHABHI STORY

 

” कया बात है BHABHI कया कर रहि हो?”

BHABHI हरबरा कर बोलि ” कुछ नहिन, थोरा दूध गिर गया था उसे साफ़ कर रहि हुन।” येह कह कर वोह जलदि से उथ कर चलि गयि। मैन मन हि मन मुसकया। अब तो जैसे मुझे BHABHI कि CHOOT के सपने आते हैन वैसे हि BHABHI को भि मेरे विशल लुनद के सपने ऐनगे। लेकिन अब BHABHI एक कदम अगे थि। उसने तो मेरे लुनद के दरशन कर लिये थे पर मैने अभि तक उनकि CHOOT को नहिन देखा था।

मुझे मलूम था कि BHABHI रोज़ हमरे जाने के बाद घर का सरा काम निपता कर नहने जाति थि। मैने BHABHI कि CHOOT देखने का पलन बनया। एक दिन मैन सोल्लेगे जाते समय अपने कमरे कि खुलि छोर गया। उस दिन सोल्लेगे से मैन जलदि वपस आ गया। घर का दरवज़ा उनदेर से बुनद था। मैन चुपके से अपनि खिरकि के रसते अपने कमरे मेन दखिल हो गया। BHABHI कितचेन मेन काम कर रहि थि। काफ़ि देर इनतज़र करने के बाद आखिर मेरि तपसया रनग लयि। BHABHI अपने कमरे मेन आइ। वोह मसति मेन कुछ गुनगुना रहि थि। देखते हि देखते उसने अपनि निघतिए उतर दि। अब वोह सिरफ़ असमनि रनग कि बरा और कछि मेन थि। मेरा लुनद हुनकर भरने लगा। कया बला कि सुनदेर थि। गोरा बदन, पतलि कमर,उसके नीचे फैलते हुए भरि नितमब और मोति जनघेन किसि नमरद का भि लुनद खरा कर देन। BHABHI कि बरि बरि चुचिअन तो बरा मेन समा नहिन पा रहि थि। ओर फिर वहि छोति सि कछि, जिसने मेरि रतोन कि नीनद उरा रखि थि। BHABHI के भरि चुतर उनकि कछि से बहर गिर रहे थे। दोनो चुत्रोन का एक चौथै से भि कम भग कछि मेन था। बेचरि कछि BHABHI के चुत्रोन के बीच कि दरर मेन घुसने कि कोशिश कर रहि थि। उनकि जनघोन के बीच मेन कछि से धकि फूलि हुइ CHOOT का उभर तो मेरे दिल ओ दिमग को पगल बना रहा था। मैन सानस थामे इनतज़र कर रहा था कि कब BHABHI कछि उतरे और मैन उनकि CHOOT के दरशन करुन। BHABHI शीशे के समने खरि हो कर अपने को निहर रहि थि। उनकि पीथ मेरि तरफ़ थि। अचनक BHABHI ने अपनि बरा और फिर कछि उतर कर वहिन ज़मीन पर फेनक दि। अब तो उनके ननगे चौरे चुतर देख कर मेरा लुनद बिलकुल झरने वला हो गया।

मेरे मन मेन विचर आया कि भैया ज़रूर BHABHI कि CHOOT पीचे से भि लेते होनगे ओर कया कभि भैया ने BHABHI कि गानद मरि होगि। मुझे ऐसि लजबब औरत कि गानद मिल जाये तो मैन सवरग जने से भि इनकर कर दुन। लेकिन मेरि आज कि योजना पर तुब पनि फिर गया जब BHABHI बिना मेरि तरफ़ घुमे बथरूम मेन नहने चलि गयि। उनकि बरा और कछि वहिन ज़मीन पर परि थि। मैन जलदि से BHABHI के कमरे मेन गया और उनकि कछि उथा लया। मैने उनकि कछि को सूनघा। BHABHI कि CHOOT कि महक इतनि मदक थि कि मेरा लुनद और ना सहन कर सका और झर गया। मैने उस कछि को अपने पास हि रख लिया और BHABHI के बथरूम से बहर निकलने का इनतज़र करने लगा। सोचा जब BHABHI नहा कर ननगि बहर निकलेगि तो उनकि CHOOT के दरशन हो हि जैनगे। लेकिन किसमत ने फिर साथ नहिन दिया। BHABHI जब नहा के बहर निकलि तो उनहोने काले रनग कि कछि और बरा पहन रखि थि। कमरे मेन अपनि कछि गयब पा कर सोच मेन पर गयि। अचनक उनहोनेन जलदि से निघतिए पहन ली और मेरे कमरे कि तरफ़ आइ। शयद उनहेन शक हो गया कि यह काम मेरे इलवा और कोइ नहिन कर सकता। मैन झत से अपने बिसतेर पर ऐसे लैत गया जैसे नीनद मेन हुन। BHABHI मुझे कमरे मेन देखकर सकपका गयि। मुझे हिलते हुए बोलि

” रमु उथ। तु उनदेर कैसे आया?”

मैने आनखेन मलते हुए उथने का नतक करते हुए कहा ” कया करुन BHABHI आज सोल्लेगे जलदि बुनद हो गया। घर का दरवज़ा बुनद था बहुत खतखतने पर जब आपने नहिन खोला तो मैन अपनि खिरकि के रासते उनदेर आ गया।”

” तु कितनि देर से उनदेर है?”

” येहि कोइ एक घनते से।”

अब तो BHABHI को शक हो गया कि शयद मैने उनहेन ननगि देख लिया था। और फिर उनकि कछि भि तो गयब थि। BHABHI ने शरमते हुए पूचा ” कहिन तुने मेरे कमरे से कोइ चीसे तो नहिन उथै?’

” अरे हन BHABHI! जब मैन आया तो मैने देखा कि कुछ कपरे ज़मीन पर परे हैन। मैने उनहेन उथा लिया।” BHABHI का चेहरा सुरख हो गया। हिचकिचते हुए बोलि

” वपस कर मेरे कपदे।”

मैन तकिये के नीचे से BHABHI कि कछि निकलते हुए बोला ” BHABHI ये तो अब मैन वपस नहिन दूनगा।”

“कयोन अब तु औरतोन कि कछि पहनना चहता है?”

” नहिन BHABHI” मैन कछि को सूनघता हुअ बोला

” इसकि मदक खुशबू ने तो मुझे दिवना बना दिया है।”

” अरे पगला है? येह तो मैने कल से पहनि हुइ थि। धोने तो दे।”

” नहिन BHABHI धोने से तो इसमे से आपकि महक निकल जयेगि। मैन इसे ऐसे हि रखना चहता हुन।”

” धत पगल! अछा तु कबसे घर मेन है?” BHABHI शयद जनना चहति थि कि कहिन मैने उसे ननगि तो नहिन देख लिया। मैने कहा

” BHABHI मैन जनता हुन कि आप कया जनना चहति हैन। मेरि गलति कया है, जब मैन घर अया तो आप बिलकुल ननगि शीशे के सामने खरि थि। लेकिन आपको सामने से नहिन देख सका। सच कहुन BHABHI आप बिलकुल ननगि हो कर बहुत हि सुनदेर लग रहि थि। पतलि कमर, भरि नितमब और गदरयि हुइ जनघेन देख कर तो बरे से बरे बरहमचरि कि नियत भि खराब हो जये।”

BHABHI शरम से लाल हो उथि।

” है रम तुझे शरम नहिन आति। कहिन तेरि भि नियत तो नहिन खरब हो गयि है?”

” आपको ननगि देख कर किसकि नियत खराब नहिन होगि?”

” हे भगवन, आज तेरे भैया से तेरि शादि कि बात करनि हि परेगि” इस्से पहले मैन कुस्सह और कहता वोह अपने कमरे मेन भग गयि।

प्यारी BHABHI-2
अब मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपने LUND का सुपाड़ा उसकी GAND के छेद पर रख दिया और फिर उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके मुँह से आह निकल गई। मैंने थोड़ा जोर और लगाया उसके मुँह से हल्की सी चीख निकाल गई। मेरा LUND उसकी GAND में 3″ तक घुस चुका था। मैंने थोड़ा सा जोर और लगाया तो वो फिर से चिल्लाने लगी और मेरा LUND 4″ तक घुस गया। मैंने उसकी चीख पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया।

मैंने जोर का धक्का मारा तो वो तड़पने लगी और जोर जोर से चीखने लगी- दीदी, बचा लो मुझे, मैं मर जाऊंगी।

इस धक्के के साथ मेरा LUND 5″ तक घुस गया। मैंने फिर से बहुत ही जोर का एक धक्का और मारा तो अपने हाथों को जोर जोर से बिस्तर पर पटकने लगी। उसने अपने सिर के बाल नोचने शुरु कर दिये और बहुत ही जोर जोर से चिल्लाने लगी। अब तक मेरा LUND शालू की GAND में 6″ तक घुस चुका था। मैंने पूरी ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा तो वो बहुत जोर-जोर से रोने लगी। लग रहा था कि जैसे वो मर जायेगी। मैं रुक गया। इस धक्के के साथ मेरा LUND उसकी GAND में 7″ घुस चुका था। मैंने अपना LUND एक झटके से बाहर खींच लिया। पुक की आवाज के साथ मेरा LUND बाहर आ गया।

मैंने देखा कि उसकी GAND का मुँह खुला का खुला हुआ ही रह गया था और ढेर सारा खून मेरे LUND पर और उसकी GAND पर लगा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठाई और उसकी GAND के छेद में ढेर सारा तेल डाल दिया। उसके बाद मैंने फिर से अपना LUND धीरे धीरे उसकी GAND में घुसा दिया। जब मेरा LUND उसकी GAND में 7″ तक घुस गया तो मैंने पूरे ताकत के साथ 2 बहुत ही जोरदार धक्के लगा दिये।

वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- दीदी, तुमने मुझे कहां फसा दिया। मैं तो मरी जा रही हूँ और तुम हो कि सुन ही नहीं रही हो, बचा लो मुझे, नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे।

मैंने कहा- अब चुप हो जाओ। मेरा पूरा LUND अब घुस चुका है।

वो कुछ नहीं बोली केवल सिसक सिसक कर रोती रही।

मैं अपना LUND उसकी GAND में ही डाले हुये थोड़ी देर तक रुका रहा। धीरे धीरे वो कुछ हद तक शान्त हो गई।

तभी कमरे के बाहर से ही BHABHI ने पूछा- काम हो गया।

मैंने कहा- अभी तो मैंने केवल अपना औजार ही पूरा अन्दर घुसाया है।

वो बोली- ठीक है, अब जल्दी से अपना पानी भी निकाल दो और बाहर आ जाओ।

मैंने धीरे धीरे धक्के लगने शुरु कर दिये तो शालू फिर से चीखने लगी। समय गुजरता गया और वो धीरे धीरे शान्त होती गई। 10 मिनट में वो एक दम शान्त हो गई तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी। मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी। तेल लगा होने की वजह से मेरा LUND उसकी GAND में सटासट अन्दर बाहर हो रहा था। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। शालू को भी अब कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। मैं भी पूरे जोश में आ चुका था और तेजी के साथ उसकी GAND मार रहा था।

10 मिनट तक मैंने उसकी GAND मारी और फिर झड़ गया। LUND का सारा पानी उसकी GAND में निकाल देने के बाद भी मैं उसके GAND में ही अपना LUND डाले रखा और उसके ऊपर लेट गया।

मैंने शालू से पूछा- कुछ मज़ा आया?

वो बोली- बहुत दर्द हो रहा है और तुम पूछ रहे हो कि मज़ा आया।

मैंने कहा- मेरी कसम है तुम्हें, सच सच बताओ क्या तुम्हें जरा सा भी मज़ा नहीं आया?

उसने शरमाते हुये कहा- पहले तो बहुत दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे थोड़ा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था कि तुम रुक गये।

मैंने कहा- अभी थोड़ी देर में मेरा LUND फिर से खड़ा हो जायेगा। उसके बाद मैं फिर से तुम्हारी GAND मारूंगा।

वो बोली- नहीं, अभी रहने दो।

तभी BHABHI ने पूछा- क्यों राज, काम हो गया?

मैंने कहा- हां, मैंने अपना पानी इसकी GAND के छेद में निकाल दिया है। अभी थोड़ी ही देर में मैं फिर से अपना पानी निकालने वाला हूँ।

BHABHI ने कहा- ठीक है, जब दोबारा पानी निकाल देना तो बाहर आ जाना।

मैंने कहा- ठीक है।

मैंने अपना LUND शालू की GAND में ही रखा और उसकी चूचियों को मसलता रहा। 15 मिनट में ही मेरा LUND फिर से खड़ा हो गया तो मैंने उसकी GAND मारनी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी। थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा तो वो सिसकारियां लेने लगी। मैंने पूछा- अब कैसा लग रहा है।

वो बोली- अब अच्छा लग रहा है।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो थोड़ी ही देर में वो जोर से सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी GAND मरने में खूब मज़ा आ रहा था। 20 मिनट तक मैंने उसकी GAND मारी और फिर झड़ गया। मैंने अपना LUND उसकी GAND से बाहर निकाला और उसके बगल में लेट गया। मैंने उसके होंठो को चूमते हुये पूछा- कैसा लगा?

वो बोली- इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आया।

मैंने कहा- धीरे धीरे तुम्हें और ज्यादा मज़ा आने लगेगा।

मैं शालू के पास से उठ कर बाहर चला आया। BHABHI बाहर बैठी थी। उन्होने मुझसे पूछा- काम हो गया?

मैंने कहा- हां।

वो बोली- मैं गरम पानी से उसकी CHOOT की सिकाई कर देती हूँ। इससे उसका दर्द कम हो जायेगा।

मैं चुप रह गया क्योंकि मैंने तो शालू की CHOOT को अभी तक छुआ ही नहीं था। मैंने तो उसकी GAND मारी थी।

फिर मैं कुछ मिनट बाद शालू के पास चला आया। BHABHI पानी गरम कर के ले आई, वो बोली- मैं पानी गरम कर के लाई हूँ, अन्दर आ जाऊं।

मैंने कहा- आ जाओ।

शालू बोली- मैं एकदम नंगी हूँ और तुम दीदी को यहां बुला रहे हो।

मैंने कहा- तो क्या हुआ।

वो कुछ नहीं बोली। BHABHI अन्दर आ गई। उन्होंने शालू से कहा- लाओ मैं तुम्हारे छेद की सिकाई कर दूं। इससे तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा।

शालू ने करवट बदल ली तो BHABHI ने कहा- तुमने करवट क्यों बदल ली। अब मैं कैसे तुम्हारी CHOOT के छेद की सिकाई करूंगी?

उसने अपनी GAND के छेद की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- इसी में तो इन्होंने अपना औजार घुसाया था। BHABHI के मुँह से निकला- क्या?

BHABHI की नज़र शालू की GAND पर पड़ी। उसकी GAND खून से लथपथ थी। मैंने अभी तक अपना LUND साफ़ नहीं किया था। मेरा LUND भी खून से भीगा हुआ था। BHABHI आंखें फ़ाड़े कभी मेरे LUND को और कभी शालू की GAND को और कभी मेरे चेहरे को देखने लगी।

BHABHI ने गरम पानी से शालू की GAND की सिकाई की। उसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुये शालू से कहा- शालू तुमने तो एक मैदान मार लिया है। अब दूसरा मैदान मारना और बाकी है।

वो बोली- दीदी, मैं समझी नहीं?

BHABHI ने शालू की CHOOT पर हाथ लगाते हुये कहा- अभी तो तुम्हें इस छेद में भी इसका औजार अन्दर लेना है।

शालू को बहुत दर्द हो रहा था। BHABHI की बात सुनकर वो गुस्से में आ गई। उसने अपनी CHOOT की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- एक छेद के अन्दर इनका औजार लेने में ही मेरा इतना बुरा हाल हो गया और आप कह रही हो कि अभी इस दूसरे छेद में भी अन्दर लेना है। मैं अब किसी छेद में इनका औजार अन्दर नहीं लूंगी। मुझे बहुत दर्द होता है। आप खुद ही इनका औजार अपने छेद में ले लो।

BHABHI ने मुस्कुराते हुये कहा- मेरे अन्दर लेने से क्या होगा। आखिर तुम्हें भी तो इसका औजार अपने इस छेद में अन्दर लेना ही पड़ेगा। जैसे एक बार तुमने दर्द को बर्दाश्त कर लिया है उसी तरह से एक बार और दर्द को बर्दाश्त कर लेना।

शालू ने BHABHI की CHOOT की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- पहले तुम इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर ले कर दिखाओ। उसके बाद ही मैं इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर लूंगी।

BHABHI मुझे देखने लगी और मैं उनको।

शालू बोली- क्यों अब क्या हुआ? आप मुझे फंसा रही थी लेकिन मैंने आपको ही फंसा दिया। दिखाओ इसका औजार अपने छेद के अन्दर लेकर।

BHABHI ने कहा- अच्छा बाबा, अभी दिखा देती हूँ लेकिन उसके बाद तो तुम मना नहीं करोगी।

वो बोली- पहले आप दिखाओ उसके बाद मैं इनका औजार अन्दर ले लूंगी भले ही मुझे कितनी भी तकलीफ़ क्यों ना हो।

BHABHI ने मुझसे कहा- देवर जी, शालू ऐसे नहीं मानेगी। अब तुम अपना औजार मेरे अन्दर डाल ही दो।

मैंने कहा- शालू के सामने?

शालू बोली- तो क्या हुआ?

BHABHI बोली- जब यह मुझे तुम्हारा औजार अन्दर लेते हुये देखेगी तब ही तो यह तुम्हारा औजार अन्दर लेगी।

BHABHI ने अपने कपड़े उतार दिये और शालू के बगल में लेट गई। मैं BHABHI के पैरों के बीच आ गया तो BHABHI ने शालू से कहा- अब तुम बैठ जाओ और देखो कि कैसे मैं इसका औजार पूरा का पूरा अन्दर लेती हूँ।

शालू BHABHI के बगल में बैठ गई। मैंने BHABHI की CHOOT में अपना LUND घुसेड़ना शुरु कर दिया। धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा LUND BHABHI की CHOOT में समा गया। शालू आंखें फ़ाड़े देखती रही। उसके बाद मैंने BHABHI की CHUDAI शुरु कर दी। शालू मेरे LUND को BHABHI की CHOOT में सटासट अन्दर-बाहर होते हुये देखती रही। 5 मिनट की CHUDAI के बाद BHABHI झड़ गई तो शालू ने कहा- दीदी, तुम्हारे छेद में से क्या निकल रहा है?

BHABHI ने कहा- यह मेरी CHOOT का पानी है। अभी यह कई बार निकालेगा। जब यह तुम्हारी CHOOT में भी अपना LUND घुसा कर तेजी से अन्दर-बाहर करेगा तब तुम्हारी CHOOT में से भी ऐसा ही पानी निकलेगा। CHOOT से पानी निकलने पर बहुत मज़ा आता है। तुम खुद ही देख लो कि मुझे कितना मज़ा आ रहा है।

मैंने BHABHI को लगभग 25 मिनट तक खूब जम कर चोदा। शालू आंखें फ़ाड़े देखती रही। LUND का सारा पानी BHABHI की CHOOT में निकाल देने के बाद मैंने अपना LUND बाहर निकाल लिया तो शालू बोली- तुम्हारे LUND पर तो जरा सा भी खून नहीं लगा है?

मैंने कहा- खून तो केवल पहली पहली बार घुसाने में ही निकालता है।

वो कुछ नहीं बोली।

BHABHI ने शालू से कहा- अब तो तैयार हो इसका LUND अपनी CHOOT में लेने के लिये?

वो बोली- हां, लेकिन दीदी, बहुत दर्द होगा।

BHABHI ने कहा- पगली, केवल एक ही बार तो दर्द होगा। उसके बाद तो तू खुद ही इससे बार-बार कहेगी कि अपना LUND मेरी CHOOT में डाल दो।

वो बोली- भला मैं ऐसा क्यों कहूँगी?

BHABHI ने कहा- क्योंकि तुझे इसमें मज़ा जो आयेगा।

मैं BHABHI के बगल में लेट गया। शालू मेरे LUND को देखती रही। थोड़ी देर बाद वो बोली- इनका LUND अब खड़ा क्यों नहीं हो रहा है?

BHABHI ने कहा- अभी इसने मुझे चोदा है ना इसीलिये। तू इसके LUND को सहलाना शुरु कर दे। थोड़ी ही देर में यह फिर से खड़ा हो जायेगा।

BHABHI की CHUDAI देख कर शालू को भी थोड़ा जोश आ गया था। उसने अपना हाथ धीरे से मेरे LUND पर रख दिया। थोड़ी देर तक वो मेरे LUND को देखती रही। उसके बाद उसने मेरे LUND को सहलाना शुरु कर दिया। 15-20 मिनट के बाद मेरा LUND फिर से खड़ा होने लगा। मैंने देखा कि उसकी आंखें कुछ गुलाबी सी होने लगी।

LUND खड़ा होते देख शालू जोश में आ गई और BHABHI से बोली- दीदी, अब तो इनका LUND खड़ा हो गया।

BHABHI बोली- अब तू लेट जा।

इतना कह कर BHABHI उठ कर बैठ गई और शालू लेट गई।

BHABHI ने मुझसे कहा- तू मेरे साथ जरा बाहर आ।

मैंने BHABHI के साथ बाहर आ गया।

BHABHI ने कहा- इस बार शालू के ऊपर जरा सा भी रहम मत करना। पूरे ताकत के साथ धक्का लगते हुये पूरा का पूरा LUND अन्दर घुसा देना। ज्यादा देर भी मत करना। उसके बाद उसकी किसी दुश्मन की तरह खूब जम कर CHUDAI करना। समझ गये?

मैंने कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करुंगा।

BHABHI ने कहा- मैंने कभी तेरे भैया से GAND नहीं मरवाई थी, मेरी GAND कब मारेगा?

मैंने कहा- जब तुम कहो।

वो बोली- ठीक है, मैं तुझे बता दूंगी। अब चल मेरे साथ कमरे में।

मैं BHABHI के साथ कमरे में आ गया। शालू बेड पर लेटी हुई थी। BHABHI ने मुझसे कहा- अब तू अपने LUND पर तेल लगा ले और शालू की CHUDAI शुरु कर। मैं इसके पास ही बैठ जाती हूँ।

BHABHI शालू के बगल में बैठ गई। मैंने अपने LUND पर ढेर सारा तेल लगा लिया और शालू के पैरों के बीच आ गया। जैसे ही मैंने अपना LUND शालू कि CHOOT पर रखा तो BHABHI ने कहा- ऐसे नहीं, मैं बताती हूँ।

मैंने कहा- बताओ।

BHABHI ने कहा- तू अपना हाथ इसके पैरों के नीचे से डाल कर इसके कन्धे को जोर से पकड़ ले। उसके बाद अन्दर घुसा।

मैंने शालू के पैरों के नीचे हाथ डाल कर शालू के कन्धे को जोर से पकड़ लिया।

BHABHI ने कहा- अब जैसा मैंने तुझे समझाया था ठीक उसी तरह अन्दर घुसा दे।

मैंने शालू के CHOOT के मुँह पर अपने LUND का सुपाड़ा रख दिया। जैसे ही मैंने धक्का लगाया तो BHABHI ने शालू के मुँह को जोर से दबा कर पकड़ लिया। शालू के मुँह से गू गू की आवाज ही निकाल पाई। BHABHI मुझसे बोली- घुसा दे जल्दी से पूरा का पूरा।

मैं तो ताकतवर था ही। मैंने अपनी सारी ताकत लगाते हुये फिर से एक धक्का मारा। शालू की CHOOT से खून की धार निकलने लगी। मेरा LUND खून से नहा गया। वो अपने हाथों को जोर जोर से बेड पर पटकने लगी। उसकी सारी की सारी चूड़ियां टूट गई और उसका हाथ लहुलुहान हो गया। मुँह दबा होने की वजह से उसके मुँह से केवल गू गू की आवाज ही निकल पा रही थी। मैंने फिर से एक धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा LUND शालू की CHOOT में 7″ तक घुस गया। शालू तड़प रही थी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। बेड की चादर पर भी ढेर सारा खून लग गया था।

BHABHI बोली- जल्दी कर।

मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा LUND 8″ घुस गया। मैंने गहरी सांस लेते हुये फिर से जोर का धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा पूरा का पूरा LUND शालू की CHOOT में समा गया।

BHABHI बोली- अपना पूरा LUND बाहर निकाल कर एक ही झटके में फिर से अन्दर कर दे।

मैंने वैसा ही किया, BHABHI ने कहा- शाबास, ठीक इसी तरह से 4-5 बार और कर।

मैंने 4-5 बार फिर से वैसा ही किया।

शालू तड़प रही थी। उसका सारा बदन पसीने से नहा गया थी। उसकी सांस बहुत तेज चल रही थी और सारा बदन थर थर कांप रहा था। मैंने शालू की CHUDAI शुरु कर दी। BHABHI अभी भी उसका मुँह दबाये हुये थी। उसके मुँह से गू गू की आवाज निकल रही थी। उसकी CHOOT ने मेरे LUND को बुरी तरह से जकड़ रखा था। मेरा LUND आसानी से उसकी CHOOT में अन्दर-बाहर नहीं हो पा रहा था। पूरी ताकत के साथ मैं लगभग 10 मिनट तक उसकी CHUDAI करता रहा। शालू अब कुछ हद तक शान्त हो चुकी थी।

BHABHI ने अपना हाथ उसके मुँह पर से हटा लिया तो शालू सिसक सिसक कर रोते हुये कहने लगी- दीदी, आप दोनों ने मिलकर मुझे मार ही डाला। बहुत दर्द हो रहा है।

BHABHI ने कहा- अब तो पहले जैसा दर्द नहीं है ना?

वो बोली- नहीं, अब पहले से बहुत कम है।

BHABHI ने कहा- थोड़ा सबर कर, अभी बाकी का दर्द भी चला जायेगा।

मैं तेजी के साथ उसकी CHUDAI कर रहा था। अब वो चीख नहीं रही थी केवल आहें भर रही थी। मैंने उसे 5 मिनट तक और चोदा तो शालू झड़ गई। उसकी CHOOT और मेरा LUND एकदम गीला हो गया। अब मेरा LUND थोड़ा आसानी से उसकी CHOOT में अन्दर बाहर होने लगा था। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। शालू ने धीरे धीरे सिसकारियां भरनी शुरु कर दी।

BHABHI ने पूछा- अब कैसा लग रहा है?

वो बोली- अब कुछ कुछ मज़ा आ रहा है लेकिन दर्द अभी भी है।

BHABHI ने कहा- अब इस दर्द को जने में समय लगेगा। उसके बाद बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा।

वो बोली- समय क्यों लगेगा?

BHABHI ने कहा- जब यह तुम्हें 3-4 बार चोद देगा तब तुम्हारी CHOOT इसके LUND के आकार की हो जायेगी। उसके बाद यह दर्द अपने आप चला जायेगा।

मैंने और ज्यादा जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये थे और उसे तेजी के साथ चोद रहा था। शालू ने भी अब धीरे धीरे अपना CHOOTड़ उठाना शुरु कर दिया था। वो भी अब मस्ती में आ रही थी। 5 मिनट में ही वो फिर से झड़ गई। उसने मेरे होंठों को चूम लिया और कहा- अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने उसकी CHUDAI जारी रखी। 2 मिनट भी नहीं गुजरे थे कि BHABHI ने कहा- शालू अब तुम इसका LUND अपने दूसरे छेद में ले लो।

वो बोली- फिर से दर्द होगा?

BHABHI ने कहा- अब ज्यादा दर्द नहीं होगा क्योंकि तुम इसका LUND पहले ही अन्दर ले चुकी हो।

वो बोली- फिर इनसे कह दो कि धीरे धीरे करें।

BHABHI ने कहा- यह धीरे धीरे ही करेगा। मैं हूँ ना यहाँ पर। अगर यह बदमाशी करेगा तो मैं इसे बहुत मारूँगी।

वो बोली- ठीक है।

मैंने अपना LUND शालू की CHOOT से बाहर निकाला और उसकी GAND में घुसाने लगा। मेरे LUND पर शालू की CHOOT का ढेर सारा पानी लगा हुआ था। धीरे धीरे मेरा LUND 7″ तक उसकी GAND में घुस गया। उसके बाद जब मैंने और ज्यादा घुसने की कोशिश की तो उसे फिर से दर्द होने लगा और वो चीखने लगी लेकिन इस बार उसने मुझे रोका नहीं।

वो बोली- अब रहने दो, दर्द हो रहा है।

BHABHI ने कहा- बस थोड़ा सा ही तो बाकी है। उसे भी अन्दर ले लो।

वो कुछ नहीं बोली। BHABHI ने मुझे आंख मारी तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। मेरा बाकी का LUND भी उसकी GAND में समा गया। वो जोर से चीखी तो BHABHI ने कहा- बस हो गया।

उसके बाद मैंने उसकी GAND मारनी शुरु कर दी। थोड़ी देर चीखने के बाद वो शान्त हो गई। अब उसे GAND मरवाने में भी मज़ा आने लगा था। लगभग 5 मिनट तक मैंने उसकी GAND मारी तो BHABHI ने कहा- अब रहने दो।

मैंने कहा- अभी तो मेरे LUND का पानी ही नहीं निकाला है।

वो बोली- मैं मना थोड़े हो कर रही हूँ। अब तुम इसकी CHOOT में अपना LUND डाल कर इसे CHODO।

मैंने अपना LUND शालू की GAND से निकाल कर उसकी CHOOT में डाल दिया। उसके बाद मैंने पूरे ताकत के साथ जोर जोर से उसकी CHUDAI शुरु कर दी। 5 मिनट में ही शालू फिर से झड़ गई। मैं इसके पहले 2 बार शालू की GAND मार चुका था और 2 बार BHABHI को चोद चुका था। इसलिये मेरे LUND का पानी निकालने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैं जोर जोर के धक्के लगाते हुये शालू को चोद रहा था। वो भी अपना CHOOTड़ उठाने लगी थी। थोड़ी देर बाद वो बोली- दीदी, अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इनसे कह दो कि थोड़ा और जोर जोर से धक्का लगाये।

BHABHI ने मुझसे कहा- तुमने सुना, यह क्या कह रही है?

मैंने कहा- हां।

वो बोली- तो फिर तुम इसका कहा मानो और अपनी ताकत दिखा दो इसे।

मैंने पूरा ताकत लगते हुये बहुत ही जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये।

BHABHI ने शालू से पूछा- अब ठीक है?

वो बोली- हां, अब मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा है।

शालू अब CHOOTड़ उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। मेरा LUND उसकी CHOOT में पूरा का पूरा सटा सट अन्दर बाहर हो रहा था। 10 मिनट कि CHUDAI के बाद शालू फिर से झड़ गई। मैंने अपना LUND उसकी CHOOT से बाहर निकाल लिया तो उसने मेरे LUND को तुरन्त पकड़ लिया और कहने लगी- बाहर क्यों निकाल रहे हो। अभी मुझे और मज़ा लेना है।

मैंने कहा- मैं तुम्हें अभी और मज़ा दूंगा। अब तुम घोड़ी की तरह हो जाओ। वो डोगी स्टाईल में हो गई तो मैं उसके पीछे आ गया। मैंने अपना LUND उसकी GAND में घुसा दिया और उसकी GAND मारने लगा। वो जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी।

5 मिनट तक उसकी GAND मरने के बाद मैं अपना LUND उसकी GAND से निकाल कर उसकी CHOOT में डाल दिया और उसकी CHUDAI करने लगा। मैं उसकी कमर को पकड़ कर उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था। वो भी अपना CHOOTड़ आगे पीछे करते हुये मेरा साथ देने लगी थी। 10 मिनट उसकी CHUDAI करने के बाद मैं झड़ गया। मेरे साथ ही साथ शालू भी फिर से झड़ गई। मैंने अपना LUND बाहर निकाला तो BHABHI ने शालू से कहा- अब तुम इसके LUND को चाट लो।

वो बोली- मैं इनके LUND को नहीं चाटूंगी। इनका LUND गंदा है। BHABHI ने कहा- गंदा कहां है। इसके LUND पर तुम्हारी CHOOT का और इसके LUND का पानी ही तो लगा है। इसे चाटने से प्यार बढता है। चाट लो इसे। वो बोली- मैं नहीं चाटूंगी। मुझे घिन आती है। BHABHI ने कहा- मैं ही चाट लेती हूँ। फिर आगे से तुझे ही चाटना पड़ेगा। वो बोली- ठीक है, पहले तुम चाट कर दिखाओ, बाद में मैं चाट लूंगी। BHABHI मेरे LUND को चाटने लगी। शालू देख रही थी। मेरे LUND पर लगा हुआ थोड़ा सा पानी BHABHI ने चाट लिया फिर शालू से बोली- अब बाकी का तुम चाट लो। शालू ने शरमाते हुये मेरे LUND को चाटना शुरु कर दिया। उसने मेरे LUND पर लगे हुये बाकी के पानी को चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

BHABHI ने शालू से कहा- अब तुम्हे जब ये फिर से चोदेगा तो चिल्लाओगी तो नहीं। वो बोली- अब क्यों चिल्लाऊंगी। अब तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा है। BHABHI ने कहा- फिर ठीक है, तुम आराम कर लो। जब तुम्हारा मन करगा तो इसे बुला लेना। मैं इसके साथ अपने कमरे में जा रही हूँ। मुझे इस से कुछ बात करनी है। वो बोली- ठीक है, बुला लूंगी। BHABHI बोली- मैं भी इसके साथ आउनगि तुम्हारे पास और अपने सामने ही तुम्हारी CHUDAI करा दूंगी।

BHABHI बाहर चली गई तो मैं भी उनके पीछे पीछे बाहर चला आया। मैंने BHABHI से कहा- तुमने मुझसे शालू एक सामने ही चुदवा लिया। वो क्या सोचेगी। BHABHI ने कहा- उसे कुछ भी नहीं मालूम है। अगर उसे कुछ मालूम होता तो भला वो मुझे चुदने को क्यों कहती। चलो अच्छा ही हुआ कि अब मुझे और शालू को एक दूसरे के सामने तुमसे चुदवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। हमारा रास्ता पूरी तरह से साफ़ हो गया। मैं शालू से भी इस बार में बात कर लूंगी।

मैंने BHABHI से पूछा, GAND कब मरवाओगी। वो मुस्कुराते हुये बोली- क्या मेरी GAND भी फ़ाड़नी है। मैंने कहा- हां। वो बोली- कल फ़ाड़ देना। मैंने कहा- थोड़ा सा आज अन्दर ले लो बाकी का कल अन्दर ले लेना। वो बोली- जो तेरा जी कहे कर। अब तो मैं तेरी बीवी बन गई हूँ। मैं BHABHI के बगल में लेटा हुआ उनसे बातें करता रहा और उनकी CHOOT को सहलाता रहा। वो मुझे तरह तरह की स्टाईल में CHODNA सिखा रही थी और मेरे LUND को भी सहला रही थी। लगभग 1 घनते के बाद मेरा LUND फिर से खड़ा होने लगा। मैंने BHABHI से कहा- शालू ने अभी तक मुझे बुलाया ही नहीं। मैं अब तुम्हारी GAND में ही LUND घुसाने की कोशिश करता हूँ।

BHABHI और हम दोनों अभी तक नंगे ही थे। मैंने BHABHI से घोड़ी बन जाने को कहा तो वो घोड़ी बन गई। मैंने अपने LUND का सुपाड़ा उनकी GAND के छेद पर रखा तो वो बोली- तेल तो लगा ले। मैंने कहा- नहीं ऐसे ही। वो बोली- फिर तो बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- होने दो। तुम कोई 16 साल कि थोड़े ही हो। वो बोली- ठीक है, जैसी तेरी मरजी। मैंने अपना LUND उनकी CHOOT में डाल दिया और उनकी CHUDAI शुरु कर दी।

5 मिनट में ही BHABHI झड़ गई तो मेरा LUND गीला हो गया। अब तेल लगने कि जरूरत नहीं थी। मैंने अपने LUND का सुपाड़ा उनकी GAND के छेद पर रखा और थोड़ा सा जोर लगाया। BHABHI के मुँह से जोर कि आह निकाली और मेरे LUND का सुपाड़ा उनकी GAND में घुस गया। मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो तड़प उठी और बोली- जरा धीरे से। मैंने फिर से जोर लगाया तो उनके मुँह से चीख निकल गई। मेरा LUND BHABHI कि GAND में अब तक 4″ घुस चुका था। मैंने और ज्यादा अन्दर घुसाने की कोशिश नहीं की। मैंने धीरे धीरे धक्के लगने शुरु कर दिये।

2 मिनट में ही BHABHI का दर्द जाता रहा तो वो बोली- थोड़ा और अन्दर कर दे।

मैंने फिर से थोड़ा जोर लगाया तो वो फिर से चीखी और मेरा LUND उनकी GAND में 5″ तक घुस गया। तभी शालू आ गई। उसने कपड़े नहीं पहने थे। वो एक दम नंगी थी। उसने हम दोनों को देखा तो बोली- दीदी, तुम भी मज़ा ले रही हो। BHABHI ने कहा- ये तेरा बड़ी देर से इनतजार कर रहा था लेकिन तूने इसे बुलाया ही नहीं। इसे जोश आ गया और उसने मेरी GAND में अपना LUND घुसाना शुरु कर दिया। मैं इसे मना नहीं कर पाई।

वो बोली- मुझे भी फिर से चुदवाना है।

BHABHI ने कहा- तो आ जा। शालू ने कहा- लेकिन ये तो आप को चोदने जा रहा है। BHABHI ने कहा- मेरा क्या है, मैं तो कभी भी चुदवा लूंगी। पहले तू चुदवा ले। तेरा चुदवाना ज्यादा जरूरी है। मैं तो बहुत मज़ा ले चुकी हूँ।

शालू BHABHI के बगल में ही घोड़ी की तरह बन गई। मैंने अपना LUND BHABHI कि GAND से बाहर निकाल कर शालू की GAND में घुसाना शुरु कर दिया। वो दर्द के मारे आहे भरने लगी। धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा LUND शालू कि GAND में घुस गया तो मैंने उसकी GAND मारनी शुरु कर दी। वो बोली- आगे के छेद में घुसा कर CHODO। मुझे उसमें ज्यादा मज़ा आता है। मैंने कहा- थोड़ी देर पीछे के छेद की CHUDAI कर लूं फिर आगे के छेद को भी चोदूंगा। वो बोली- ठीक है, जैसी तुम्हारी मरजी। मैं शालू की GAND मारता रहा।

BHABHI शालू से कहने लगी, तू तो जानती है कि राज के भैया का स्वर्ग्वास हुये बहुत दिन हो चुके है। मैंने बहुत दिनो से चुदवाया नहीं था और मेरी इच्छा भी मर चुकी थी। लेकिन आज मैंने तेरी खुशी के लिये तेरे कहने पर इस से चुदवा लिया। इस से चुदवाने के बाद मेरी CHOOT और GAND की आग फिर से भड़क गई है। मैं जानती हूँ कि ये बहुत ही गलत बात है लेकिन मैं अब इस से चुदवये बिना नहीं रह सकति। अगर किसी को ये पता चल गया तो मेरी बड़ी बदनामी होगि। अब तू ही बता कि मैं क्या करूं। मैं तो अब मर जाना चाहती हूँ।

वो बोली- दीदी, तुम ऐसा क्यों कह रही हो। तुम इनसे जी भर कर चुदवाओ और खूब मज़ा लो। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। अगर मैं तुम्हे कभी मना करूं तो तुम मुझे ही मार डालना। ये बात किसी को नहीं पता चलेगी।

BHABHI ने कहा- फिर तू मेरी कसम खा कर कह दे कि तू कभी भी किसी से नहीं कहेगी। शालू ने अपना हाथ पीछे कर के मेरा LUND पकड़ लिया और बोली- मैं तुम्हारी कसम क्यों खांऊ। मैं अपने पति का LUND पकड़ कर कसम खाती हूँ कि मैं कभी भी किसी से कुछ भी नहीं कहूँगी। अब तो आप को मेरी बात पर विश्वास हो गया।

BHABHI ने कहा- मुझे तुझ पर पूरा विश्वास है। वो बोली- अब इनसे कह दो कि मेरी CHOOT में अपना LUND डाल कर मेरी CHUDAI करे। मुझे GAND मरवाने में ज्यादा मज़ा नहीं आता है। BHABHI ने मुझसे कहा- सुन रहा है ना तू कि शालू क्या कह रही है। अब इसकि इच्छा पूरी कर।

मैंने अपना LUND शालू कि CHOOT में घुसा दिया और उसकी CHUDAI करने लगा। 2 मिनट में ही वो एक दम मस्त हो गई। उसने पूरि मस्ती के साथ मुझसे चुदवाना शुरु कर दिया। वो तेजी के साथ अपना CHOOTड़ आगे पीछे करते हुये मेरा साथ दे रही थी। मैं भी पूरे जोश और ताकत के साथ उसे चोदता रहा।

शालू कि CHUDAI करते हुये मुझे लगभग 30 मिनट गुजर चुके थे। वो अब तक 3 बार झड़ चुकी थी लेकिन मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। शालू बोली- दीदी, मैं थक गई हूँ। BHABHI ने कहा- क्यों, मज़ा नहीं आ रहा है क्या। वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है लेकिन अभी मेरी चुदवाने के आदत नहीं है ना। BHABHI बोली- फिर मैं क्या करूं। जब राज झड़ जायेगा तब ही तो तुम्हारी CHUDAI बंद करेगा। वो बोली- मुझे थोड़ा सा आराम कर लेने दो। मैं बाद में चुदवा लूंगी।

BHABHI ने कहा- जब LUND खड़ा हो CHUDAI नहीं बंद की जाती इस से आदमी के सेहत पर बुरा असर पड़ता है। वो बोली- इन से कह दो कि अब रहने दे। बाद में चोद लेंगे। तब तक तुम ही इनसे चुदवा लो। BHABHI ने कहा- अच्छा बाबा, मैं ही चुदवा लेती हूँ।

मैंने अपना LUND शालू कि CHOOT से निकाल कर BHABHI कि GAND में घुसाना शुरु कर दिया। मेरा LUND शालू कि CHOOT के पानी से पहले से ही भीगा हुआ था। धीरे धीरे मेरा LUND BHABHI कि GAND में 5″ तक घुस गया। मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिये। थोड़ी देर बाद जब मैंने देखा कि BHABHI भी मस्ती में आ गई है तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। इस धक्के के साथ ही मेरा LUND BHABHI कि GAND को चीरता हुआ 7″ तक अन्दर घुसा गया।

BHABHI के मुँह से जोर की चीख निकाली तो शालू ने कहा- दीदी, तुम क्यों चीख रही हो। तुम तो चुदवाने कि आदी हो। BHABHI ने कहा- मैंने आज तक इस से GAND नहीं मरवाई थी। तुम तो जानती ही हो कि इसका LUND बहुत लम्बा और मोटा है इसीलिये मुझे भी दर्द हो रहा है और मैं चीख रही हूँ। बस अभी थोड़ी ही देर में मेरा दर्द कम हो जायेगा फिर मुझे भी तेरी तरह खूब मज़ा आने लगेगा।

धीरे धीरे BHABHI फिर से मस्ती में आ गई। मैंने पूरे ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा। वो फिर से चीखी और मेरा LUND 8″ तक घुस गया। मैंने फिर एक धक्का मारा तो वो बुरी तरह से चीखने लगी और मेरा पूरा का पूरा LUND BHABHI की GAND में समा गया। मैंने तेजी के साथ धक्के लगने शुरु कर दिये। थोड़ी ही देर में BHABHI शान्त हो गई और उन्हें मज़ा आने लगा। तभी शालू बोली- दीदी, अब मैं तैयार हूँ। इन से कह दो कि अब मुझे चोद दे। BHABHI ने कहा- बार बार मुझसे क्यों कहती है। तू खुद ही इस से कह दे। अब मैं इस से कुछ नहीं कहूँगी।

शालू ने मेरा LUND पकड़ लिया और बोली- अब तुम मुझे चोद दो।

मैं खुश हो गया। मैंने अपना LUND BHABHI कि GAND से निकाल कर शालू कि CHOOT में डाल दिया और उसकी CHUDAI शुरु कर दी। उसने भी मेरा साथ देना शुरु कर दिया। 15 मिनट कि CHUDAI के बाद मैं झड़ गया। शालू भी मेरे साथ ही साथ झड़ गई। जैसे ही मैंने अपना LUND उसकी CHOOT से बाहर निकाला तो उसने मेरा LUND चाटना शुरु कर दिया। मैं बहुत खुश हो गया।

BHABHI ने शालू से कहा- अब घिन नहीं आ रही है?

वो बोली- बिलकुल नहीं, अब तो मुझे भी खूब मज़ा आने लगा है। हम सब नंगे ही सो गये।

रात के 7 बजे शालू मेरा LUND सहलाने लगी। मैं जग गया तो वो बोली- एक बार फिर से चोद दो। मैंने कहा। क्यों श्रीमती जी, अब चुदवाने में मज़ा आने लगा है। वो बोली- हां, अब तो मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे सारा दिन चोदते रहो। उसने कुछ कहे बिना ही मेरा LUND मुँह में ले लिया और चूसने लगी। तभी BHABHI भी उठ गई। BHABHI ने मुस्कुराते हुये कहा- शालू, तू इसका LUND क्यों चूस रही है। वो बोली- मुझे चुदवाना है। BHABHI ने शालू से मज़क किया, पहले तो बहुत चिल्ला रही थी अब क्या हुआ।

वो बोली- पहले मुझे मालूम नहीं था कि इसमें इतना मज़ा आता है। थोड़ी ही देर में मेरा LUND खड़ा हो गया। मैंने शालू कि CHUDAI शुरु कर दी। उसने पूरी मस्ती के साथ चुदवाया। मैंने भी उसे पूरे जोश के साथ लगभग 45 मिनट तक चोदा। वो इस बार कि CHUDAI के दौरन 4 बार झड़ चुकी थी।

उसके बाद BHABHI और शालू खाना बनने चले गये। मैं टीवी देखने लगा। लगभग डेढ घन्टा गुजर गया तो शालू किचन से बाहर आई। उसने मुझसे कुछ कहे बिना ही मेरा LUND मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने पूछा- अब क्या हुआ।

वो बोली- चुदवाना है भई।

मैंने कहा- पहले मुझे खाना खा कर थोड़ा आराम कर लेने दो। बहुत थक गया हूँ।

वो बोली- बाद में खा लेना, पहले तुम मुझे एक बार और चोद दो। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

तभी BHABHI आ गई। उन्होने शालू से कहा- सुबह से ही ये हम दोनों को कई बार चोद चुका है। इसे खाना खा कर थोड़ा आराम कर लेने दे, फिर सारी रात खूब जम कर चुदवाना। वो बोली- दीदी, मुझसे रहा नहीं जा रहा है। मेरा मन अज़ीब सा हो रहा है।

BHABHI ने मजाक करते हुये कहा- अगर तू इतना ही तड़प रही है तो चल मेरे साथ किचन में। मैं तेरी CHOOT में बेलन घुसेड़ देती हूँ।

वो बोली- फिर घुसेड़ दो ना। मैं आप को कुछ भी नहीं कहूँगी। शादी के पहले मैं अच्छी भली थी। शादी के बाद इन्होने मेरी CHUDAI कर के मेरी CHOOT और GAND में आग सी भर दी है। अब आप ही बताओ कि मैं क्या करूं।

BHABHI ने कहा- थोड़ा सबर करना सीख। आखिर ये भी तो इन्सान है। थक गया है बेचारा।

वो बोली- एक बार ये मुझे और चोद दे। फिर मैं कभी भी इनसे चुदवाने कि ज़िद नहीं करूंगी। जब भी मुझे जोश आयेगा मैं इनका LUND मुँह में लेकर चूस लूंगी। उसके बाद ये मुझे CHODNA चाहे तो चोदेंगे। मैंने कहा- ठीक है। आ जाओ मेरे पास।

मैं सोफ़े पर बैठा था। शालू के चूसने से मेरा LUND खड़ा हो ही चुका था। मैंने उस से कहा- अब तुम खुद ही मेरे LUND को अपनी CHOOT में घुसेड़ लो और धक्के लगओ।

वो तुरन्त ही मेरी जांघो पर बैठ गई और मेरे LUND को अपनी CHOOT के अन्दर घुसेड़ लिया। उसके बाद उसने धक्के लगने शुरु कर दिये। 5 मिनट में ही वो हांफ़ने लगी और बोली- मुझे इस तरह मज़ा नहीं आ रहा है। जब तुम खूब जोर जोर के धक्के लगते हुये मुझे चोदते हो तब ही मुझे मज़ा आता है। चोद दो ना मुझे।

मैंने कहा- अच्छा बाबा, अब तुम मेरे सामने घोड़ी बन जाओ।

वो तुरन्त ही मेरे सामने घो्ड़ी बन गई। उसकी CHOOT मेरे तरफ़ थी। मैं थोड़ा गुस्से में था। मैंने अपना LUND उसकी CHOOT में घुसा दिया और उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। उसके बाद मैंने बड़ी बेरहमी के साथ उसकी CHUDAI शुरु कर दी। BHABHI कभी मुझे और कभी शालू को देख रही थी। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं शालू को इतनी बुरी तरह से भी चोद सकता हूँ। शालू भी बहुत सेक्सी निकाली। मैं उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था लेकिन उसे तो इस CHUDAI में और ज्यादा मज़ा आ रहा था। वो अपना CHOOTड़ आगे पीछे करते हुये पूरी मस्ती के साथ चुदवा रही थी। मैंने उसे लगभग 55 मिनट तक खूब जम कर चोदा। इस बार कि CHUDAI एक दौरान शालू 5 बार झड़ गई थी। BHABHI और मैं उसे देख कर दंग रह गये। शालू ने मेरे LUND को चाट कर साफ़ किया और फिर बाथरूम चली गई।

BHABHI ने मुझसे कहा- तुमने उसे उसे इतनी बुरी तरह से चोदा फिर भी उसे मज़ा आ रहा था। वो तो मुझसे भी ज्यादा सेक्सी है।

मैंने कहा- अभी वो नई है इसलिये और उसे ज्यादा जोश आ रहा है। अभी तो उसने ज्यादा बार चुदवाया ही कहां है। केवल कुछ दिन आप मुझसे मत चुदवओ। मुझे केवल शालू की CHUDAI करने दो। मैं उसे इतनी ज्यादा बार और इतनी बुरी तरह से चोदूंगा कि उसकी CHOOT और GAND की आग ठण्डी हो जायेगी। वो मुझसे रो रो कर कहेगी कि मुझे अब मत CHODO। BHABHI ने कहा- ठीक है।

तभी शालू बाथरूम से वापस आ गई और बोली- देवर BHABHI क्या बातें कर रहे हो। BHABHI ने शालू से कहा- मैं इस से समझा रही थी कि ये कुछ दिनो तक मेरी CHUDAI ना करे। केवल खूब जम कर तुम्हारी CHUDAI ही करे। शालू बोली- आप ने तो मेरे मुँह की बात छीन ली। मैं भी यही चाहती थी।

BHABHI ने कहा- मैं समझ सकती हूँ क्यों कि अभी तुम नई नई हो और तुम्हारे अन्दर जोश का ज्वालामुखी फूट रहा है। ये तुम्हारे CHOOT के ज्वालामुखी को अपने LUND के पानी से बुझा देगा उसके बाद मैं भी चुदवाना शुरु कर दूंगी। शालू बोली- दीदी, तुम एक दम ठीक कह रही हो।

अगले 4 दिनो तक BHABHI तड़पती रही। उनका चेहरा एक दम उदास हो गया था। मैं केवल शालू की ही CHUDAI करता रहा। शालू को चुदवाने में ही ज्यादा मज़ा आता था। मैंने भी शालू की खूब जम कर CHUDAI की। उसने भी पूरि मस्ती के साथ मेरा साथ दिया और खूब जम कर चुदवाया। मैंने इन 4 दिनो में उसे लगभग 30 बार बहुत ही बुरी तरह से चोदा था। उसकी CHOOT का मुँह एक दम चौड़ा हो चुका था। अब उसका जोश कुछ ठण्डा पड़ चुका था। अब तो वो कभी कभी चुदवाने से इन्कार भी करने लगी थी। शालू की विदाई भी होने वाली थी। उसे 1 महीने के लिये मायके जाना था। 5 दिन गुजर जने के बाद वो मायके चली गई। मायके जाते समय वो मुझसे लिपट कर बहुत रोई। मैंने पूछा, क्या हुआ। उसने कहा- 1 महीने तक मैं बिना चुदवाये कैसे रहूँगी। मैंने कहा- तुम्हे इतना सबर तो करना ही पड़ेगा। सभी औरतो को शादी के बाद मायके तो जाना ही पड़ता है। वो मायके चली गई।

उसके जाने के बाद BHABHI मुझसे लिपट गई और फूट फूट कर रोने लगी। मैंने पूछा, क्या हुआ?

तो वो बोली- तुम्हारे भैया के स्वर्गवास हो जने के बाद मेरा जोश एक दम ठण्डा हो गया था। मैं तुम्हारे साथ अकेली ही रहने लगी थी लेकिन मैंने कभी भी तुम्हे बुरी नज़र से नहीं देखा। मैं आराम से रहने लगी थी। तुम्हारा LUND देखने के बाद मुझे जोश आ गया और मैंने तुमसे चुदवा लिया। शालू को GAND मरवाते हुये देख कर मैंने तुमसे GAND भी मरवा ली। उसमें भी मुझे बहुत मज़ा आया। तुमने मेरी CHUDAI कर के और मेरी GAND मार कर मेरे सारे बदन में आग लगा दी है। 5 दिनों से तुमने मुझे चोदा नहीं और ना ही मेरी GAND मारी। मैंने ये 5 दिन कैसे गुजरे है मैं ही जानती हूँ। शालू तो अब 1 महीने के लिये मायके चली गई है। अब तुम मेरी CHOOT और GAND की आग को पूरी तरह से बुझा दो। मैंने कहा- BHABHI, मैंने तो इनकार नहीं किया है। वो बोली- तुमने ऑफ़िस से शादी के लिये 7 दिनो कि छुट्टी ली थी। तुम 7 दिनो की छुट्टी और ले लो। फिर मुझे 7 दिनो तक खूब जम कर CHODO। मुझे उसी तरह से CHODNA जैसे कि उस दिन तुमने गुस्से में शालू को चोदा था।

मैंने कहा- तुम जैसा कहोगी मैं तुम्हे वैसे ही चोदूंगा। मैं तुम्हे पूरी तरह से संतुष्ट कर दूंगा।

BHABHI ने सारे कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो गई। उन्होने मेरा LUND चूसना शुरु कर दिया। 2 मिनट में ही मेरा LUND खड़ा हो गया तो मैंने ठीक उसी ताह से BHABHI को CHODNA शुरु किया जैसे मैंने शालू को गुस्से में चोदा था। उस तरह की CHUDAI से BHABHI एक दम मस्त हो गई। 7 दिनो तक मैं ऑफ़िस नहीं गया। मैंने इन 7 दिनो में सारा दिन और सारी रात BHABHI की खूब जम कर CHUDAI की। उसके बाद भी शालू के आने तक मैंने उन्हें खूब चोदा। BHABHI की CHOOT कि आग भी कुछ हद तक बुझ चुकी थी। शालू के वापस आ जाने के बाद मैं उन दोनों कि CHUDAI करने लगा। अब वो दोनों ही मुझसे चुदवा कर पूरी तरह से खुश है और मैं भी।

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