CHACHI KI JAWANI

मेरा नाम राज है। काफी दिनों से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी सबको बताऊँ। आखिर यहीं से कहानियाँ पढ़ के मैं भी बड़ा हुआ हूँ। यहीं मैंने मुठ मारना सीखा, यहीं से मेरी सोच में सारी औरतें और लड़कियाँ एक सी लगने लगीं, इसलिये आज मैं आप सबको अपनी कहानी सुना रहा हूँ। मेरा नाम तो आप जान ही गए हैं। मेरी माँ का नाम सोनम है। मैं एक संयुक्त परिवार में रहता हूँ। मेरे परिवार में मेरी दो चाचियाँ हैं, बड़ी CHACHI का नाम अनीता और छोटी CHACHI का नाम हेमा है। मेरी माँ की उमर 42 होगी, अनीता CHACHI 36 की हैं और हेमा CHACHI 32 की। मेरी एक दीदी का नाम गीता है जो 21 साल की है।

बात उस समय की है जब मैं 12वीं की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चला गया था, वहीं पे मुझे इन कामुक कहानियों की आदत पड़ी। इन कहानियों में तो माँ बहन का कोई लिहाज होता नहीं है और कहानियाँ पढ़ने में काफी रोचक होती हैं तो मैं सारी कहानियाँ पढ़ जाता हूँ। उसके बाद से जब कभी भी मैं घर वापस जाता तो मेरे दिमाग में यही कहानियाँ चलती रहती थी। इन कहानियों ने मेरी जिंदगी ही बदल दी या फिर यह भी कह सकते हैं कि मेरी लाइफ बना दी।

मैं घर पे काफी अकेला-अकेला सा रहने लगा। अकेले में अन्तर्वासना कहानियों को याद करके मैं दिन में कई बार मुठ मारता था।

एक दिन जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया तो देखा वहाँ अनीता CHACHI की PANTY और BRA लटक रही थी। शायद CHACHI उन्हें ले जाना भूल गई थी। यह पहली बार था कि मैं किसी औरत की PANTY और BRA इतनी पास से देख रहा था। मेरा हाथ रोके नहीं रुका और मैं उनको अपने हाथ में ले के सूंघने लगा, उसकी मादक सुगंध से मैं मदहोश होने लगा। मैं PANTY को अपने मुँह में लेके चूसने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अनीता CHACHI की चुत चूस रहा हूँ। उसके बाद मैं BRA को भी मुँह में ले के खेलने लगा।

उस दिन पहली बार मेरा LUND इतना बड़ा लग रहा था। मेरे LUND का आकार इतना बड़ा आज तक नहीं हुआ था। उसके बाद मैंने अपने LUND से PANTY और BRA को खूब चोदा, उसे LUND में लपेट के मैंने अपना मुठ उसी में गिरा दिया, फिर अच्छे से धो के CHACHI की BRA और PANTY वहीं रख दी। उस दिन हिलाने में जितना मजा आया था उतना पहले कभी नहीं आया था।

मैं नहा कर नाश्ते के लिए गया, वहाँ अनीता CHACHI ही खाना खिला रही थी। CHACHI मुझे देख के मुस्कुराई। आज मैं CHACHI को देख के उनको देखता हो रह गया, वो भी मुस्कुराती ही जा रही थी। CHACHI ने हाफ ब्लाउज पहन रखा था, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं बता नहीं सकता। मैंने तो सोच लिया कि आज के बाद मैं जब भी मुठ मारूंगा, CHACHI की PANTY BRA ले के ही मारूंगा और CHACHI को ही याद करके अपना रस निकालूँगा।

अगले दिन जब CHACHI नहा के निकली, मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम की ओर दौड़ा ताकि कोई और ना चला जाए बाथरूम में। पर अन्दर जाते ही मुझे काफी निराशा हुई। इस बार CHACHI ने वहाँ अपने कोई कपड़े नहीं छोड़े थ। मैं उदास मन से नहा के बाहर आ गया। अपने कमरे में जा के भी मैं यही सोच रहा था कि आज कैसे मुठ मारी जाए। तब मैं हिम्मत करके छत पे गया, वहाँ देखा तो CHACHI की PANTY लटक रही थी। मुझे लगा कि यहाँ पर मुठ मारूंगा तो अच्छा नहीं होगा। सो मैंने उसे अपने अंडरवियर में छुपा लिया और अपने कमरे में चला गया। CHACHI की PANTY को छूते ही अन्दर मेरा LUND जाग गया था। फिर कमरे में जाकर मैंने जी भर के मुठ मारी, फिर PANTY को धो के वहीं लटका आया।

फिर मैंने इसी तरह काफी दिनों तक अनीता CHACHI की मदद से मुठ मारते हुए काफी मज़े लिए। इससे मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी। अब मैं कभी कभी कमरा खुला छोड़ के मुठ मारने लगा था। अब मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि केवल मुठ मार के मेरा मन नहीं भरता था। अब CHACHI के कपड़ो से मेरा LUND कड़क नहीं हो पाता था। मुझे लगा कि अब कुछ करना पड़ेगा।

मैं अब अनीता CHACHI के कमरे में ताक-झांक करने लगा, यह सोच कर कि कभी मैं CHACHI को नंगा देख सकूँ तो मजा आ जाए। बाथरूम में तो कई बार कोशिश कर चुका था पर CHACHI हमेशा बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लेती थी, इसलिए मुझे सफलता नहीं मिल पाई थी।

एक दिन दोपहर में जब काफी गर्मी थी तो मैं खाना खा के CHACHI के कमरे में चला गया। वहाँ खिड़की में काफी बड़े-बड़े परदे लगे हुए थे। उसमें कोई भी आसानी से छुप सकता थ। गर्मी इतनी थी तो मैंने सोचा शायद CHACHI जब काम करके आएगी तो कुछ कपड़े तो जरूर उतारेंगी, यही सोच कर मैं परदे के पीछे छुप गया। थोड़े देर बाद जब CHACHI आई तो मेरा सोचना सही निकला।

CHACHI ने कमरे का दरवाज़ा बंद करके तुंरत ही साड़ी उतार फेंकी। मैं तो देखता ही रह गया। CHACHI ब्लाउज और साये में काफी खूबसूरत लग रही थी। CHACHI बिस्तर पर लेट गई पर गर्मी इतनी थी कि CHACHI को अभी भी पसीना आ रहा था। CHACHI से रहा नहीं गया, उन्होंने साया पूरा उपर कर लिया। अब मैं उनकी जांघों का मजा ले रहा था। उन्होंने गुलाबी रंग की PANTY पहन रखी थी, वो पसीने से भीग चुकी थी। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि आज इतनी गर्मी हो कि CHACHI पूरी नंगी हो जाए और मेरा सपना पूरा हो जाए। पर भगवान ने मेरी सुनी नहीं। CHACHI साया ऊपर करके ही सो गई।

काफी देर इन्तज़ार करने के बाद मैं उनकी जांघों को ही देख के मुठ मारने लगा और रस को अपने हाथ में गिरा लिया ताकि किसी को पता न चले और खिड़की से ही कूद के अपने कमरे में चला गया।

दूसरे दिन भी मैं आशा लगा के वहीं छुप गया। आपको यकीन नहीं होगा कि अगले दिन भगवान ने मेरी सुन ली थी। CHACHI ने आते ही साड़ी ब्लाउज और साया तीनों उतार कर फ़ेंक दिए। PANTY और BRA में CHACHI किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। CHACHI बिस्तर पे लेट गई और अपने हाथ से PANTY को सहलाने लगी। मुझे लगा कि CHACHI ऐसे ही सहला रही है, पर CHACHI ने जब अपनी चुत में अपनी ऊँगलियाँ डालनी शुरू की तो मुझे लगा कि आज CHACHI गरम हैं, आज वो भी मुठ मारने वाली हैं। मुझे तो स्वर्ग मिल गया था।

CHACHI ने फिर फिर अपनी PANTY उतार दी और मैं उनकी चुत को देखता रह गया। और CHACHI ने फिर अपनी BRA भी उतार कर फ़ेंक दी। उनकी चुचियों को पहली बार मैं ऐसे नग्न देख रहा था। 38 इंच की उनकी चूचियाँ बस मेरी हालत ख़राब कर रही थी। इतनी बड़ी चूचियाँ मैंने तो सपने में ही देखी थी। उधर मेरा हाथ मेरे LUND की माँ बहन एक कर रहा था। मुझे पता भी नहीं चला कब CHACHI उठ कर खिड़की की तरफ़ आने लगी। मैंने जैसे ही देखा तो मैं जल्दी से खिड़की से कूद के भाग गया।

मैं इतना गरम हो चुका था कि खुले दरवाज़े ही मैं अपने बिस्तर पर लेट के ज़ोर ज़ोर से LUND हिलाने लगा। हिलाते हिलाते जब मेरी नज़र दरवाज़े पर गई तो मैं तो बस पत्थर हो गया। देखा कि CHACHI मुझे देख रही हैं। CHACHI को देखते ही मेरा LUND एकदम सिकुड़ गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

तब CHACHI ही बोली- क्या कर रहा है रे राज?

मैं- कुछ नहीं CHACHI!

CHACHI- कुछ नहीं का मतलब? तू ये सब कब से कर रहा है और किसने सिखाया तुझे ये सब! हाँ?

मैं- CHACHI, मैं कभी कभी करता हूँ, वो मेरे एक दोस्त ने बताया था इसके बारें में!

CHACHI- तूने ऐसे ऐसे दोस्त बना के रखे हैं जो तुझे ये सब सिखाते हैं?

मैं- CHACHI मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं आगे से कभी नहीं करूँगा! और प्लीज़ किसी को नहीं बताइयेगा!

CHACHI- ठीक है वो सब, मैं किसी को नहीं बोलूंगी पर तू मेरे जवाबों का सही सही जवाब देगा तब!

मैं- हाँ CHACHI, मैं आपको सब सच सच बोलूँगा।

CHACHI- किसके बारे में सोच के अभी तू हिला रहा था?

मैं- सच बोलूं CHACHI? आपको सोच के हिला रहा था!

CHACHI- मुझे सोच के हिला रहा था या देख के हिला रहा था? तू मेरे कमरे में था ना खिड़की के पास?

मैं- नहीं CHACHI, मैं नहीं था!

CHACHI ने मेरे गाल पे एक ज़ोर से तमाचा मारा।

CHACHI- तूने बोला कि सब सच बोलूँगा और तू झूठ बोले रहा हैं। मैंने तो कल ही समझ लिया था जब मैंने खिड़की के परदे के नीचे तेरे रस की कुछ बूंद देखी। क्यूँ तेरे ही काम थे थे ना वो?

मैं- CHACHI, पता नहीं कैसे गिर गया वो, मैंने तो हाथ में ही निकाला था। सॉरी CHACHI…!

CHACHI- और तू ही मेरे BRA और PANTY ले के उसमें मुठ मारता है ना? वो सब दाग तुमने ही लगाये थे न मेरे कपडों में?

मैं- CHACHI आपको वो भी मालूम चल गया? पर मैं तो उसे धो देता था!

CHACHI- अरे इसके दाग ऐसे ही थोड़े चले जाते हैं, और फिर मैं तेरी CHACHI हूँ रे! कोई दूध पीती बच्ची नहीं ..तुझे ये क्या सूझी रे कि तूने अपने CHACHI को अपनी मुठ मारने का जरिया बना लिया?

मैं- CHACHI मुझे माफ़ कर दीजिये, पर क्या करूँ आप हो ही इतनी सेक्सी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया!

CHACHI- तुझे ये 36 साल की औरत सेक्सी लगती है रे… तू भी ना!… अच्छा सुन ये अच्छी बात नहीं है.. ज्यादा मुठ मत मारना.. और अगली बार जब मुठ मारने का मन करे मुझसे कपड़े मांग लेना, मैं दे दूंगी, ऐसे चोरी मत कर! एक दिन पकड़ा जाएगा.. पर ज्यादा नहीं, हफ़्ते में 2 बार से ज्यादा नहीं मारना, ठीक है…?

मैं- हाँ CHACHI.. आप बहुत अच्छी हो…!

फिर मैं CHACHI से उनकी PANTY और BRA मांग के हिलाने लगा. मुझे ऐसा लगने लगा था की CHACHI मेरे इस आदत का मजा ले रही है. मुझे ऐसा भी लग रहा थी CHACHI शायद मुझे अपनी चुत भी मारने दे! मुझे लग रहा थी कैसे CHACHI से बात करूँ इस बारें में। दूसरे दिन जब मैं CHACHI से उनकी PANTY मांगने गया तो CHACHI की बातें बहुत मजेदार थी.

CHACHI- कल ही तो ली थी तुमने, आज फिर से चाहिए, कितना मनचला हो गया है मेरा भतीजा! आज कोई PANTY नहीं मिलेगी! वो छत पर ही है और मैं नहीं लाने वाली…

मैं- CHACHI मैं तो मर जाऊँगा अगर नहीं मुठ मारूँगा तो, CHACHI दो ना ऐसा मत बोलो..!

CHACHI- अरे तुझे क्या लग रहा है कि मैं झूठ बोल रही हूँ? तू खोज ले पूरे कमरे में, यदि मिल जाए तो ले ले…

मैंने सब जगह देखा, पर शायद CHACHI सच बोल रही थी, मुझे कहीं भी BRA या PANTY नहीं मिली। तब मुझे एक आईडिया आया!

मैं- CHACHI आप सच बोल रही थी, पर मुझे एक मिल गई…आप दोगी न उसे…?

CHACHI- मिल गई तो ले ले , पूछ क्यूँ रहा है?

मैं- CHACHI वो तो आपको देनी होगी, आपने जो अभी पहन रखी है मुझे तो वही PANTY चाहिए…!

CHACHI- पागल हो गए हो क्या, ये नहीं मिलेगी, गन्दा कर दोगे, मैं क्या पहनूंगी उसके बाद? नहीं मैं नहीं दे सकती! जा आज तू कुछ और उपाय कर..!

मैं- CHACHI, आप ऐसा मत करो, मैं आपकी मिन्नतें करता हूँ.. आप जो बोलोगी मैं करूँगा पर आज मुझे अपने PANTY दे दो.. आज मैं उसकी ताज़ी सुगंध से मस्त हो जाना चाहता हूँ…!

CHACHI- जो बोलूंगी वैसा करेगा तब दे सकती हूँ…!

मैं- CHACHI आप एक बार बोल के देखो तो , आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा!

CHACHI- आज तब तू मेरे सामने हिलाएगा… जो भी करेगा मेरी PANTY के साथ, वो मेरे सामने करना पड़ेगा…!

मैं- CHACHI पर आपके सामने तो मेरा खड़ा भी नहीं होगा डर से.. आपने देखा नहीं था? जिस दिन अपने मुझे मेरे कमरे में पकड़ा था, मेरा कैसे सिकुड़ के छोटा हो गया था…

मुझे ऐसा लगने लगा कि आज तो मैं सफल हो ही जाऊँगा, लगा CHACHI आज गरम है और वो आज मुझे चोदने दे सकती है।

इसलिए मैंने CHACHI से फिर से बोला…

मैं- CHACHI पर एक बात बोलूं! यदि आप मेरी मदद करो तो शायद मेरा LUND खड़ा हो जाएगा… CHACHI! बोलो आप मेरी मदद करोगी न…?
CHACHI- मैं कैसे मदद करुँगी?
मैं- CHACHI यदि आप मेरे लिए अपने सारे कपड़े निकाल दोगी तो मेरा LUND जरूर खड़ा हो जाएगा…!

CHACHI- बदमाश कनीं का! आज तू मुझे नंगा होने के लिए बोले रहा है..? तेरी इतनी हिम्मत…? तुझे मैं अपने कपड़े देने लगी तो तू कुछ भी बोलेगा? जाके के तेरी मम्मी को सब बोले दूंगी!

मुझे लगा CHACHI गुस्सा कर रही हैं, सो मैंने सोचा छोड़ दें, पर फिर लगा नहीं एक बार और कोशिश की जाए, शायद CHACHI ऐसे ही मजाक कर रही हो.. फिर यदि CHACHI फिर से गुस्सा करेगी तो मैं माफ़ी मांग लूँगा…

मैं- CHACHI आप गुस्सा मत करो, ठीक है आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा… पर CHACHI एक बात पूछूं?
CHACHI- हाँ पूछ!
मैं- CHACHI आप वादा करो इस बार गुस्सा नहीं करोगी?
CHACHI- हाँ रे! ठीक है, नहीं करूंगी गुस्सा..

मैं- CHACHI जब पहले दिन आपने ये पता लगा लिया था कि मैंने खिड़की के पीछे खड़ा हो के वहाँ पे मुठ मारा था..तो फिर दूसरे दिन आप कमरे में आ के पूरी नंगी क्यूँ हुई थी…? सच बोलो CHACHI! आप जानती थी ना कि मैं वहाँ हूँ! और आप मुझे दिखा के मुठ मार रही थी ना…?
CHACHI- तूने तो मुझे चुप करा दिया रे…! अब मैं क्या बोलूं, हाँ मुझे यकीन था कि तू वहाँ है, इसलिए मैंने वो सब कुछ किया था, और मैं जानबूझ के खिड़की की तरफ़ गई ताकि तुझे पकड़ सकूँ पर तू भाग गया था।
मैं- CHACHI जब आप उस दिन नंगी हो सकती थीं तो आज क्यूँ नहीं? CHACHI आज तो आपको अब नंगी होना ही होगा..!
CHACHI- ठीक है अब तो मना भी नहीं कर सकती..!

उसके बाद CHACHI ने अपनी साड़ी उतार दी… फिर ब्लाउज और साया भी साइड में फेंक दिया.. और PANTY को स्टाइल से खोल के मेरी तरफ़ फेंक दिया..
CHACHI- ले बदमाश ले सूंघ और हिला अपने LUND को..!
मैंने CHACHI की PANTY को नाक से लगाया… उसकी मादक सुगंध से मेरा LUND तन गया.. फिर CHACHI को देख के LUND तड़पने लगा..

मैंने सोचा आज मौका है आज CHACHI से बोलता हूँ कि मेरी LUND की मालिश करें..!
मैं- CHACHI अपनी BRA उतारो ना, आपकी चूची देखनी हैं..!
CHACHI- क्यूं रे! क्या करेगा मेरी चूची देख के?
मैं- CHACHI आपके शरीर में सबसे प्यारी चीज़ तो आपकी चूची है.. उसे देख के मेरा LUND और भी तन जाएगा।
CHACHI- तुझे मेरी चूची इतनी अच्छी लगती है,
मैं- हाँ CHACHI आपकी चूची तो सारी ब्लू फ़िल्म की नायिकाओं से भी अच्छी है।
CHACHI- ठीक है, लगता है तू चूची का शौकीन लगता है.. ले देख मेरी चूची.. और अच्छे से हिला ..!

मैं- CHACHI एक बात पूछूँ , आप चाचा के LUND को छूती हैं ना?
CHACHI- हाँ तेरे चाचा के LUND पर तो मेरा अधिकार है.. उसे मैं छूती ही हूँ!
मैं- CHACHI मेरे LUND पे भी तो आपका अधिकार होता है.. तो आप मेरे LUND को पकड़िये ना.. देखिये ना कैसे ये LUND आपके हाथों में आने के लिए तड़प रहा है।
CHACHI- नहीं रे..! तू पागल हो गया है क्या..? मैं नहीं छूती तेरा LUND.. चल हिला अपना LUND ख़ुद से…!

फिर मैं CHACHI के पास जा के LUND हाथ में ले के- CHACHI लो ना देखो कितना तड़प रहा है ये.. ले लो ना CHACHI.. आपके हाथ का सोच के ही ये हाल है… यदि आपने इसे हाथ में ले के थोड़ा प्यार से हिला देंगी तो सोचो कि ये कितना खुश होगा।

फिर CHACHI के हाथ पे ज़बरन मैंने अपना LUND रख दिया.. CHACHI ने अब मना नहीं किया.. CHACHI ने जैसे मेरे LUND को प्यार से सहलाया.. मुझे लगा कि झड़ जाऊँगा..

मैं- CHACHI मेरा रस निकलने वाला है..
CHACHI- इतनी जल्दी…
मैं- CHACHI क्या करूँ आपके छूने से मेरा रस उबलने लगा था.. अब नहीं रहा जा रहा है…

इतनी बात करते ही मैंने अपना रस निकाल दिया.. जो CHACHI के बूब्स पे गिरा… CHACHI और भी सुंदर लग रही थी..
मैं- सॉरी CHACHI.. सारा आपके चूचियों पर गिर गया… मैं साफ़ कर दूँ?
CHACHI- अब तू चूची को हाथ लगाने के बहाने निकाल रहा है.. जरूरत नहीं है.. जा भाग अब..!

मैं- CHACHI आपका मन नहीं है ना मुझे भगाने का! मुझे पता है आप मुझे सब कुछ करने को देंगी.. देंगी ना CHACHI?
आप मेरी सबसे अच्छी CHACHI हो..
CHACHI- चल हट यहाँ से.. क्या क्या करना है तुझे रे… ज़रा बता तो एक बार..!
मैं- CHACHI मैं आपको चूमना चाहता हूँ, आपकी दूध पीना चाहता हूँ, आपकी चुत का मजा लेना चाहता हूँ, आपकी चुत का रस पीना है मुझे! फिर मुझे आपको चोदना भी है…

CHACHI- तू तो एकदम हरामी हो गया है रे.. अपनी CHACHI को ही चोदेगा… तू तो मादरचोद निकल गया है… तुझसे तो बच के रहना पड़ेगा..

मैं- CHACHI आप गली भी देती हैं… आप भी कम हरामी थोड़े हैं, आपने अपने भतीजे का LUND पकड़ा है.. उसे अपनी कपड़े दिए हैं.. उसके सामने मुठ भी मारी है.. CHACHI मुझे मालूम हो गया कि आप बहुत बड़ी चुदक्कड़ हैं… CHACHI सच बोलिए आपको मेरा LUND चाहिए ना…?

CHACHI- तू तो बड़ा हरामी है रे… मैंने तेरी मदद की तो आज मुझे ही चुदासी बना दिया.. आज से तुझे कुछ नहीं मिलेगा! मैं- CHACHI आप ऐसा नहीं करो, मैं तो मर जाऊँगा.. मैंने तो सोचा कि ऐसा बोलने से आप मुझे चोदने दोगी तो मैंने बोल दिया.. मुझे माफ़ कर दीजिए।

CHACHI- ऐसा बोलने से कोई तुझे चोदने दे देगा.. मैं- तब CHACHI कब कोई मुझे चोदने देगा.. बोलिए न CHACHI मुझे आप कब चोदने दोगी?

CHACHI- तू नहीं मानेगा न.. ठीक है चल तू अपनी माँ के सामने यदि मुझसे बोलेगा कि CHACHI चोदने दो.. और तेरी माँ भी बोलेगी कि हाँ चुदा ले तो मैं तुझसे जरूर चुदवाऊँगी। मैं- CHACHI इतनी मुश्किल शर्त रख दी आपने.. ठीक है मैं आज डिनर के समय ही मम्मी से बात करूँगा..!

फिर उस दिन डिनर पर मैं CHACHI और मम्मी के साथ ही खाने को बैठा, मुझे काफी डर लग रहा था कि मम्मी से कैसे बात की जाए.. फिर अचानक लगा कि कुछ घुमा के मम्मी से बात कर लेते हैं..

मैं- CHACHI आप मेरे इच्छा पूरी नहीं करोगी ना, मैं कब से आपसे एक चीज मांग रहा हूँ.. आप क्यूँ नहीं देतीं?
मम्मी- क्या हुआ राज क्या चाहिए तुझे CHACHI से, जो वो नहीं दे रही है..
मैं- कुछ नहीं मम्मी! एक बहुत प्यारी चीज है CHACHI के पास मैं वही मांग रहा हूँ.. पर CHACHI देने को तैयार ही नहीं होती!
मम्मी- क्यूँ री अनीता! मेरे बेटे को वो चीज क्यूँ नहीं दे देतीं? देख बेचारा कितना परेशान है?
CHACHI- ठीक है दीदी! मैं आज ही दे दूँगी इसे..

मैं तो उछल पड़ा.. मैंने मम्मी से हाँ तो करवा लिया था.. फिर CHACHI ने मुझसे कहा कि कल लंच के बाद आ के ले लेना राज…!

उसके बाद मैं हवा में उड़ने लगा था, मैं बस किसी तरह चाहता था कि रात ख़त्म हो.. और लंच का टाइम आ जाए… उस दिन रात काफी लम्बी लग रही थी .. पर आखिर में मेरा इंतज़ार ख़त्म हो गया.. सुबह मैं काफी अच्छे से नहा के सेंट वेंट लगा के लंच करने गया.. जल्दी से लंच करके CHACHI के कमरे में जा कर इन्तज़ार करने लगा CHACHI का..! आज मैं CHACHI को चोदने वाला था.. यह सोच कर मेरा मन फ़ूला नहीं समां रहा था.. फिर CHACHI कमरे में आई..

मैं बेड पे लेट के टीवी देख रहा था..
CHACHI- तो राज आखिर तुमने अपना दिमाग लगा के माँ से हाँ करवा लिया न!
मैं- CHACHI मैं आपको चोदने के लिए कुछ भी कर सकता था!

CHACHI- आज तो CHACHI भी तुझसे चुदना चाहती है.. देख अच्छे से चोदना CHACHI को.. जल्दी बाज़ी में मत चोदना.. जैसे बोलूँ वैसे चोदना!
मैं- CHACHI आप जैसा बोलोगी, मैं वैसे ही चोदूँगा!
CHACHI- तू आ आज तू मेरी कपड़े उतार!

फिर मैं CHACHI के पास गया और CHACHI की साड़ी उतार दी.. फिर CHACHI की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.. फिर CHACHI ने ख़ुद ही ब्लाउज उतार दिया.. फिर मुझे लगा कि CHACHI को पूरा नंगा कर दूँ.. और मैंने CHACHI की BRA, साया, PANTY सब निकाल दिया.. फिर CHACHI बिस्तर पर लेट गई और मैं CHACHI को खड़ा देखने लगा.. CHACHI को ऐसे देख के तो किसी मुर्दे में भी जान आ जाती..

CHACHI- क्यूँ रे दूर से ही देखता रहेगा.. या पास भी आएगा.. आ मेरे पास आ ना..
मैं CHACHI के पास जा के बैठ गया..
CHACHI- तू कल बोल रहा था न मेरा दूध पिएगा.. ये ले आ जा मेरे दूध पी जा..

मैं भी CHACHI के चूचियों को प्यार से सहलाने लगा.. उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में नहीं आ पा रही थी.. इतनी बड़ी और इतनी मुलायम चूची… बस मन कर रहा था कि दबाता ही रहूँ। फिर मैं CHACHI की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.. और दूसरी को पूरी ताकत से दबा रहा था.. CHACHI बड़े प्यार दे मुझे अपना दूध पिला रही थी.. हालाँकि CHACHI की चूची में दूध अब आता नहीं था, पर CHACHI की चूची बहुत स्वादिष्ट थी..

मैं- CHACHI आपने तो बोला दूध पियो.. पर आपके चूची से तो दूध नहीं निकाल रहा है.. CHACHI अब दूध कैसे पियूँ? CHACHI- अरे मेरे लाल… चूची का दूध ख़त्म हो गया है.. पर आ तुझे अपना खास दूध पिलाती हूँ, मेरी चुत पे जा और चाट जा चुत का सारा दूध…

मैं- CHACHI आपकी बूर का रस मीठा है न? CHACHI- तू चख के देख ले.. चूची का दूध भूल जाएगा..

फिर मैं CHACHI की चुत के पास जाकर बैठ गया.. CHACHI की चुत में हल्की हल्की झांट थी.. जो पसीने से भीगी हुई थी.. मैंने पहले CHACHI की झांट को चाटा.. CHACHI की झांट इतनी नमकीन थी कि बस चाटने का ही मन कर रहा था.. CHACHI उधर अपनी गांड उठा उठा कर मुझे इशारे कर रही थी कि चुत चाट..

तो मैंने सोचा कि अब CHACHI को ज्यादा न परेशान करूँ..फिर CHACHI की चुत को प्यार से सहलाया.. CHACHI की चुत तड़प में गीली हो गई थी.. मैंने पहले CHACHI की चुत में अपनी एक उंगली डाली, वो CHACHI की चुत में काफी आराम से आ जा रही थी.. तब मैंने दो दो उंगलियाँ एक साथ घुसाना शुरू किया. तब CHACHI को मजा आने लगा.. CHACHI हल्की हल्की आवाज़ निकलने लगी..

CHACHI की आवाज़ सुन के मैं और तेज़ी से उनकी चुत फाड़ने लगा.. CHACHI की चुत एकदम गीली हो गई थी.. सो मैंने सोचा अब बुर रसपान कर लिया जाए.. और CHACHI की बुर में अपना मुँह रख दिया… बूंद बूंद चाट लिया… इतनी स्वादिष्ट रस मैंने आज तक नहीं पिया था.. CHACHI चुत उठा उठा के मुझे चुत का रस पिला रही थी.. मैं चुत का रस ऐसे चूस रहा था जैसे कोई निम्बू से रस चूसता है.. मुझे सब कुछ सपना लग रहा था.. मैंने CHACHI की बूर का इतना रसपान किया CHACHI ने ख़ुद से मना किया..

CHACHI- अरे बस भी कर कितना प्यासा है.. क्या मुझे मार ही डालेगा..
मैं- CHACHI आपका चुत-रस इतनी प्यारा है कि मैं हमेशा आपका रस चूसता रहूँ।
CHACHI- तूने तो मुझे धन्य कर दिया रे.. आजतक ऐसा रसपान ज़िन्दगी में किसी ने नहीं किया.. चल अब आ मैं तेरी सेवा कर दूँ..

मै- क्या करोगी CHACHI?
CHACHI- आ मैं तेरी LUND की प्यास बुझा दूँ.. तू भी चाहता है न कि मैं तेरा LUND अपने मुँह में लूँ?
मैं- CHACHI मैं तो रोज़ रात को सपने में अपना LUND आपके मुँह में देता हूँ.. मुझे तो वि्श्वास नहीं हो रहा है कि.. आप इसे मुँह में लोगी।

फिर CHACHI ने मेरी LUND को अपने हाथ में लिया.. मेरा LUND गरम होकर इतना कड़ा हो गया था कि CHACHI ने उसे छूते ही अपने मुँह में ले लिया.. आज मेरे LUND को अपनी मंजिल मिल गई थी। CHACHI मेरे LUND को आइसक्रीम की तरह चाट रही थी.. CHACHI के चाटने के अंदाज़ से लग रहा था कि CHACHI तो LUND की शौकीन हैं।

CHACHI LUND मुँह से निकाल के उसे अपनी चूची से सटाने लगी… LUND से CHACHI की चूची को छू के इतना प्यारा लगा कि मैं बयान नहीं कर सकता.. मेरा LUND बस अब CHACHI की चुत का प्यासा था.. फिर CHACHI ख़ुद ही लेट के LUND को अपनी चुत से सटाने लगी.. तब मुझे लगा कि अब समय आ गया है.. CHACHI भी चुदना चाहती है…

मैं- CHACHI अब मैं आपको चोद लूँ? CHACHI- हाँ राज आ अब अपनी CHACHI की चुत को चोद डाल..! पूरी जान लगा के चोदना..! बहुत दिन से प्यासी है तेरी CHACHI की ये चुत.. आज इसकी प्यास बुझा दे मेरे लाल…!

मैं CHACHI को नीचे लिटा के उनके ऊपर आ गया.. CHACHI की चुत पे अपनी LUND को रखा और उसे चुत पे रगड़ने लगा। CHACHI से रहा नहीं जा रहा था.. CHACHI ने चुत उठा के गली दी की मादरचोद अब चोद भी.. कितना इन्तज़ार कराएगा.. फिर मैंने CHACHI की चुत में अपना LUND घुसाना सुरु किया.. एक ही बार में मेरा LUND आधा CHACHI की चुत में चला गया… फिर मैंने दूसरी बार जब ज़ोर लगाया तब मेरा पूरा LUND CHACHI की चुत में.. मुझे ऐसा लग रहा की CHACHI की चुत स्वर्ग हो.. मेरा LUND तो फुला नहीं समां रहा था..

मैंने CHACHI की चुत में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरु किया.. CHACHI काफी ज्यादा आवाज़ कर रही थी.. चोद डाल.. चोद मेरे ला..चोद दे अपनी CHACHI को.. CHACHI जैसे जैसे बोले रही थी.. मैं और भी ज़ोर ज़ोर से CHACHI को चोद रहा था..

फिर मैंने CHACHI घुमने की लिए बोला.. और CHACHI के पीछे से उनकी चुचियों को दबाते हुए.. LUND को फिर से CHACHI की चुत में डाल दी.. CHACHI मजा ले ले के चुदवा रही थी.. फिर मैंने CHACHI को कुतिया बन्ने को कहा.. और CHACHI के पीछे जाकर.. CHACHI की चुत की खूब पूजा की.. आज मेरा LUND काफी साथ दे रहा था.. CHACHI एक बार पुरी तरह से स्खलित हो चुकी थीं.. उसके बाद मेरा LUND फच फच की आवाज़ के साथ CHACHI की चुत फाड़ने लगा.. अब मेरा LUND भी अपनी पानी उगलने वाला था..

मैं- CHACHI मेरा LUND पानी निकलने को तैयार है.. CHACHI- निकाल दे बेटे CHACHI की चुत में ही निकाल दे.. चुत को काफी दिनों से नहीं मिली है LUND का रस..

मैंने पूरा का पूरा पानी CHACHI की चुत में डाल दिया.. CHACHI ने ज़ोर से मुझे गले लगा लिया और मुझे प्यार से चूमने लगी..
CHACHI- कैसा लगा बेटा CHACHI को चोद के.. मजा आया न तुझे..?
मैं- CHACHI मेरे ज़िन्दगी बन गई आज… आज से आप जैसा बोलोगी.. मैं वैसा ही करूंगा… आप मेरी CHACHI हो.. मेरी दुनिया हो… मेरी लव हो..! CHACHI, मैं आपको रोज़ चोदूंगा.. चुदवाओगी न CHACHI.. बोलो न…!
CHACHI- हाँ मेरे लाल मैं तेरे से रोज़ चुदवाऊँगी.. चल अब जा अपने कमरे में! नहीं तो कोई पकड़ लेगा…
फिर अनीता CHACHI को मैं रोज़ चोदने लगा!

दोस्तो, मेरी पहली कहानी में मैंने अपनी अपनी CHACHI अनीता के साथ हुए हसीं लम्हों को सुनाया था! इस कहानी मैं में आगे की बातें करने जा रहा हूँ।

अनीता CHACHI के साथ चुदाई समारोह अब रोज चलता था। मैं और CHACHI हमेशा साथ में खाना खाते थे। हम सबके सामने काफी गप्पें मारते थे। शायद मेरी छोटी CHACHI हेमा को कुछ शक हो गया था…

एक दिन डिनर के बाद मेरी दोनों चाचियाँ गप्पे हाँक रही थीं…

मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

हेमा: DIDI, मैं कुछ पूछूँ आपसे? अनीता: हाँ हेमा। पूछ ना!

हेमा: आजकल राज हमेशा आपके साथ ही रहता है, आपके कमरे में ही पढ़ता है और आप दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

अनीता: अरे नहीं हेमा! वो राज को गणित में प्रोब्लम है और मुझे गणित आता है तो मैं उसे पढ़ा देती हूँ इसलिए वो मेरे कमरे में ही पढ़ता है और हम दोनों खुश रहते हैं तो इसमे बुरा क्या है?

हेमा: DIDI तब आप लोग लंच के बाद रोज दरवाजा क्यूँ बंद के पढ़ते हो?

अनीता: अरे हेमा वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!

हेमा: DIDI आप तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

अनीता: तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?

हेमा: मैंने एक दिन दरवाज़े पे कान लगा के आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!

अनीता:(मुस्कुराते हुए) अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो सोनम DIDI को बोलना मत! पर क्या करूँ, राज ने पता नहीं कैसे मुझे पटा लिया यह सब करने के लिए! फिर मुझे अच्छा लगने लगा तो मैंने भी शर्म छोड़ दी। अब रात में पति जी से और दिन में राज से चुदवाती हूँ। बूर को अजब सी शान्ति मिलती है, राज का जवान LUND मेरी सारी प्यास बुझा देता है। तेरा रमेश तुझे अच्छे से चोदता है ना?

हेमा: अरे कहाँ DIDI! आजकल वो काफी थके हुए आते हैं, कुछ भी नहीं करते, मैं तो भूल ही गई कि पिछली बार मैंने कब चुदवाया था! इसलिए तो!

अनीता: अच्छा तो यह बात है! तो तू चाहती है कि राज तुझे भी चोदे?

हेमा: चाहने से क्या होगा DIDI! आप इतनी सेक्सी हो, आपको छोड़ के मुझे क्यूँ CHODEGA वो?

अनीता: (हँसते हुए) अरे तू तो काफी प्यासी लगती है… अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?

हेमा: हाँ DIDI, दूध तो निकलता है और अब सोनू भी नहीं पीता… सो भरा हुआ है…

अनीता: तब तो राज तुझे जरूर CHODEGA… उसे दूध पीने की बहुत इच्छा है… राज, वो मुझसे बोलता है! रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!

हेमा: DIDI पर कोई परेशानी तो नहीं हो जाएगी ना?

अनीता: अरे नहीं, कुछ नहीं होगा… जा अब तू! रमेश आएगा… उससे अच्छे से प्यार कर… उसे शक नहीं होने देना कि तेरा कहीं और का मन भी है…

फिर वो दोनों अपने-अपने कमरे में चली गई।

आज तो जैसे मैंने दुनिया की सबसे हसीं MOVIE देखी थी… दोनों चाचियाँ मेरे बारे में जो बात कर रही थी… उससे मेरा LUND तो सलामी देने को तैयार था…

दूसरे दिन जब मैंने हेमा CHACHI को देखा तो CHACHI मुझे दुनिया की सबसे हसीन औरत लगी… मैंने उन्हें देख के हल्की सी मुस्कान दी… CHACHI भी बड़े अंदाज़ से हँसी…

लंच के बाद जब मैं अनीता CHACHI के पास गया तो… आज CHACHI बेड पे लेटी हुई थी… जैसे बीमार हो…

मैं: CHACHI आपकी तबियत ठीक नहीं है क्या?

CHACHI: नहीं रे… पता नहीं आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा… आज तुझे चोदने नहीं मिलेगा…

मैं: कोई बात नहीं CHACHI… आप अच्छी हो जाओ पहले…

अनीता: तुझे पता है… हेमा CHACHI क्या समझती है… कि मेरे से गणित पढ़ने आता है मेरे कमरे में… तो आज वो बोल रही थी कि DIDI आपकी तबियत ठीक नहीं है… यदि उसे कोई प्रॉब्लम है तो भेज देना मेरा पास… मैं बता दूंगी… अब तू चला जा हेमा के पास, नहीं तो उसे शक हो जाएगा…

CHACHI को क्या पता था कि मुझे सब पता है… उनके बीच क्या चल रहा है…

मैं: CHACHI पर वहाँ जाकर मैं क्या करूँगा…

CHACHI: अरे कुछ पूछ लेना गणित में… और एक बात बोलूं! तू जो रोज बोलता है CHACHI दूध नहीं है आपकी BOOBS में… हेमा की BOOBS भरी हुई है दूध से… जा देख शायद तुझे पीने को मिल जाए…

मैं: CHACHI आप तो मजाक कर रही हो… हेमा CHACHI ऐसे थोड़े दे देगी अपना BOOBS निकाल के… ठीक है, आप बोलती हो तो मैं जाता हूँ… कुछ गणित से सम्बन्धित सवाल पूछ लूँगा…

मन में तो मैंने सोच लिया था कि आज ही हेमा CHACHI की चूत का रस और BOOBS का दूध सब पी जाना है। मैं वहाँ से सीधा हेमा CHACHI के कमरे में गया…

CHACHI ने जैसे ही दरवाजा खोला, मैं तो देखता ही रह गया… CHACHI कुछ माल लग रही थी… उन्होंने कोई नया सूट पहन रखा था…

मैं: CHACHI क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ… आपसे कुछ गणित के सवाल पूछने हैं… वो अनीता CHACHI बीमार है ना…

CHACHI: हाँ राज, मुझे DIDI ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रही थी, आ ना…

मैं: CHACHI आप इस ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही हो…

CHACHI: तुझे अच्छा लगा ये ड्रेस? आज पहली बार पहनी है…

मैं: हाँ CHACHI, आप ऐसे ही ड्रेस पहना करो… आप पर बहुत अच्छी लगती हैं…

CHACHI: चल आ बैठ…! और बोल! क्या चल रहा है तेरी जिन्दगी में? तू तो बस अनीता DIDI से ही बातें करता है… मैं तेरी अच्छी CHACHI थोड़े ही हूँ!

मैं: नहीं CHACHI ऐसी कोई बात नहीं है… आप भी बहुत अच्छी हो…

बात करते करते CHACHI ने अपना दुपट्टा सरका दिया… CHACHI के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… CHACHI की चूचियों को देखने लगा… CHACHI: मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?

मैं: CHACHI कुछ नहीं, सच्ची में आप भी बहुत अच्छी हो…

CHACHI: तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?

मैं: कुछ नहीं CHACHI…

CHACHI: कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!

मैं: CHACHI आपके वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…

CHACHI: अपनी CHACHI की BOOBS को ऐसे थोड़े देखते हैं… ये तेरे छोटी बहिन को दूध पिलाने के लिए है…

मैं: CHACHI, सोनू तो अब बड़ी हो गई है! आप उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

CHACHI: नहीं! अब सोनू नहीं पीती दूध!

मैं: CHACHI, आपकी BOOBS में दूध है क्या?

CHACHI: हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!

मैं: CHACHI मुझे प्यास लगी है…

CHACHI: जा वहाँ पानी रखा है, पी ले…

मैं: CHACHI, पानी नहीं दूध पीना है… आपकी BOOBS का दूध…

CHACHI: बदमाश! कोई अपनी CHACHI का दूध पीता है भला?

मैं: CHACHI यदि माँ का पी सकते हैं तो CHACHI का क्यूँ नहीं?

CHACHI: अरे माँ का बचपन में पी रहा था… CHACHI का अब?

मैं: CHACHI, पीने दो न… आपके दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…

CHACHI: अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…

फिर CHACHI ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब CHACHI BRA में आ गई…

CHACHI: आ जा राज! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…

मैंने CHACHI की गोद में सिर रख लिया… CHACHI ने अपनी BRA उतारी… और अपनी BOOBS को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो राज पी लो… अच्छे से पीना…

उसके बाद में दूध का प्यासा CHACHI की दूध को मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाएं BOOBS से तो कभी दायें से…

साथ में BOOBS सहला भी रहा था।

CHACHI: तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!

मैं: CHACHI आज अपने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा आपका आभारी रहूँगा… आप जो बोलोगी वो सब करूँगा… CHACHI: जो बोलूंगी वो करेगा?

मैं: हाँ CHACHI आप एक बार बोल के तो देखो…

CHACHI: अच्छा ठीक है… सुन मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं: नीचे कहाँ CHACHI?

CHACHI: तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं: बोलो ना CHACHI! आपके मुँह से सुनना चाहता हूँ।

CHACHI: अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…

मैं: CHACHI कैसे मिटा दूं? ऊँगली से या चाट के? या फिर LUND ही डाल दूं?

CHACHI: मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…

मैं: क्यूँ CHACHI, चाचा आजकल खुजली नहीं मिटा रहे हैं क्या?

CHACHI: नहीं रे! वो आजकल काफी रूखे से रहते हैं, मेरी चूत का तो ख्याल नहीं है उनको…

मैं: CHACHI, आपका BETA आपकी चूत का ख्याल रखेगा…

CHACHI: अपनी अनीता CHACHI से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… DIDI तो तेरे LUND की बहुत तारीफ करती हैं…

मैं: आप लोग ये सब बातें भी करती हो? मेरी चाचियाँ कितनी अच्छी हैं!

CHACHI: तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं: CHACHI अभी आपने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

CHACHI: अच्छा तो ये बात है, तो जितना जलवा देख चुके हो उसमे कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं: CHACHI इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… अनीता CHACHI की BOOBS में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो आप ही पिला सकती हो… तब इसमें आप ही न हुई रानी… CHACHI अब आप आपने कुछ और जलवे भी दिखाओ ना!

CHACHI: हाँ बेटे तेरी CHACHI आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…

और फिर CHACHI ने आपने कपड़े खोलने शुरु किये… CHACHI जब पैंटी और BRA में आ गई तो मैं उनकी मदद करने लगा…

मैं: CHACHI, लाओ अब मैं खोल दूं! आप क्यूँ कर रही हो?

CHACHI: हाँ BETA! आओ अपनी CHACHI को NANGI कर दो…

फिर CHACHI मेरे पास आ गई… मैं CHACHI की BRA को खोल के प्यार से सूंघने लगा… CHACHI की मादक मुस्कराहट ने और भी मज़ा भर दिया… फिर CHACHI की पैंटी को एक ही झटके में खोल दिया…पैंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

CHACHI: क्यूँ रे काफी मज़े ले रहे हो… कैसी लगी तुम्हे मेरी पैंटी की खुशबू…

मैं: CHACHI मैं तो अपने होश मैं ही नहीं हूँ…

CHACHI: अरे कपड़े से तेरा ये हाल है तो फिर जब सही में मेरी चूत सूंघेगा तो तेरा क्या होगा…

फिर CHACHI अपने हाथ मेरी पैंट के उपर से LUND को सहलाने लगी… मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ.

CHACHI ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया…अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… CHACHI मेरे LUND से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…

CHACHI: BETA तेरा LUND तो तेरे चाचा जी से काफी बड़ा है रे… तेरी पत्नी काफी खुश रहेगी…

मैं: CHACHI मेरे LUND से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा…

CHACHI: क्या करूँ BETA ऐसे LUND मेरे हाथ में पहली बार आया है…

मैं: CHACHI आपको पता है बड़ी CHACHI तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती हैं…

CHACHI: वाह रे बदमाश! अपनी CHACHI को LUND मुँह में लेने बोल रहा है…ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…

मैं: CHACHI तो ले लो ना इसे…

फिर CHACHI प्यार से मेरे LUND को चूसने लगी… इतना तो पता चल ही गया था कि CHACHI को LUND चूसने में बहुत मज़ा आता है… अनीता CHACHI ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था…

जब CHACHI मेरे LUND से खेल रही थी… मैं CHACHI की BOOBS को मज़े देने लगा… इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, निचे LUND का CHACHI से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…

मैं: CHACHI LUND चूसवाने में इतना मज़ा आज तक नहीं आया… CHACHI मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, CHACHI उल्टा-पुल्टा करें…

CHACHI: उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं: क्या CHACHI आप मुझसे पूछोगी तो कैसे चलेगा…अच्छा चलिए मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब आप मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से आपकी चूत का रसपान करूँगा!

CHACHI: अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मज़ा आएगा…

फिर हम 69 में एक दूसरे से मज़े लेने लगे… CHACHI की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… CHACHI की चूत काफी गीली हो गई थी… इसलिए चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था… मैं CHACHI को बहुत मन से चाट रहा था…

CHACHI भी काफी उत्तेजित हो गई थी… CHACHI ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मज़ा हेमा CHACHI ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…

मैं: CHACHI आपके रस कितने स्वादिस्ट हैं… CHACHI अब मेरा रस भी निकाल दो… CHACHI अब मेरी LUND आपकी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…

CHACHI: आ न BETA, तूने तो आज अपनी CHACHI की एक दम रंडी बना दिया… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…

फिर CHACHI बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि LUND के लिए बनी हो… मैंने भी अपना LUND हाथ में लेकर CHACHI की चूत पर लगा दिया…

CHACHI: दे धक्का मेरे लाल… चोद अपनी CHACHI को… चोद BETA…

मैं: ले CHACHI… ये गया मेरा LUND आपकी चूत में… चुद अपने बेटे से मेरी प्यारी CHACHI…

फिर CHACHI गाण्ड उठा उठा कर मेरा LUND लेने लगी… मैं भी CHACHI को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर CHACHI ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मज़ा आया… फिर CHACHI मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा LUND सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था…

करीब 30 मिनट के बाद मैं CHACHI की चूत में ही झड़ गया… CHACHI ने बड़े प्यार से फिर मेरे LUND को साफ़ किया… मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… CHACHI बहुत खुश थी… मैं भी CHACHI की खुशी से खुश था…

CHACHI: BETA, CHACHI को चोदने में कैसा लगा… अनीता CHACHI को चोदने में ज्यादा मज़ा आया था क्या?

मैं: नहीं CHACHI आप कुछ माल हो… आपको चोदने में बहुत मज़ा आया… मैं अब आप हो ही चोदूंगा…

CHACHI: अरे नहीं BETA! दोनों चाचियों को चोदना… अनीता DIDI भी बहुत अच्छी है उन्होंने ही तो मुझे तेरा LUND दिलाया…तू उन्हें कभी नाराज़ न करना…

फिर मैं दोनों चाचियों के साथ मस्ती कर करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती है.

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