DIDI SE SEX DESI KAHANI

मैं राज ..ये कहानी शुरू होती है जब मैं सिर्फ़ 18 साल का था …. और मेरी कज़िन (मेरे मामा की BETI) 28 साल की ….

दो बच्चो की MAA ,,भरपूर चूचियाँ..उछलते नितंब …भरे होंठ ….चिकने सपाट और मांसल गोरे पेट की स्वामिनी ..जब वो चलती ..मेरे पॅंट के अंदर खलबली मच जाती …. कहानी चूत और उसके नशीले और लिसलीसे पानी का है ….और चूत से पानी यूँ ही नहीं निकलता ..चूत को सहला के , चाट के , जीभ फिरा के , उंगलियों से मसल के उसे इस अवस्था में लाना पड़ता है.. और अगर थोड़े शब्दों में कहें तो पृष्ठभूमि तैय्यार करनी पड़ती है …

मेरी कज़िन NINA की चूत से भी पानी निकले और लगातार निकले इसकी भी पृष्ठभूमि तैय्यर करनी पड़ेगी ना ..तो चलिए चलते हैं कुछ साल पहले और देखते हैं हमारी तैय्यारि …

मैं एक बहुत ही सुशील , सीधा सादा अपने MAA BAAP का लाड़ला एकलौती संतान था . बड़े लाड़ प्यार और स्नेह से मुझे रखा जाता ..किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं होती ….और NINA मेरे मामा की इकलौति संतान …..बड़ी नटखट , शरारती और सारे घर को अपने सर पर उठाने वाली ….

मेरे मामा भी हमारे साथ ही रहते थे … उनकी नौकरी भी हमारे ही शहेर में थी..और हमारा घर काफ़ी बड़ा था … MAA ने ज़िद कर मामा को भी अपने साथ रहने को मजबूर कर दिया …

NINA DIDI भले ही शरारती और नटखट हो ..पर मेरे साथ बड़े स्नेह और प्यार से रहती …हमारी उम्र में भी काफ़ी अंतर था …वो मुझे किशू बुलाती …

मुझे अपने हाथों से खिलाती …मेरे स्कूल का बस्ता तैय्यार करती … मुझे मेरी पढ़ाई में मदद करती …

हम दोनों का एक दूसरे के बिना रहना मुश्किल हो जाता …मैं जब स्कूल से आता ..मेरी आँखें NINA DIDI को ढूँढती …घर के चारों ओर मैं उन्हें ढूंढता ….जब वो सामने दिखतीं …मेरे सांस में सांस आता …

मैं सीधा उनकी गोद में बैठ जाता ..वो प्यार से मेरे बाल सहलाती ..मेरे दिन भर की थकान उनके स्पर्श से ही गायब हो जाती … मैं खिल उठता ….

उन दिनों NINA DIDI 20-22 साल की एक आल्मोस्ट , दुनिया से बेख़बर, जवानी के नशे में झूमती लहराती रहती…. और मेरे मामा उनकी शादी की चिंता मे डूबे रहते …..

हाइ स्कूल की पढ़ाई के बाद वो घर में ही रहती … घर के कम काज़ में हाथ बटाना तो दूर …अपने में ही खोई रहती …कहानियाँ पढ़ती , फिल्मी मॅगज़ीन्स पढ़ती ( जिन्हें मैं अपनी किताबों के बस्ते में छुपा कर लाता ..और उसी तरह DIDI के पढ़ने के बाद दूकानवाले को वापस कर देता ) …

मामा ..मामी की डाँट का उन पर कोई असर नहीं होता…

” अरे कुछ तो शर्म कर …कल को तेरी शादी होगी …ससुराल में हमारी नाक काटेगी ये लड़की ..”

मामी के इस तकिया कलाम शब्दों को NINA DIDI अनसूना कर देती …

मुझे अपने हाथों से अपने बगल चिपकाते हुए बोलती
“किशू…तेरी पढ़ाई हो गयी….? ”
“हां DIDI..”
“तो फिर चल लुडो खेलते हैं ..”

मेरे लिए उनके ये शब्द जादू का काम करते..मैं फटाफट अपने कमरे में अपने बिस्तर पे लुडो का बोर्ड बिछा देता …

हम दोनों आमने सामने बैठ जाते ..इतने पास कि DIDI की गर्म साँसें मेरे चेहरे को छूती ….इसमें स्नेह की गर्मी , निश्छल प्यार का स्पर्श और उनकी मदमस्त जवानी का झोंका भी शामिल रहता ..जो मुझे बहुत भाता …

उन दिनों टीवी नहीं था ..रेडियो का प्रचलन था ….मेरे अलावा NINA DIDI का ये दूसरा चहेता था ..उस समय की फिल्मों का एक-एक गाना उनकी ज़ुबान पे होता ….हमेशा गुनगुनाती रहती अपनी सुरीली और मीठी आवाज़ में …

दिन गुज़रते गये और मैं NINA DIDI के स्नेह और प्यार के बंधन में जकड़ता गया…हम दोनों के लिए एक दूसरे के लिए एक अटूट आकर्षण , बंधन , प्यार और स्नेह पनपता गया …..

और फिर एक दिन जब मैं स्कूल से वापस आया ,,DIDI ने मेरे लिए दरवाज़ा नहीं खोला … दरवाज़ा भिड़ा था ..

मेरे धक्का देते ही खूल गया..पर DIDI के बजाय अंदर सन्नाटे ने मेरा स्वागत किया.. DIDI की प्यार भरी बाहों की जगह एक घनघोर चुप्पी ने मुझे जाकड़ लिया ….

मैं तड़प उठा ..DIDI कहाँ गयीं..??

मैं उनके कमरे की तरफ बढ़ा …. अंदर झाँका ..DIDI अपने पलंग पर लेटी थीं …..मैं और नज़दीक गया ..

मैं बेतहाशा उनकी ओर बढ़ा …. NINA DIDI पेट के बल लेटी थी , सर तकिये पर रखे सूबक सूबक कर रो रहीं थी …

उनका चेहरा मेरी ओर था ..उनके गुलाबी गाल आँसुओं से सराबोर थे …तकिया गीला था … आख़िर क्या बात हो गयी ..??

क्या हुआ आज दिन भर में ..??? जिस चेहरे पर हमेशा खिलखिलाहट और मुस्कान छाई रहती ..आज आँसुओं से सराबोर है ..आख़िर क्यों..??? किसी ने कुछ कहा …?? मेरे मन में हलचल मची थी …

मैं उनके बगल बैठ गया और पूछा ” DIDI क्या हुआ ..आप रो क्यूँ रही हैं ..?? ”
मेरी आवाज़ भी रुआंसी थी…

DIDI ने मेरी तरफ चेहरा किया और उठ कर बैठ गयीं , मुझे अपनी छाती से लगाया ..मुझे भींच लिया और फिर और सूबक सूबक कर रोने लगीं …

मैं हैरान परेशान था , पर उनकी छाती की गर्मी और स्तनों की नर्मी से बड़ा अच्छा भी लगा …मैं एक बहुत ही अलग अनुभूति में डूबा था …उनके साथ चिपके रहने का आनंद , पर उनके रोने से परेशान …

दो बिल्कुल अलग अनुभव थे …मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ ..DIDI को चूप कराऊँ या फिर उनकी छाती से चिपके इस जन्नत में खोया रहूं …

NINA DIDI के शरीर की सुगंध ..उनके आँसू और पसीने की मिली जुली नमकीन खूशबू , मेरा मुँह उनकी छाती से इस तरह चिपका था के मेरी नाक उनकी बगल की तरफ था ..

उफ़फ्फ़ वहाँ से भी एक अजीब मादक सी खूशबू आ रही थी ….वही पसीने की …मैं एक अजीब ही स्थिति में था ..क्या करूँ क्या ना करूँ …

NINA DIDI आप रोते हुए भी मुझे इतना सूख दे सकती हैं….DIDI DIDI ……..मेरा रोम रोम उनके लिए तड़प रहा था ..उन्हें कैसे शांत करूँ ..मैं क्या करूँ ……

मेरी इस उधेड़बून का हल,भी आख़िर DIDI ने ही निकाला … उन्होने मुझे अपनी छाती से अलग किया ..मेरे चेहरे को अपने नर्म हथेलियों से थाम लिया और मुझे बेतहाशा चूम ने लगीं …

मेरे गालों पर अपने मुलायम होंठों से चुंबनों की वर्षा कर दी …. ये भी मेरे लिए एक नया ही अनुभव था ….. NINA DIDI मुझे चूमे जा रहीं थी पर उनका रोना अब हिचक़ियों में तब्दील हो गया था … और बीच बीच में मुझ से पूछती

” किशू ..किशू …..मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी ..?? ”

मैं फिर परेशानी में आ गया ..आख़िर इन्हें मेरे बिना रहने की क्या ज़रूरत आ पड़ी ..?? मेरे छोटे से मस्तिष्क में हज़ारों सवाल थे ..जिनका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था ..और मैं उलझनों में डूबता जाता ..पर DIDI के प्यार और निकटता से शकून भी मिल रहा था ….

और तभी मुझे अपने सारे सवालों का जवाब मिल गया ….

मेरी मामी ने कमरे में कदम रखा और भाई बहेन का प्यार , खास कर DIDI का रोना देख वो बोल उठीं ..

“वाह रे वा NINA रानी..अभी तेरी सिर्फ़ शादी की बात पक्की हुई है और इतना रोना धोना ??..

अरे जब तेरी विदाई होगी तू क्या करेगी ….बस बस बहुत हो गया ..अब चूप भी कर ..देख बेचारा किशू स्कूल से कब का आ चूका है …उठ और उसे कुछ खिला ,,बेचारा कब का भूखा है..तुम्हारे रोने से इतना परेशान है…..”

ह्म्*म्म्ममम तो ये बात थी NINA DIDI के रोने के पीछे..उनकी शादी …. पर इस बात ने मुझे और उलझन में डाल दिया … जितना मुझे मालूम था …जितना मेरी छोटी सी मासूम जिंदगी ने मुझे बताया था …शादी की बात से सारी लड़कियाँ खुशी से झूम उठती हैं …. पर यहाँ तो बिल्कुल ही अलग माजरा था ….खुशी से झूमना तो अलग DIDI दुख और दर्द का रोना ले बैठी थीं….

मामी की बातों ने जादू का असर किया .. मेरे भूखे रहने की बात से उनका रोना धोना एक झटके में ही रुक गया …उन्होने मुझे बड़े प्यार से अलग किया ..अपनी आँचल से अपना चेहरा और आँखें पोछी ….और मुझे कहा

” अले ..अले ..मेला बच्चा अभी तक भूखा है …उफ़फ्फ़ मैं भी कितनी पागल हूँ ..किशू यहीं बैठ ..मैं 5 मिनिट में तुम्हारा नाश्ता लाती हूँ ….”

इतना कहते हुए वो रसोई की तरफ भागती हुई चली गयीं ..कमरे में मामी और मैं रह गये ….

मैने मामी से पूछा “मामी ..DIDI शादी की बात से क्यूँ रो रही थी..??? शादी की बात से तो सब खुश होते हैं ना..??”

मामी ने झल्लाते हुए कहा ” किशू बेटा ..अब मैं क्या जानूं इस पागल के दिमाग़ में क्या है …… तू ही पूछ ले उस से …तुम दोनों भाई बहन की बात तुम ही जानो ……”

और बड़बड़ाती हुई वो भी कमरे से बाहर चली गयीं .

“ठीक है ” मैने सोचा ” आने दो उनको उन से ही पूछता हूँ..”

और मैं दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए NINA DIDI का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था …….

अब तक DIDI के रोने धोने के मारे मैं अपनी भूख-प्यास भूल चूका था …. वरना स्कूल से घर आते ही मुझे जोरों की भूख लगती थी , जो स्वाभाविक है…

और DIDI भी हमेशा तैय्यार रहती थी मेरे पेट की भूख शांत करने को .
मैं हाथ मुँह धो कर आता ..DIDI थाली भर नाश्ता ले आतीं और मैं उनकी गोद में उनके हाथों से नाश्ता करता ..

खूब बातें करता …. अपने स्कूल की , उनकी पढ़ी किसी नयी कहानी की ….या फिर फिल्म-मॅगज़ीन से किसी ऐक्टर ऐक्ट्रेस की गॉसिप …मीना कुमारी और मधुबाला उनकी फॅवुरेट थीं ..उन दोनों की एक एक बात उन्हें मालूम रहती … बड़े मज़े ले ले कर NINA DIDI मुझे उनके नये फिल्मों के बारे बताती …

उस दिन पहली बार इस रुटीन में रुकावट आई ….

पर अब जब मामला शांत था ..मेरी भूख फिर से जाग उठी …. मैने दरवाजे की तरफ देखा ..DIDI एक हाथ से थाली और दूसरे हाथ से पानी का ग्लास थामे चली आ रही थीं …

मैने उन की ओर देखा ..पता नहीं क्यों मुझे उस दिन वो कुछ बदली बदली सी नज़र आईं… उनकी चाल में वो पहले वाली अल्हाड़पन, शोखी , मस्ती नहीं थी ..बड़े नपे तुले कदम थे … और चेहरा भी काफ़ी सीरीयस था …

मुझे समझ नहीं आ रहा था एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया ..?? शादी की बात से ऐसा क्या हो गया DIDI को..??

क्या शादी इतनी बूरी चीज़ होती है …पर बाकी सभी लड़कियाँ तो कितनी खुश होती हैं …..
मैं इन सब बातों में खोया था ….

तब तक वो मेरे बगल में बैठ गयीं ,,थाली और ग्लास फर्श पे रख दिया और अपने हाथों से एक कौर मेरी ओर बढ़ाया ..मैने मुँह नहीं खोला …

आश्चर्य से DIDI ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों को और बड़ी करती हुई मेरी ओर देखा …

” क्या बात है किशू ..? आज खाएगा नहीं क्या ..अभी तक तो तुझे जोरों की भूख लगी थी … मुझ से नाराज़ है ..??? ” उन्होने मेरे चेहरे को उपर उठाते हुए कहा …

” नहीं DIDI ..मैं भला आप से क्यूँ नाराज़ होऊँगा ..? पर आप कुछ भूल रहीं हैं ..क्या आज तक मैने आप से अलग बैठ कर खाया है..????”

ये सुनते ही उनकी आँखों से फिर से आँसुओं की बड़ी बड़ी बूंदे टपकने लगी …..

उन्होने झट अपनी जांघों पर मुझे खींच कर बिठा लिया …..

बड़ी मुश्किल से फिर अपने आप को रोने से रोकते हुए उन्होने कहा ” देख ना किशू आज मुझे ये क्या हो गया है ,,इतनी सी बात भी मैं भूल रही हूँ ..”

इतनी देर तक एक तनाव भरे वातावरण के बाद DIDI की गोद में आते ही मुझे बड़ा शूकून मिला … सारा तनाव एक पल में मिट गया ..

“हां DIDI ..शायद आप शादी की बात से काफ़ी परेशान हैं …. एक बात पूछूँ ..??”

” हां ..हां पूछ ना किशू … ”

” DIDI ….शादी की बात से तो मैने किसी को भी इतना दुखी होते नहीं देखा ..जितना आप दिख रही हो…..आख़िर क्या बात है ..प्लज़्ज़्ज़ बताओ ना ..?? क्या आप खुश नहीं ..???”

उन्होने अपने आँचल से फिर से अपने चेहरे और आँखों को पोन्छा ….और अपने चेहरे पे मुस्कान लाने की कोशिश करते हुए एक बड़ा नीवाला अपने लंबी लंबी सुडौल उंगलियों के बीच थामते हुए मेरी ओर बढ़ाया और कहा

” ले ..पहले खाना शुरू कर फिर बताती हूँ ”

मैने भी मुँह खोलते हुए पुर का पूरा कौर अंदर ले लिया ..DIDI ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा

” अरे नहीं किशू ..ऐसी बात नहीं …. पर शादी की खुशी से ज़्यादा मुझे तुम से बिछड़ने का गम है …. देखो ना सिर्फ़ एक दिन तुम्हें नाश्ता कराने में देर हो गयी ..तुम्हें कितना बूरा लगा ..और जब मैं नहीं रहूंगी ..फिर क्या होगा ..??? और क्या तू भी मेरे बिना रह पाएगा ..??? ”

इस आखरी सवाल से मैं एक दम सकते में आ गया ….मुझे झकझोर सा दिया DIDI के इस सवाल ने …

मुझे अब अहसास हुआ NINA DIDI शादी की बाद मेरी बहन से ज़्यादा किसी और की बीबी हो जाएँगी … किसी और की पत्नी ..उनपर मेरा हक़ नहीं के बराबर होगा ..और उसी पल उन्हें देखने का मेरा नज़रिया ही बदल गया . वो मेरे सामने एक औरत थीं अब ..बहन नहीं …

मैं अब NINA DIDI की गोद में नहीं बल्कि एक खूबसूरत , जवान औरत की गोद में बैठा था …

मेरे सारे बदन में एक झूरझुरी सी हो उठी ….मेरी समझ में नहीं आया ये क्या हो रहा था … मेरे दिमाग़ में फिर से सवाल खड़े हो उठे …ये क्या है ..???

NINA DIDI की गोद में मैं हर रोज़ बैठता हूँ ..पर ऐसा तो कभी महसूस नहीं हुआ ….फिर आज क्यूँ ..?? इन्ही सब सोच में खो

“अरे किस सोच में डूब गये ….लो और लो ..मुँह खोलो ना किशू ..”

DIDI की आवाज़ से मैं वापस आया … किसी तरह नाश्ता किया…. .और मुँह हाथ धो कर बाहर निकल गया दोस्तों के साथ खेलने ……

DIDI के रोने का कुछ कुछ मतलब शायद मुझे समझ आ रहा था ..शायद DIDI के मन में कुछ ऐसी ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा होगा …

जब मैं वापस आया ..तो मेरे कानों में DIDI की सुरीली आवाज़ आई…. किसी फिल्मी गीत के बोल थे ..उनके चेहरे पे मुस्कुराहट थी …खुशी थी ….

मुझे देखते ही उन्होने कहा “देख किशू आज पढ़ाई के बाद तू एक दम से सो मत जाना ..हम लोग आज ढेर सारी बातें करेंगे ..ठीक है ना ..???

” हां DIDI …. बिल्कुल सही कहा आप ने …. ”

उन्होने मुझे फिर से अपनी छाती से चिपका लिया …” ओओह किशू …किशू … तू कितना भोला है रे ….”

मैं समझ नहीं पा रहा था ..एक ही दिन में उन्होने मुझे दो बार सीने से लगाया और हर बार उनका तरीका कितना अलग था …..

“किस उधेड़बून में खो जाता है रे तू..?? चल आज रात को तेरी सारी उलझनें दूर कर दूँगी …अब जा तू नहा धो और पढ़ाई कर ..”

मैं DIDI के साथ रात होने वाली बातों की कल्पना में खोया अपने रूम के अंदर चला गया…..

मैं कमरे में आने के बाद नहाया , फ्रेश हुआ , कुछ हल्का महसूस किया ..पर मन अभी भी बेचैन सा था ..पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था …मैने किताब खोली ..

पर दिमाग़ में अभी भी DIDI के आज के दो रूप मेरे मस्तिष्क पटल पर बार बार आते जाते ..जैसे किसी फिल्म की सीन बार बार दोहराई जा रही हो..

एक तो उनका वो रोना और मुझे अपने सीने से लगाना…. इस तरह जैसे वो मुझ से अलग नहीं होना चाहती ..मुझे अपने बाहों में भर मुझे हमेशा के लिए अपने साथ कर लेना चाहती हों .ज़रा भी दूर नहीं होने देना चाहती हों .. मुझ से अलग होने का दर्द और तड़प भरा था उस आलिंगन में .

.और दूसरी बार सुरीली धुन गुनगुनाते हुए मुझे अपनी छाती से चिपकाना ..इसमें कितना आनंद था …मेरे साथ का आनंद .. मेरे साथ का सुख ..मुझे भी कितना अच्छा लगा …

पर इस दूसरी बार मुझे कुछ और भी महसूस हुआ ..उनके भरे भरे गोलाकार मुलायम स्तनों का दबाब मेरे सीने पर … इसके पहले आज तक मेरा ध्यान इस तरह के आनंद पर कभी नहीं गया था ..उस दिन क्यूँ ..??

ये अहसास अभी भी मेरे सीने पर था .. मुलायम स्तनों का दबाव , याद करते ही मेरे पॅंट के अंदर हलचल सी महसूस हुई …कुछ कड़कपन महसूस हुआ ..नीचे झाँका तो देखा मेरा पॅंट उभरा हुआ है …

मैने सामने के बटन खोले ….मेरा LUND खड़ा था …

हे भगवान ये क्या हो रहा है … मैने अपने हाथ से उसे शांत करने को थामा और सहलाया … पर ये तो और भी कड़क हो गया और मुझे अच्छा लगा …

मैं उसे ऐसे ही थामे रहा ..एक दो बार उत्सुकतावश उसकी चमड़ी उपर नीचे की ..और भी अच्छा महसूस हुआ …मेरे पूरे शरीर में सिहरन हो उठी …( मैने अपने स्कूल में कुछ लड़कों को ये बात करते सूना था के चमड़ी उपर नीचे करने से बड़ा मज़ा आता है ) ..मैने इसे आज़माना चाहा …

मैने चमड़ी उपर नीचे करना जारी रखा ..एक असीम आनंद में मैं डूबा था ..DIDI का चेहरा और भरे स्तनों का मेरे सीने पर दबाव याद करते मैं लगातार चमड़ी उपर नीचे कर रहा था ,
अचानक मेरा LUND काफ़ी कड़ा हो गया और फिर मुझे ऐसा लगा मानो पूरे शरीर से कुछ वहाँ मेरे LUND के अंदर आ रहा है , कुछ जमा हो रहा है ..

मेरे चमड़ी उपर नीचे करने की गति अपने आप तेज़ हो गयी ..तेज़ और तेज़ और तेज़ और उस के बाद पेशाब वाले छेद से एक दम से गाढ़ा सफेद पानी जैसा पिचकारी छूटने लगा …

मेरा शरीर कांप रहा था …LUND झटके खा रहा था और थोड़ी देर बाद वो शांत हो कर सिकूड गया ..मुझे काफ़ी राहत महसूस हुई ..

उस दिन मैने जिंदगी में पहली बार मूठ मारी .

मैं हैरान था अपने में इस बदलाव को देख ..NINA DIDI के बारे ऐसी सोच …क्या हो गया है मुझे..??? अगर उनको मालूम हुआ , वो क्या सोचेंगी ..??

मैं आँखें बंद किए कुर्सी पर सर पीछे किए हाँफ रहा था …

थोड़ी देर बाद मैं नॉर्मल हुआ ..कुर्सी से .उठा अपने रूमाल से LUND को पोछा और फर्श पर जो सफेद गाढ़ा पानी गिरा था ..उसे भी सॉफ किया … मुझे अब तक उस पानी का नाम तक नहीं मालूम था ….

तभी DIDI की आवाज़ आई ….” किशू पढ़ाई ख़त्म हो गयी ..???” और वो अंदर आ गयीं .

मैं अपनी किस्मत को सराह रहा था ..अगर DIDI थोड़ी देर पहले आतीं तो मेरी क्या हालत होती..??

“हां DIDI स्कूल की पढ़ाई तो ख़त्म हो गयी .पर अभी आप से बहुत कुछ पढ़ना बाकी है..”

“मुझ से पढ़ाई ….क्या मतलब ..???’

” अरे कुछ नहीं DIDI ..आप ने ही कहा था ना आप मेरी सारी उलझनें दूर करनेवाली हो ..??”

“ओह ..हां ..चल पहले खाना खा लो ..फिर बातें करते हैं ..”

उस वक़्त उनके बोलने का लहज़ा बिल्कुल नॉर्मल था…. फिर वही हँसी..खील-खिलाहट और मस्ती ..मैं एक टक उन्हें देख रहा था …

उफफफफफ्फ़..कितनी अच्छी लग रहीं थी ..पर उस वक़्त मुझे DIDI कुछ और भी लग रही थी….

“अरे ऐसे टकटकी लगाए क्या देख रहा है … पहले कभी देखा नहीं है क्या ..”

मैने मन ही मन में कहा ” देखा तो है पर इस नज़र से नहीं ..”

पर DIDI से कहा ” नहीं DIDI ..अभी आपकी रोने वाली सूरत नहीं है ना … इसलिए आप हँसती हुई कितनी अच्छी लग रहीं हैं..”

DIDI थोड़ी देर मुझे देखती रहीं …मेरे कंधे पे हाथ रखा ..” अब नहीं रोउंगी ..कभी नहीं … चल अब खाना खा ले ”

इतना कहते कहते उन्होने मुझे मेरे कंधों से जकड़ लिया और साथ साथ किचन की तरफ हम जाने लगे …

DIDI किचन में अंदर आते ही एक बड़ी थाली में अपने और मेरे लिए खाना लगाया और कहा
” चल किशू मेरे रूम में ,,यहाँ MAA और बुआ आते रहेंगे …बात करने का मज़ा नहीं रहेगा …”

“हां DIDI चलिए ..” मैने तपाक से जवाब दिया …

अपने रूम में NINA DIDI नीचे बैठ गयीं , रोज की तरह उन्होने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया …पर आज जब मैं उनकी जांघों पर बैठा ,, मुझे पहली बार आज कुछ अजीब सा लगा … कुछ हिचकिचाहट सी हुई … पर DIDI को बूरा ना लगे इस वज़ह मैं चुपचाप बैठ गया .

Print This Page

Related posts