Maa Beta Aur Nokarani Ki Gandi Indian Sex Kahani

Maa Beta Aur Nokarani Ki Gandi Indian Sex Kahani

जब यह सब मादक घटनाएं घटना शुरू हुईं तब मैं काफी छोटा था । अभी अभी किशोर अवस्था में कदम रखा था । गाँव के बड़े पुश्तैनी मकान में मैं कुछ ही दिन पहले माँ के साथ रहने आया था । नौ साल की उम्र से मैं शहर में मामा के यहाँ रहता था और वहीँ स्कूल में पड़ता था । तब गाँव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल था , इसलिए माँ ने मुझे पढने शहर भेज दिया था । अब गाँव में हाई स्कूल खुल जाने से माँ ने मुझे यहीं बुलवा लिया था कि दसवीं तक की पूरी पढाई मैं यहीं कर सकूँ ।

घर में माँ, मैं हमारा जवां 22 साल का नौकर घोटू और उसकी माँ झुमरी रहते थे । झुमरी हमारे यहाँ घर में नौकरानी थी । चालीस के आस पास उम्र होगी । घर के पीछे खेत में एक छोटा मकान रहने को माँ ने उन्हें दे दिया था । जब मैं वापस आया तो माँ के साथ साथ झुमरी और घोटू को भी बहुत ख़ुशी हुई । मुझे याद है कि बचपन से झुमरी और घोटू मुझे बहुत प्यार करते थे । मेरे सारी देखभाल बचपन में घोटू ही किया करता था ।

वापिस आने के दो दिन में ही मैं समझ गया था कि माँ घोटू और झुमरी को कितना मानती थी । वे हमारे यहाँ बहुत सैलून से थे । मेरे जन्म के भी बहुत पहले से । असल में माँ उन्हें शादी के बाद मायके से ही ले आई थी । अब मैंने महसूस किया कि माँ की उनसे घनिष्टता और बढ़ गयी थी । वे उनसे नौकर जैसा नहीं बल्कि घर के सदस्य जैसा बर्ताव करती थी । घोटू तो माँ जी मां जी कहता हमेशा उसके आगे पीछे घूमता रहता था ।

घर का सारा काम माँ ने झुमरी के सपुर्द कर रखा था । कभी कभी झुमरी माँ से ऐसे पेश आती थी । जैसे झुमरी नौकरानी नहीं बल्कि माँ की जेठानी हो । कई बार वो माँ पर अधिकार जताते हुए उनसे डांट डपट भी करती थी । पर माँ चुपचाप मुस्कराकर सब सहन कर लेती थी । इसका कारण मुझे जल्दी ही पता चल गया । जब से मैं आया था तब से झुमरी और घोटू मुझपे ख़ास ध्यान देने लगे थे । झुमरी बार बार मुझे पकड़ कर सीने से लगा लेती थी और चूम लेती ।

“मुन्ना, बड़ा प्यारा हो गया है तू , बड़ा होकर अब और खूबसूरत लगने लगा है , बिलकुल छोकरियों जैसे सुन्दर है, गोरा चिकना” झुमरी कहती ।

माँ यह सुनकर अक्सर कहती, “अरे अभी बहुत छोटा बच्चा है , बड़ा कहाँ हुआ है ।”

तो झुमरी कहती, “हमारे काम के लिए काफी बड़ा है , मालकिन” और आँखें नचाकर हंसने लगती । माँ फिर उसे डांट कर चुप करा देती । झुमरी की बातों में छुपा अर्थ बाद में मुझे समझ में आया । घोटू भी मेरी और देखता और अलग तरीके से हँसके बोलता, मुन्ना नहला दूं? बचपन में मैं ही नह्लाता था तुझे । मैं नराज होकर उसे डांट देता । वैसे बात सही थी । मुझे कुछ कुछ याद था कि बचपन में घोटू मुझे नंगा करके नह्लाता था । तब वो 15 साल का होगा । मुझे वो कई बार चूम भी लेता था । मेरी लुल्ली और चूतडों को वो खूब साबुन लगाकर रगड़ता था और मुझे वो बड़ा अच्छा लगता था । एक दो बार खेल खेल में घोटू मेरी लुल्ली और चुतड चूम भी लेता और फिर कहता कि मैं माँ से ना कहूँ । वो मुझे इतना प्यार करता और दिन भर मेरे साथ खेलकर मेरा मन बहलाता रहता इसलिए मैं चुप रहता था ।

वैसे झुमरी की यह बात सच थी कि अब मैं बड़ा हो गया था । माँ को भले ना मालूम हो पर झुमरी ने शायद मेरे तने लंड का उभार पेंट में से देख लिया होगा । इस कमसिन उम्र में भी मेरा लंड खड़ा होने लगा था और पिछले ही साल से मेरा मुठ मारना भी शुरू हो गया था । शहर में मैं गंदी किताबें चोरी से पड़ता था और उनमें कई नंगी औरतों की तस्वीरें देख कर मूठ मारता । बहुत मजा आता था औरतों के प्रति मेरी रूचि बहुत बढ़ गयी थी । खास कर बड़ी खाए पिए बदन की औरतें मुझे बहुत अच्छी लगती थी ।

गाँव आने के बाद गंदी किताबें मिलना बंद हो गया था । इसलिए अब मैं मन के लड्डू खाते हुए तरह तरह की औरतों के नंगे बदन की कल्पना करते हुए मूठ मारा करता था । आने के बाद माँ के प्रति मेरा आकर्षण बहुत बढ़ गया था । सहसा मैंने महसूस किया था कि मेरी माँ एक बड़ी मतवाली नारी थी । उसके इस रूप का मुझ पर जादू सा हो गया था । शुरू में एक दिन मुझे अपराधी जैसा लगा था । पर फिर लंड में होती मीठी टीस ने मेरे मन के सारे बंधन तोड़ दिए थे ।

मेरी माँ दिखने में साधारण सुन्दर थी । भले ही बहुत रूपवती ना हो पर बड़ी सेक्सी लगती थी । 35 साल की उम्र होने से उसमें एक पके फल सी मिठास आ गयी थी । थोडा मोटा खाया पिया गोरा चिट्टा मांसल शरीर , गाँव के स्टाइल में जल्दी जल्दी पहनी ढीली ढीली साड़ी,चोली और चोली में से दिखते सफ़ेद ब्रा में कसे बड़े बड़े मुम्मे , इनसे वो बड़ी चुदैल सी लगती थी , बिलकुल मेरी ख़ास किताबों में दिखाई गईं चुदैल रंडियों जैसी ।

मैंने तो अब उसके नाम से मूठ मारना शुरू कर दिया था । अक्सर धोने को डाले हुए उसकी ब्रा या पैंटी मैं चुप चाप कमरे में ले आता और उसमें मूठ मारता । उन कपड़ों में से आती उसके शरीर की सुंगंध मुझे मतवाला कर देती थी ।

एक दो बार मैं पकडे जाते हुए बचा । माँ को अपनी पैंटी और ब्रा नहीं मिले तो वो झुमरी को डांटने लगी । झुमरी बोली कि माँ ने धोने डाली ही नहीं । किसी तरह से मैं दुसरे दिन उन्हें फिर धोने के कपड़ों में छुपा आया । झुमरी को शयद पता चल गया था क्योंकि माँ की डांट खाते हुए वो मेरी और देखकर मंद मंद हंस रही थी पर कुछ बोली नहीं बस माँ को बोली , “आजकल आपके कपडे ज्यादा मैले हो जाते हैं मालकिन , ठीक से धोने पड़ते हैं” ।

मेरी जान में जान आई । मुझे ज्यादा दिन प्यासा नहीं रहना पड़ा । माँ वास्तब में कितनी चुदैल और छिनाल थी और घर में क्या गुल खिलते थे । यह मुझे जल्द ही मालूम हो गया । मैं एक दिन देर रात को अपने कमरे से पानी पीने को निकला । उस दिन मुझे नींद नहीं आ रही थी । माँ के कमरे से कराहने की आवाजें आ रही थी । मैं दरवाजे से सट कर खड़ा हो गया और कान लगाकर सुनने लगा , सोचा माँ बीमार तो नहीं हैं ।

आहा… मर गयी रे…. झुमरी… तू मुझे मार डालेगी आज …उइइइइ सीसीसी…. माँ की हल्की चीख सुनकर मुझे लगा कि ना जाने झुमरी , माँ को क्या यातना दे रही है । इसलिए मैं अन्दर घुसने के लिए दरवाजा खटखटाने ही वाला था कि झुमरी कि आवाज़ आई, “मालकिन , नखरे मत करो , अभी तो सिर्फ ऊँगली ही डाली है आपकी चूत में , रोज की तरह जीभ डालूँगी तो क्या करोगी” ?

“अरे पर आज कितना मीठा मसल रही है , मेरे दाने को छिनाल जालिम , कहाँ से सीखा ऐसा दाना रगड़ना”?, माँ करहाते हुए बोली ।

“घोटू सीख कर आया है, शहर से शायद वो ब्लू फिल्म देख कर आया है , कल रात को मुझे चोदने के पहले बहुत देर तक मेरा दाना मसलता रहा हरामी , इतना झड़ाया मुझे कि मै पस्त हो गयी,” झुमरी की आवाज़ आई ।

तभी कल मुझे चोदने नहीं आया बदमाश , अपनी माँ को ही चोदता रहा, ।तू तो दिन रात चुदती है अपने बेटे से तेरा मन नहीं भरता ? रोज रात को पहले मेरे ले आया कर उसे , तुझे तो मालूम है कि उसकी रात की ड्यूटी मेरे कमरे में है , तू भी रोज आ जाया कर , सब मिलकर चुदाई करेंगे, हफ्ते में एक बार चुद कर मेरा मन नहीं भरता झुमरी बाई , चल अब चूस मेरी चूत ज्यादा ना तडपा ।

“मैं तो रोज आ जाऊं मालकिन , पर अब मुन्ना आ गया है , जरा छुपा कर करना पड़ता है”, झुमरी बोली ।

“अरे वो बच्चा है , जल्दी सो जाता है , अब चूस ले मेरी चूत को, मत तडपा मेरी रानी, अपनी मालकिन को”, माँ करहाते हुए बोली ।

यह सब सुनकर मैं बहुत गर्म हो गया था । दरवाजे से अन्दर झाँकने की कोशिश की , पर कोई छेद या दरार नहीं थी । आखिर अपने कमरे में जाकर दो बार मुठ मारी । तब शान्ति मिली । एक दो बार मैंने लेस्बियन वाली कहानियां पढी थी । पर चित्र नहीं देखे थे । इसलिए मन ही मन में कल्पना कर रहा था कि माँ और झुमरी की रति कैसी दिखती होगी ।

अब मैं इस ताक में रहता था कि रात को कौन माँ के कमरे में आता है ।

यह देखूं घोटू कभी ना कभी आएगा और माँ को चोदेगा । इस बात से मैं ऐसा गरमाता कि समझ में नहीं आ रहा था , कि क्या करूं? माँ के साथ साथ अब झुमरी बाई के नंगे बदन की कल्पना भी करने लगा । चालीस साल उम्र होने के बावजूद झुमरी बाई का शरीर काफी छरहरा और तंदरुस्त था । सांवली जरुर थी, पर दिखने में काफी ठीक लगती थी । दोपहर को उसके नाम की भी मैंने मूठ मार ली ।

दुसरे दिन भी रात में झुमरी माँ के कमरे में आई पर अकेले । उस रात मैं चुपचाप माँ के कमरे तक गया और कान लगाकर अन्दर की बातें सुनने लगा ।

“कल ले आउंगी घोटू को अपने साथ बहू रानी , वो जरा काम में था , खेतों को भी तो देखना पड़ता है , अब चुपचाप मेरी चूत चूसो, खुद तो चुसवा लेती हो , मैं क्या मूठ मारूं? कल घोटू ने भी नहीं चोदा” , झुमरी बोली ।

कुछ देर की खामोशी के बाद झुमरी बोली , “हाँ ऐसे चूसो मालकिन , अब आया मजा , जरा जीभ अन्दर तक डालो, देखो आपकी नौकरानी की चूत में क्या माल है, तुम्हारे लिए और तुम्हें पसंद है, यह मुझे मालूम है , कई बार तो चख चुकी हो”।

मैं समझ गया । घोटू के लंड का लालच देकर आज झुमरी माँ से खूब चूत चुसवा रही थी । कुछ ही देर में झुमरी के कराहने की आवाज आने लगी और फिर वो चुप हो गई । साली झड गयी थी शायद ।

“अच्छा लगा मेरी चूत का पानी मालकिन? मैं तो पहले ही कहती थी कि रोज चखा करो , अब रोज चूसवाउंगी आप से” , बोलकर झुमरी फिर सिस्कारियां भरने लगी ।

कुछ देर बाद झुमरी बोली, “बहू रानी अब मुन्ना भी आ गया है , उससे भी चुदवा के देखो , घर का लड़का है , कब काम आएगा? अब मैं या घोटू , किसी दिन ना हों आपकी सेवा के लिए , फिर भी प्यासा रहने की जरुरत नहीं है तुम्हें” ।

मेरे कान खड़े हो गए । मेरी बातें हो रही थी । लंड भी उछलने लगा था । माँ कुछ देर चुप रही । फिर थोड़ी शर्मा कर बोली, “अरे अभी छोटा है कुनाल , बच्चा है और फिर मेरे बेटे से ही मैं कैसे चुद्वाऊं” ?

“वाह मालकिन , मेरे बेटे से चुदती हो, मेरे और मेरे बेटे की चुदाई में बड़ा रस लेती हो और खुद के बेटे की बात आयी तो शर्मा रही हो , मुझे देखो अपने बेटे से चुदाकर क्या सुख पाती हूँ , बड़ा प्यारा छोकरा है अपना मुन्ना और छोटा वो तो कुछ नहीं है, रोज सडका लगाता है बदमाश, मुझे पता है , मैं कपडे धोती हूँ उसके और तुम्हारे भी , तुम्हारी ब्रा कई बार कड़ी रहती है, उसमें दाग भी रहते हैं , कौन मूठ मारता होगा उसमें? घोटू तो नहीं मारता , यह मैं जानती हूँ और उस दिन तुम मुझ पर चिला रही थी , तुम्हारी ब्रा और पैंटी नहीं मिले , इसलिए कौन बदमाश उन्हें ले गया था बताओ तो” ? झुमरी हँसते हुई बोली ।

कुछ देर कमरे से सिर्फ चूसने और चूमा चाटी की आवाजें आई । फिर माँ वासना भरी आवाज में बोली,”बदमाश है बड़ा , अपनी माँ की ब्रा में मूठ मारता है , अब तो उससे चुद्दा ही लूं झुमरी , अभी लंड छोटा होगा मेरे बेटे का , पर होगा बड़ा रसीला री, मेरा मन हो रहा है चूसने का”।

कुछ देर बाद झुमरी बोली “और उससे चूत चुस्वाने का मन नहीं होता मालकिन? एक माँ के लिए इससे मस्त बात क्या हो सकती है , कि वो अपने बेटे को अपनी चूत का रस पिलाए, जिसमें से वो बाहर आया है , यह बेटे बड़े बदमाश होते हैं बहू रानी , अपनी माँ पर मरते हैं , इनसे तो कुछ भी करा लो, माँ के गुलाम होते हैं यह बच्चे और छोटा भले हो मुन्ना का लंड , एक दम लोहे जैसा कड़क होगा , आखिर अभी अभी जवान होने को है” , ।

“तुम्हें शर्म आती है, तो मुन्ना को मेरे हवाले कर दो , मैं और घोटू मिलकर उसे सब सिखा देंगे , फिर जब पूरा चोदू बन जाये तुम्हारा बेटा , तो तुम उसे अपनी सेवा में रख लेना” झुमरी बोली ।

माँ बोली, “तेरी बात तो समझ में आती है , पर इसमें घोटू क्या करेगा?

झुमरी बोली, “बहू रानी घोटू महाहरामी है , शायद उसे मुन्ना अच्छा लगता है , बचपन में भी वही तो संभालता था मुन्ना को , नह्लाता भी था , तुम खुद घोटू से क्यों नहीं बात कर लेती , कल तो आएगा ही वो तुम्हे चोदने , तब पूछ लेना , वैसे बड़ा रसिक है मेरा लाल , खट्टा मीठा दोनों खाना चाहता है और मुन्ना से ज्यादा मस्त मीठा स्वाद उसे कहाँ मिलेगा? अब यह बताओ , बहु रानी कि मेरी चूत का पानी पसंद आया कि नहीं , वैसे पानी नहीं , शहद है तुम्हे पक्का माल चखाने के चक्कर में आज मैं घोटू से चुदाया भी नहीं और मूठ भी नहीं मारी , सीधा आपके मूंह में झड रही हूँ , कल रात के बाद” ।

माँ झुमरी की चूत चूसते हुई बोली, “अरे यह भी कोई पूछने वाली बात है? तेरी चूत का माल है या खोआ? गाढ़ा गाढ़ा सफ़ेद सफ़ेद मलाईदार कितना चिपचिपा है देख! तार तार छूट रहे हैं , घोटू बड़ा नसीब वाला है , बचपन से चखता आया है यह मावा, अब मेरे लिए भी रखा कर और कुनाल बेटे को भी चखा देना कभी” ।

मैं वहां से खिसक लिया । माँ को चोदने की बात सोच कर ही मैं पागल सा हुआ जा रहा था । ऊपर से झुमरी बाई और घोटू की बात सोच कर मुझे कुछ डर सा भी लग रहा था । कहीं माँ मान गई और मुझे उन चुदैल माँ बेटे के हवाले कर दिया तो मेरा क्या हाल होगा? वैसे मन ही मन फूल कर कुप्पा भी हो रहा था । झुमरी बाई के छरहरे दुबले पतले जैसे शरीर को याद करके उसी के नाम से मैंने उस रात मुठ मारी ।

अब घोटू के बारे में भी सोच रहा था । वो बड़े गठीले बदन का सुन्दर जवान था । झुमरी सांवली थी । पर घोटू एक दम गेहू रंग का था । मॉडल बनने लायक था । सोते समय झुमरी की इसी बात को मैं सोच रहा था कि घोटू मेरा क्या करेगा ।

दुसरे दिन सुबह से मैं इस चक्क्कर में था कि किसी तरह माँ के कमरे में देखने को मिले । जब माँ बाहर गई थी और मैं अकेला था तब मैंने हाथ से घुमाने वाली ड्रिल से दरवाजे में एक छेद कर दिया । उसके ऊपर उसी रंग का एक लकड़ी का टुकड़ा फंसा दिया । आज घोटू आने वाला था । कुछ भी हो जाए , मैं अपनी माँ को उस सजीले नौजवान से चुदते देखना चाहता था ।

रात को मैं जल्दी अपने कमरे में चला गया । अन्दर से सुनता रहा , घोटू और झुमरी बाई के आने का पता मुझे चल गया । जब माँ ने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला , कुछ देर रुकने के बाद , मैं चुपचाप बाहर निकला और माँ के कमरे के दरवाज़े के पास आया । अन्दर से सिस्काने और हंसने की आवाजें आ रही थी ।

“चोद डल मुझे घोटू बेटा और जोर से चोद अपनी मालकिन की चूत , झुमरी अपने बेटे को कह कि मुझ पर दया ना करे , हचक हचक कर मुझे चोद डाले , हफ्ता होने को आया यह बदमाश गायब था , मैं तो तरस कर रह गई इसके लंड को”, माँ सिसकते हुए कह रही थी ।

फिर झुमरी की आवाज़ आई , “बेटा, देखता क्या है , लगा जोर का धक्का , चोद डाल साली को , देख कैसे रिरिया रही है? कमर तोड दे इस हरामन की , पर झड़ना नहीं , जब तक मैं ना कहूँ , मन भर कर चुदने दे , काफी प्यासी है , तेरी मालकिन तेरे लौड़े के लिए” ।

झुमरी गंदे गंदे शब्दों और गालियों का प्रयोग, माँ और घोटू को और उत्तेजित करने के लिए जान बूझकर कर रही थी, शायद!

मैंने दरवाज़े के छेद से अन्दर देखा । ऊपर की बत्ती जल रही थी । इसलिए सब साफ़ दिख रहा था । माँ मदर्जात नंगी बिस्तर पर लेटी थी और घोटू उस पर चढ़ा हुआ था । उसे घचाघच चोद रहा था । मैं बाजू से देख रहा था , इसलिए माँ की चूत तो मुझे नहीं दिखी । पर घोटू का मोटा लम्बा लंड सपष्ट माँ की गोरी गोरी जांघों के अन्दर बाहर होता हुआ मुझे दिख रहा था ।

झुमरी बाई पूरी नंगी होकर माँ के सिरहाने बैठ कर उसके मुम्मे दबा रही थी । क्या चूचियां थी माँ की और बड़े काले चुचक , बीच बीच में झुक कर झुमरी बाई माँ के होंठ चूम लेती थी । झुमरी बाई भी कम नहीं थी । एक दम छरहरा सांवला बदन और छोटी तनी हुई चूचियां । घोटू ऐसा कस कर मेरी माँ को चोद रहा था कि जैसे खाट तोड़ देगा । खाट भी चरमर चरमर चरमरा रही थी ।

मेरी माँ को चोदते चोदते घोटू बोला, “माँजी, कभी गांड भी मरवाइये , बहुत मजा आएगा” ।

माँ सिसकते हुए बोली, “हाँ रे चोदू , तुझे तो मजा आएगा , पर मेरी तो फट जाएगी , आज तक किसी से नहीं मरवाई मैंने , अब तुझसे मरवाऊँ? मैं नहीं मरवाती गांड , इतने मोटे लंड से” ।

झुमरी बोली, “नहीं फटेगी मालकिन , घर का माखन लगा कर प्यार से मारेगा मेरा बेटा , आसानी से फिसलेगा , मेरी भी गांड मारता है यह हरामी , बहुत मजा आता है , अब मेरी गांड चुद चुद कर चौड़ी हो गई है , मेरे बेटे को भी किसी नई तंग गांड का मजा लेने दो” ।

माँ अब हाथ पैर फेंक रही थी ।

“चोद घोटू, चोद डाल मुझे राजा , झुमरी बाई मेरी चूची दबा और जोर से मुझे चुम्मा दे दे मेरी जान”, माँ सिसकते हुए बोली।

“बहुत चिचिया रही है यह रंडी, इसका मुंह बंद करना पड़ेगा”, कहकर झुमरी माँ के मुंह पर चढ़ कर बैठ गई । अपनी चूत माँ के मुंह पर रख कर उसने माँ की बोलती बंद कर दी और जांघें आपस में कस कर माँ का सर अपनी जाँघों में दबा लिया । फिर उचक उचक कर माँ के मुंह को चोदने लगी ।

यह नजारा देख कर मुझसे नहीं रहा गया । मुंह से अवाज़ ना निकले ऐसी कोशिश करते हुए अपने लंड को मैं रगड़ कर अन्दर चल रही धुंअधर चुदाई देखने लगा । झुमरी माँ का सर कस कर अपनी चूत पर दबा कर ऊपर निचे उछल रही थी । दोनों माँ बेटे मिलकर बहुत देर माँ को गूंदते रहे । जब माँ झड़ने को आ जाती । तब झुमरी बाई घोटू को इशारा कर देती ।

“रुक बेटे, लंड पेलना बंद कर, नही तो झड जाएगी यह साली चुदैल औरत, बहुत दिन से मुझे कह रही थी कि घोटू नहीं आया चोदने , तो आज ऐसा चोद कि दो दिन उठ ना सके”, झुमरी बाई बोली।

दस मिनट मिनट में माँ की हालत बुरी हो गई । वो रो पड़ी। झुमरी की चूत में दबे उसके मुंह से हलकी दबी चीखें निकल रही थी । उससे यह चुदासी सहन नहीं हो रही थी । बिना झडे उस मीठी सूली पर लटके लटके वो अब बुरी तरह तड़प रही थी । झुमरी खुद शायद एक दो बार माँ के मुंह में झड चुकी थी । माँ के सर पर से उतर कर वो लेट गई और माँ के चुम्बन लेने लगी ।

“पसंद आया अपनी नौकरानी की चूत का रस मालकिन” ? घोटू से चुदते चुदते तो यह और मसालेदार लगा होगा आपको” ।

माँ कुछ कहने की स्थिति में नहीं थी । बस सिसकती जा रही थी । माँ के चर्म सुख की इस स्थिति में मौका देखकर झुमरी ने मेरी बात आगे छेड़ी ।

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“मालकिन , मैं कह रही थी कि कल से घोटू मुन्ना को स्कूल छोड़ आया करेगा और ले भी आयेगा , आते आते मेरे पास छोड़ दिया करेगा” ।

माँ सर इधर उधर फेंकते हुए हाथ पैर पटकते हुए बोली,”तुम दोनों क्या करोगे मेरे बच्चे के साथ , मुझे मालूम है, हाए मैं मरी! , घोटू दया कर चोद डाल रे बेटे मत तडपा अब”।

घोटू माँ की चूत में लंड पेलता हुआ बोला, “बहुत प्यार करेंगे मुन्ना को माँ जी , उसे भी सब काम करीदा सिखा कर आपके कदमों में ला कर पटक देंगे, फिर आप दिन भर उस बच्चे के साथ मस्ती करना” ।

माँ को बात शायद जंच रही थी क्योंकि उसने कुछ नहीं कहा ।

झुमरी ने माँ के चुचक मसलते हुए कहा, “अरे अभी से उसे चुदाई के खेल में लगा दिया तो दो साल में लंड भी बड़ा हो जायेगा उसका , घोटू को देखो , बारह साल का था , तब से चोद रहा है मुझे बदमाश , अब देखो कैसा घोड़े जैसा लौडा हो गया है उसका” ।

माँ आखिर तैयार हो गयी, “ठीक है घोटू , कल से तेरे और झुमरी के सपुर्द किया मैंने मुन्ने को , हाए मैं मरती क्यों नहीं, चोद चोद कर मार डाल मुझे मेरे राजा” मस्ती में पागल हो कर माँ बोली ।

झुमरी खुश हो गई , घोटू को बोली, “घोटू बेटे, कल से ही शुरू हो जा , मैं कहती थी न कि मालकिन मान जाएँगी, आखिर अपने बेटे को भी तो पक्का चोदू बनाना है इन्हें , तू अब चोद डाल बेटे , ऐसे चोद अपनी मालकिन को कि वह सीधे इन्द्रलोक पहुँच जाए” ।

माँ के होंठों पर अपना मुंह जमाकर झुमरी माँ के मुंह को चूसने लगी और घोटू अब माँ को ऐसे बेरहमी से चोदने लगा । जैसे घोड़ा घोड़ी को चोदता है । मुझसे अब न रहा गया । मैं वहां से भागा और कमरे में आकर सटास्ट मूठ मारी । लौड़ा झड़ा तो इतनी जोर से कि वीरज सीधा छः फुट दूर सामने की दीवार पर लगा । आज का वो कामुक नजारा मेरे लिए स्वर्ग का नजारा था ।

मैं फिर जाकर आगे की चुदाई देखना चाहता था । पर इतने मीठे सख्लन के बाद कब मेरी आँख लग गई । मुझे पता ही नहीं चला ।

दुसरे दिन माँ बहुत तृप्त लग रही थी । चलते चलते थोड़े पैर अलग फैला कर चल रही थी । मैं स्कूल के लिए तैयार हुआ और जाने लगा तो माँ ने मुझे बुलाया

“कुनाल बेटे, आज से घोटू तुझे साइकिल पर पंहुचा दिया करेगा” ।

मैं थोडा डरा हुआ था । काफी सोचने के बाद मुझे कुछ अंदाजा होने लगा था कि घोटू की मुझमें इतनी दिलचस्पी क्यों थी और उन माँ बेटे ने मिल कर क्यों माँ से अपनी बात कल रात मनवा ली थी । घोटू की कल की बातें याद करके मैं आनाकानी करने लगा ।

“माँ , मैं तो रोज जाता हूँ अपनी साइकिल पर घोटू की जरुरत नहीं है” ।

मन ही मन डर लग रहा था कि घोटू नाजाने मेरे साथ क्या करे, वैसे माँ को चोदता हुआ उसका लंड मुझे बड़ा प्यारा लगा था । एक बार ऐसा भी लगा था कि उसे चूम लूं । माँ ने मेरे एक ना सूनी वो कामसुख में पागल थी और झुमरी को वचन दे चुकी थी ।

नाराज हो कर उसने सीधे मुझे एक तमाचा लगा दिया और डांट कर बोली, “अब मार खाएगा बुरी तरह, चुपचाप घोटू के साथ जा और वो जो कहे वैसा कर, जब घोटू खुद तैयार है तुझे छोड़ने को तो तुझे साइकिल पर जाने की क्या जरुरत है, पिछले हफ्ते गिर पड़ा था तो कैसे घुटना फूट गया था , अब बात ख़त्म” ।

मैं रुआंसा घोटू के साथ हो लिया । घोटू मेरे गाल सहला कर प्यार से बोला, “माँ के तमाचे का बुरा नहीं मानते मुन्ना , तू घबराता क्यों है, मैं दुश्मन थोड़े ही हूँ तुम्हारा , बहुत प्यार से स्कूल ले जाऊंगा, माँ जानती हैं कि मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ ,मेरी माँ भी बहुत चाह्ती है तुझे” ।

मैं कहने वाला था कि मालूम है, कैसे तुम दोनों मुझे चाहते हो, पर चुप रहा । डर के साथ मैं उत्सुक भी था कि अब क्या होगा । आखिर मैं अपनी रंडी माँ का बेटा जो था । उसका कामुक स्वभाव मुझे विरासत में मिला था । मैंने कहा, “घोटू भैया , अभी तो एक घंटा है , स्कूल शुरू होने में . इतनी जल्दी जा कर मैं क्या करूँगा” ।

वो हंस कर बोला, ”चलो तो मुन्ना, मजा करेंगे ,थोड़ी जंगल की सैर कराते हैं तुझे” ।

घोटू ने मेरा बस्ता करियर पर लगाया और मुझे साइकिल पर आगे डंडे पर बिठाकर चल दिया । आज वो बहुत मूड में था और गुनगुना रहा था । बार बार झुककर मेरे बालों को चूम लेता था । स्कूल जाते समय एक घना जंगल पड़ता था । वहां वो एक सुनसान जगह पर रुक गया और साइकिल से उतरकर धकेलता हुआ जंगल के अन्दर घनी झाडी के पीछे ले गया । साइकिल खडी करके उसने मुझे उतरने को कहा ।

फिर उसने चादर बिछाई और मुझे उसपर बिठाकर खुद मेरे पास बैठ गया ।

 

“आओ मुन्ना, थोडा यहाँ छाँव में बैठकर गपशप करते हैं” ।

आज वो धोती पहने था । वैसे अक्सर वो पेंट ही पहनता था । मैंने देखा कि उसकी धोती में एक बड़ा तम्बू बन गया था । घोटू का लौड़ा कस कर खड़ा था । घोटू मेरी और बड़े प्यार से देख रहा था । मुझे देखते हुए उसने अपना हाथ धोती के ऊपर से ही अपने लौड़े पर रखा और उसे सहलाने लगा । मैं अब घबरा गया था । पर एक अजीब अनकही चाहत से मेरा मन भर गया था । मैंने पूछा, “हम यहाँ क्यों रुके हैं घोटू और तुम यह क्या कर रहे हो?” उसने कोई जवाब नहीं दिया और अचानक मुझे अपनी गोद में खींचकर मेरे गाल चूमने लगा ।

“यह क्या कर रहे हो घोटू भैया? छोडो ना”, मैं घबरा कर चिलाया । पर उसने मेरे मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया और हाफ पेंट के ऊपर से ही मेरे शिश्न पर हाथ फेरने लगा । मुझे अजीब सा लग रहा था और मैं कल की देखी और सुनी बातों को याद कर के घबरा भी रहा था ।

उसके चुन्ग्ल से छूटने को मैं हाथ पैर फटकने लगा । घोटू के सख्त बाहुपाश के आग मेरी क्या चलने वाली थी? मेरे होंठों को अपने होंठों में दबा कर चूसते हुए मुझे बाँहों में भींचकर वो मेरे लंड को सहलाता रहा । उसके हाथ ने ऐसा जादू किया कि मेरा लंड कुछ ही देर में तन कर खड़ा हो गया ।

मुझे मज़ा आने लगा और मैंने छूटने की कोशिश करना बंद कर दिया । घोटू का चूमना भी मुझे अच्छा लग रहा था । उसके कुछ खुरदरे होंठ मुझे बहुत उत्तेजित कर रहे थे । मैंने अचानक पूरा समर्पण कर दिया और आँखें बंद करके उसके प्यार का मजा लेने लगा । मेरे ढीले पड़े बदन को और ज़ोरों से बाँहों में भींचकर वो अब मेरे होंठों को जोर से चूसने लगा । साथ ही उसने मेरी हाफ पेंट की ज़िप खोलकर उसमें से मेरा लंड निकाल लिया और उसे कस कर पकड़ लिया ।

कुछ देर बाद मुझे चूमना बंद करके घोटू बोला, “मजा आ रहा है मुन्ना?”

मैंने मुंडी हिलाई तो खुश होकर बोला,” मैंने कह रहा था मुन्ना, घबरा मत, अपने राजा मुन्ना को मैं बहुत प्यार करूँगा, खूब सुख दूंगा, अब देख और मजा आएगा, बस चुपचाप बैठे रहो” ।

मुझे निचे चादर पर लिटा कर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर मुठीयाने लगा । उसकी आँखें ऐसे उस पर लगी थी कि जैसे लंड नहीं, कोई मिठाई हो । अचनाक वो झुका और उंगली से मेरे सुपाड़े की ऊपरी चमड़ी निचे कर दी ।

“हाए मुन्ना, सुपाड़ा है या रेशमी अंगूर का दाना है रे? क्या चीज़ है मेरे मालिक!” कहकर वो उसे चाटने लगा ।

मुझे बड़ा अच्छा लगा । पर उसकी खुरदरी जीभ का स्पर्श मुझे अपने नंगे सुपाड़े पर सहन नहीं हो रहा था ।

“घोटू छोड़” उसके सर के बाल पकड़कर हटाने की कोशिश करता हुआ मैं बोला ।

घोटू ने सर उठाया और हंस कर बोला, “अब तो तेरा लंड चूसकर ही उठूंगा मैं, मुन्ना राजा, ऐसी चीज़ कोई छोड़ता है? मलाई है, मलाई!” फिर अपना मुंह खोल कर उसने मेरा पूरा लंड निगल लिया और चूसने लगा ।

मैं सिहर उठा इतना सुख मुझे कभी नहीं मिला था । माँ की ब्रेसियर में मूठ मारते हुए भी नहीं ।

एक दो बार घोटू के बाल पकड़कर मैंने उसका सर हटाने की कोशिश की और फिर आखिर अपने चूतड़ उछाल कर उसका मूंह चोदने की कोशिश करने लगा ।

मेरी जाँघों को सहलाते हुए घोटू ने मेरा लंड चूसना जारी रखा । अपनी जीभ से वो इतने प्यार से मेरा शिश्न रगड़ रहा था कि मैं कसमसा कर झड गया ।

घोटू ने मेरा लंड ऐसे चूसा जैसे कुल्फी चूस रहा हो । आँखें बंद करके उसने चटखारे ले लेकर मेरा वीर्य निगला ।

जब आखरी बूँद मेरे लंड से निचुड़ गयी तो वो उठ बैठा । मैं पस्त हो गया था । बहुत मजा आया था ।

“अच्छा लगा ना मुन्ना? सच बता, मूठ मारने में ज्यादा मजा आता है या मेरे चूसने में आया?” उसने पुछा ।

मैंने शर्माते हुए कहा कि उसके चूसने में मुझे ऐसा मजा आया था जो पहले कभी नहीं आया । वो फिर से मेरे लंड को चूमने लगा ।

“बहुत प्यारा लंड है, तेरा मुन्ना, एक दम गोरा और चिकना, बहुत दिन से ऐसे मिठाई मिली है खाने को, मेरा लौड़ा देखेगा राजा? तेरे जैसा खूबसूरत तो नहीं है, पर एकदम जानदार है” घोटू ने बड़े लाड से पुछा ।

मैं शर्मा रहा था पर मन में बहुत उत्सुकता थी । मुंडी हिलाकर हाँ कर दी । घोटू ने अपनी धोती एक तरफ से उठाई और अपना लौड़ा बाहर निकाल कर हाथ में ले लिया ।

“मुन्ना, मस्त मलाई थी तेरी, अब रोज खिलायेगा ना? ले , मैं भी अब तुझे गाढ़ी रबड़ी खिलाता हूँ , ऐसा स्वाद तुझे कभी नहीं मिला होगा, तेरी माँ तो दीवानी है इसकी” ।

मैं उस हल्लबी लंड को देखकर कांप उठा । मन में भय और कामना की एक मिली जुली टीस उठने लगी ।

कल माँ की चूत में घोटू का लौड़ा अन्दर बाहर होता मैंने देखा था पर आज पास से उसका साइज़ देखा तो मानो लकवा मार गया ।

बहुत अच्छा भी लगा, गोरा गोरा लंड, एकदम मांसल और खड़ा था, बड़ी बड़ी नसें उभरी हुई थीं । सुपाड़ा नंगा था और उसकी गुलाबी चमड़ी तनकर रेशम की तरह पतली और चिकनी लग रही थी । मुझे लगा था कि लंड की जड़ में घनी काली झांटें होंगी पर उसका पेट एकदम चिकना और सपाट था , गोटीयां भी चिकनी थीं ।

“अरे काटेगा नहीं , हाथ में तो ले! ज़रा खेल उससे, खुद के लौड़े से खेलता है कि नहीं मूठ मारने के पहले”? घोटू ने मुझे पुचकार कर कहा ।

अब तक मैं अपना डर भूलाकर तैश में आ गया था । मैंने धीरे से उस थिरकते लंड को हथेली में पकड़ा और हिलाया, फिर दुसरे हाथ की हथेली भी उस डंडे के इर्द गिर्द जकड़ ली । दोनों हाथों की मुठियों से भी वो आधा भी नहीं ढका था ।

“बाप रे घोटू भैया , कितना मोटा और लम्बा है? माँ और झुमरी भाई कैसे लेती हैं इसे अपनी चूत में? और झांटें भी नहीं हैं”, मेरे मुंह से निकल गया ।

“तूने देखा है क्या अपनी माँ को मुझसे चुदते?” घोटू बोला ।

मेरे चेहरे पर उमड़ आए शर्म के भाव देखकर मेरे गाल दबाता हुआ बोला, “अच्छा हुआ जो देख लिया, मजा आया? मेरी माँ और तुम्हारी माँ, दोनों महां चुदैल रंडियां हैं मुन्ना, अरे ऐसे लंड लेती हैं अपने भोसड़ों में कि जैसे साली जनम जन्म की प्यासी हों , मैं तो घंटों चोदता हूँ दोनों छिनालों को, साली मेरा ही क्या, घोड़े का भी लंड ले लें, इतनी गहरी चूत है उनकी” ।

मैं अब मस्ती में घोटू का लंड दबा और हिला रहा था ।

“कितना प्यारा और चिकना लगता है तेरा लंड, एकदम साफ़ भी है! कितना लम्बा है, बता ना?” कहते हुए ना रहकर मैंने उसे चूम लिया फिर शर्मा गया ।

घोटू खुश होकर बोला, “यह बात है मुन्ना, अरे तेरे लिए यह लंड कब से खड़ा है, आठ इंच का है पूरा, नाप ले तेरी स्केल से” ।

उसके कहने पर मैंने बसते से स्केल निकाली और नापा । सच में आठ साढे आठ इंच लम्बा और दो इंच मोटा था, सुपाड़ा तो ढाई तीन इंच मोटा था!

घोटू आगे बोला, “तेरा भी तो पेट चिकना है मुन्ना, तेरी झांटें कहाँ उगी है अभी, मेरे बहुत घनी है साली, पर मैं रोज शेब करता हूँ, माँ को ऐसा चिकना बिना बाल का लंड बहुत अच्छा लगता है, पर उसकी खुद की फुद्दी पर लम्बी झांटें हैं, साली छिनाल है, कहती है कि चूत चूसते समय झांटें मुंह में जायें तो ज्यादा मजा आता है पर मेरा लौड़ा चूसते हुए एक भी बाल मुंह में जाए , उसे अच्छा नही लगता, चल….. तू अब नखरा ना कर, तुझे मेरा लौड़ा पसंद आया, यह मुझे मालूम है, अब चूस डाल” ।

कहते हुए उसे मुझे अपने पास खींचा और मेरा सर अपनी गोद में दबा दिया । लंड में से सौंधी सौंधी मद जैसी खुशबू आ रही थी ।

“मुंह खोल और ले सुपाड़ा मुंह में, लड्डू जैसा” । उसके कहने पर मैंने उसका सुपाड़ा मुंह में ले लिया और चूसने लगा । मुझे पूरा मुंह खोलना पड़ा तब जाकर वो छोटे सेब जैसा सुपाड़ा मुंह में आया । मुंह ऐसा भर गया था जैसे बड़े साइज़ का लड्डू एक साथ मुंह में भर लिया हो । मेरा सारा डर गायब हो गया था । बहुत मज़ा आ रहा था ।

मैं उस नर्म चमड़ी पर जीभ फेरते हुए मज़ा ले लेकर घोटू का लौड़ा चूसने लगा ।

घोटू मरे बालों में उँगलियाँ चलाते हुए बोला, “हाए मुन्ना, मस्त चूसता है रे तू राजा, बाद में तुझे पूरा लौड़ा जड़ तक निगलना सिखा दूंगा, बहुत मज़ा आएगा, तू मेरा लौड़ा लेना भी सीख लेना , बहुत प्यार से दूंगा तुझे लौड़ा, देने और लेने में मुझे मज़ा आता है, मेरी माँ तो रोज़ मेरा लेती है, आगे से भी और पीछे से भी, मालकिन ने पिछले दरवाज़े से नहीं लिया अब तक, डरती है, शायद तू ले ले एक बार तो मैं कहूँगा कि लो, आपके कमसिन छोकरे ने भी मेरा ले लिया , अब क्यों डरती हैं? पहले वो तेरा छोटा लौड़ा ले ले , फिर मैं उन्हें प्यार से बड़ा दे दूंगा पिछवाड़े से” ।

मुझे लौड़ा देने की बात से मैं थोडा घबराया । उसका इशारा मेरी गांड में लंड देने का था । यह मैं समझ गया पर लंड चूसने में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं चुपचाप चूसता रहा । आधा घंटा हमने खूब मज़ा किया । बीच में घोटू ने मेरे मुंह से लंड निकाल लिया और मुझे गोद में लेकर खूब चूमा । मेरी जीभ चुसी और अपनी चुस्वायी मेरा लंड भी फिर खड़ा हो गया था और घोटू उसे प्यार से सहला सहला कर मस्त कर रहा था ।

“अपनी चिकनी गांड तो दिखा मुन्ना”, कहकर घोटू ने एकाएक मेरी पेंट उतार दी ।

मैं घबरा गया । मुझे लग रहा था कि शायद वो वहीँ मेरी गांड मारेगा । मेरी आँखों में उतर आए डर को देखकर उसने मुझे समझाया ।

“डर मत राजा , ऐसे थोड़े मारूंगा तेरी जल्दी में, मज़े ले लेकर मारूंगा , माखन भी लगाना पड़ेगा, जिससे सट से घुस जाए तेरे चूतडों के बीच, कुंवारी नाज़ुक गांड है तेरी, बहुत प्यार से लेने पड़ेगी, मेरी माँ के सामने मारूंगा, वो रहेगी तो तुझे संभाल लेगी, उसे बड़ी आस है अपने मालकिन के छोरे की गांड अपने बेटे से चुदते देखने की, अभी बस मुझे तेरी गांड देखनी है रे राजा , मेरी पेंट उतार कर उसने मेरे चूतडों पर हाथ फेरा और उन्हें ऐसे दबाया जैसे गेंदें हों, आहा क्या गांड हे रे तेरी कुनाल राजा! एकदम माखन , साली छोकरियों की भी इतनी प्यारी नहीं होती” , कहकर वो झुक कर मेरा नितम्ब चूमने लगा । फिर आवेश में आकर वो उन्हें बेतहाशा चाटने लगा और सीधे मेरी गांड के छेद में नाक डालकर सूंघने लगा जैसे उसमें इत्र भरा हो, सूंघ कर फिर मेरी गांड में उसने जीभ डाल दी । मुझे गुदगुदी हुई तो मैं हंसने लगा ।

“छोड़ घोटू , गुदगुदी होती है” , मैंने उसका सर हटाने की कोशिश की पर उसकी ताकत के आगे मेरी क्या चलने वाली थी । जोर जोर से वो मेरी गांड चूसता रहा । मुझे मज़ा आ रहा था इसीलिए ज़रा सा नखरा करके छूटने की दिखाऊ कोशिश करके मैं गांड चुसवाता रहा । गीली जीभ मेरी गांड के अन्दर इधर उधर होती थी तो बहुत अच्छा लगता था आखिर अपने आप पर घोटू ने किसी तरह काबू किया और उठ बैठा ।

“क्या माल है राजा, मैं तो कच्चा चबा जाऊं तुझे! तेरा गुलाम हो कर रहूँ पर चल बहुत हो गया, स्कूल भी जाना है” , कहकर वो टांग लम्बी करके बैठ गया और मुझे खींच कर मेरा सर अपनी जांघ पर लेकर अपना तन्नाया लौड़ा मेरे होंठों और गालों पर फेरता हुआ बोला ।

“अब चूस ले मुन्ना , और देख, मैं झडूंगा तो मुंह से गिराना नहीं, सब निगल लेना, वीर्य में बड़ी ताकत होती है तो खा के देख, स्वाद भी झकास लगेगा तुझे , फिर मेरे आगे पीछे घूमा करेगा हमेशा” ।

“घोटू भैया लौड़ा चुसाओ” कहकर मैंने मुंह खोल कर फिर उसका सुपाड़ा निगला और चूसने लगा । घोटू एक हाथ से मेरे सर को थाम और दुसरे हाथ से लंड का डंडा मुट्ठी में पकड़कर सडका लगाने लगा । उसकी सांसें अब तेज़ चल रही थी । मैं सांस रोके चूस रहा था और वीर्य के फवारे का इंतज़ार कर रहा था । डर लग रहा था कि जाने कैसा लगे? अगर अच्छा नहीं लगा और थूक दिया तो घोटू बुरा मान जाएगा । सुपाड़ा अचानक मेरे मुंह में ऐसे फूल गया जैसे गुब्बारा हो ।

“देख मुन्ना, अब झाड़ता हूँ , मेरी बात याद रखना, आह ……” कहकर घोटू झड़ गया । गर्म गर्म चिपचिपे वीर्य की पिचकारी मेरे मुंह में छूट पड़ी । उसकी धार इतनी तेज़ थी कि कुछ बूँदें तो सीधे फवारे जैसे मेरे गले में चली गईं ।

उस चिप चिपे द्रव्य की मुझे पहले थोड़ी उबकायी आई पर मन कड़ा कर मैंने घोटू का वीर्य निगलना शुरू किया । जब स्वाद लिया तो मज़ा आ गया । खरे कसैले मलाई जैसा स्वाद था । खुशबू तेज़ और सर घुमा देने वाली थी । मेरा लंड खड़ा हो गया । मैंने आँखें बंद की और चूस चूस कर घोटू का वीर्य पीने लगा । बहुत अच्छा लग रहा था । अब मैं समझा कि उन गन्दी कहानियों में औरतें कैसे लंड चूसने को बेताब रहती थीं । मैंने अब उसका लंड ऐसे चूसा जैसे रबड़ी हो । एक भी बूँद मैं छोड़ना नहीं चाहता था ।

जब उसका लंड ठंडा हो गया तो उसने मेरे मुंह से उसे निकाला । लंड बिलकुल साफ़ था । एक भी बूँद वीर्य की नहीं बची थी । घोटू खुश हो गया ।

“शाबाश मुन्ना, सही चूसा तूने, मज़ा आया? स्वाद मिला?”

मैंने सर हिलाया तो मेरी आँखों में झलकती तृप्ति देखकर वो मस्त हो गया ।

“मेरा वीर्य मस्त है….. मैं जानता हूँ…. अरे घर की वो दोनों चुदैलें तो हमेशा इसके पीछे रहती हैं… अब देख तेरे साथ क्या मज़ा करता हूँ… चल कपडे पहन ले और स्कूल चल”

मेरा लंड खड़ा था। मज़ा आ रहा था । मैंने मचल कर कहा, “घोटू, तू भी फिर एक बार चूस ले ना मेरा लंड”

उसने अपनी धोती ठीक की और मुझे पेंट पहनाते हुए बोला, “अब नहीं मेरे मुन्ना राजा, अब ज़रा सब्र कर… अब शाम को स्कूल छूटने के बाद मज़ा करेंगे… मेरी माँ के लिए भी कुछ माल रख और देख स्कूल में मूठ नहीं मारना”

मुझे स्कूल छोड़कर घोटू चला गया । मैं बहुत खुश था । मुंह में अब भी घोटू के वीर्य का स्वाद था । उसके लंड को याद कर करके मेरा और खड़ा हो रहा था । एक दो बार लगा कि बाथरूम जाकर मूठ मार आऊँ पर घोटू को दिए वादे को याद करके मैं चुप रहा ।

आखिर स्कूल छूटा और मैं बस्ता उठाकर भागा । घोटू मुझे लेने आया था । मैं साइकिल पर बैठा और हम चल दिए । बीच में अकेले में साइकिल रोककर घोटू ने मुझे चूम लिया । साफ़ था कि उसे मेरा चुम्बन लेने में बहुत मज़ा आता था । अपने मुंह में मेरे होंठ लेकर वो मन लगाकर चूस रहा था । उसका लंड खड़ा हो कर मेरी पीठ पर धक्के दे रहा था ।

“घोटू, लंड चूसने दे ना”, चुम्बन ख़त्म होने पर मैंने ज़िद की । एक गहरी सांस लेकर वो फिर साइकिल चलाते हुए बोला, “अब घर जाकर आगे की सोचेंगे, माँ इंतज़ार कर रही होगी” ।

हम घर आए तो माँ अपने कमरे में सर पर पट्टी बाँध कर लेटी थी । झुमरी उसका सर दबा रही थी ।

क्या हुआ माँ , मैंने पूछा ।

“अरे कुछ नहीं बेटा, तेरी माँ की माहवारी शुरू हो गई है… उसे बड़ी तकलीफ़ होती है इन दिनों में…. तू बता, मेरे बेटे ने ठीक से स्कूल छोड़ा या नहीं तुझे?” झुमरी बाई बोली । उसकी आँखों में शैतानी की चमक थी । माँ ने भी उत्सुकता से पूछा, “हाँ कुणाल बेटे, अच्छा लगा तुझे? तेरा ख़याल रखा ना घोटू ने?”

मैं क्या कहता, शर्मा गया । चुपचाप घोटू की ओर देखने लगा । मेरे चेहरे की खुशी और लज्जा से दोनों औरतें समझ गयीं और हंसने लगीं । घोटू भी बोला, “मालकिन, मुन्ना को मस्त मलाई खिलाई मैने, मैने भी खाई…. बड़ा मज़ा आया…. बहुत प्यारा बच्चा है माँ…. एकदम सही!” कहकर उसने उंगली और अंगूठा मिलाकर मेरी दाद दी ।

“चलो, अच्छा हुआ…. अब मैं तो बीमार हूँ… ऐसा करो झुमरी बाई, तुम और घोटू दो तीन दिन यहीं मुन्ना के कमरे में सो जाओ…. उसका मन बहलाओ…. कुणाल बेटे, जा अपने कमरे में…. झुमरी बाई को अभी भेजती हूँ…. और देख…. उनकी सब बातें सुनना…. जो कहें वो करना….. कुछ गडबड की तो हाथ पैर बाँध कर चाबुक से माँरूँगी”, माँ ने मुझे धमकी दी ।

“नहीं माँ, घोटू भैया मुझे बहुत प्यार करता है…मैं कुछ नहीं करूँगा”, मैने खुशी खुशी कहा और वहाँ से भाग लिया ।

झुमरी बाई ने रसोई में नाश्ता बना कर रखा था । मैने खाया और कमरे में आकर अपने पलंग पर लेट गया । मन में खुशी की लहर दौड रही थी । लौड़ा कस कर खड़ा था । लग रहा था कि मूठ मार लूँ पर अपने आप पर नियंत्रण करके पड़ा रहा । थोड़ी देर में झुमरी बाई कमरे के अंदर आई । दरवाजा लगाकर मेरे पास आकर बैठ गयी ।

“तो मज़ा आया मेरे बेटे का लौड़ा चूस कर मुन्ना?” आँख मारकर मुस्कराते हुए उसने पूछा ।

मैं शर्मा कर बोला, “हाँ बाई, बहुत स्वाद आया”

अपनी चोली उतारते हुए झुमरी बोली, “घोटू कह रहा था कि तू जन्मजात गान्डू और चुदक्कड है, इतना मस्त चूसा तूने उसका लौड़ा पहली बार में कि तुझ पर मर मिटा है, वो कह रहा था कि सधी हुई रंडियाँ भी इतना मस्त नहीं चूसतीं”

अपनी प्रशंसा सुनकर मैं और शर्मा गया । पर अब मेरी आँखें झुमरी बाई पर लगी हुई थीं ।

अब तक उसके मम्मे नंगे होकर मेरे सामने आ गये थे । मस्त मांसल छोटी पर एकदम कडक चूचियाँ थी उसकी, नासपती जैसी, चूचुक छोटे छोटे भूरे रंग के बेरों जैसे थे । बड़ी सहजता से उसने मुझे पास खींचा और एक चूची मुँह में दे दी ।

“चूस ले, वैसे इसमें अब दूध नहीं आता… पर तुझे अपनी भोसड़ी का पानी ज़रूर चखा सकती हूँ…. दूध पीना तू अपनी माँ का… एक अच्छे बेटे जैसे”

झुमरी के कड़े चूचुक मैं मन लगा कर चूस रहा था । बहुत मज़ा आ रहा था पर माँ के दूध की बात सुनकर मैं चकरा गया । माँ के स्तनों में दूध आता है? लौड़ा उच्छलने लगा ।

झुमरी मेरी परेशानी देखकर बोली, “अरे अचरज की क्या बात है…. दो साल पहले घोटू ने चोदकर उसे फिर माँ बना दिया था…. बच्चा जनने वो मेरे गाँव में चली गयी थी…. वहाँ के ज़मीनदार को बच्चा नहीं था…. उसने गोद में ले लिया… अब मालकिन को ऐसा दूध छूटता है… जैसे दुधारू गाय हो”

मैने पूछा, “किसे पीलाती है अम्मा?”

“हम दोनों को पीलाती है… अब तुझे पिलाएगी…. उस रात तू जल्दी चला गया लगता है…. चुदाई के बाद उसका दूध पीते हैं हम…. ताज़ा कर देता है उसका गरम मीठा दूध… फिर चुदाई शुरू करने की ताक़त आ जाती है…. दिन में भी दो तीन बार मिल जाता है”, कहकर झुमरी ने अपनी साड़ी भी उतार दी ।

वो अंदर कुछ और नहीं पहनती थी इसलिए अब मादरजात नंगी मेरे सामने बैठी थी । घोटू ने ठीक कहा था, एकदम घनी झाँटें थी उसकी । उनके बीच चूत की लाल लकीर दिख रही थी ।

अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, “मुन्ना, भोसड़ी देखी है कभी?”

मैने ना में सर हिलाया । मेरी साँसें अब ज़ोर से चल रही थी । झुमरी की चिकनी साँवली पुष्ट टाँगें मुझे बहुत अच्छी लग रही थीं । लगता नहीं था कि चालीस साल की होगी । तीस साल की जवान औरत सी लगती थी । मेरी आँखों में उभर आए कामना के भाव से वो बहुत खुश हुई ।

“पसंद आई झुमरी बाई लगता है मुन्ना! यानी अभी मेरी इतनी उमर नहीं हुई कि तुझ जैसे बच्चे को ना रिझा सकूँ… अरे भोसड़ी चाट कर देख, निहाल हो जाएगा… घोटू तो चूसता ही है, तेरी माँ भी इस भोसड़ी की दीवानी है… ले स्वाद देख” कहकर उसने भोसड़ी से निकाल कर मेरे मुँह में उंगली डाल दी ।

उंगली पर चिपचिपा सफेद शहद जैसा लगा था । भीनी मादक खुशबू आ रही थी । मैने उंगली मुँह में लेकर चूसी तो बहुत अच्छा लगा । मेरे चेहरे के भाव देखकर झुमरी ने मुस्कराकर मेरा सिर अपनी जांघों के बीच खींच लिया ।

“मैं जानती थी तुझे पसंद आएगा…. ले चाट ले बेटे, मुँह मार ले मेरी भोसड़ी में”

मुँह लगाने से पहले उस लाल रिसती भोसड़ी से खेलने का मेरा मन हो रहा था । मैने झुमरी की भोसड़ी में उंगली डाल दी । तपती गीली भोसड़ी में उंगली सट से चली गयी । मैने दो उंगली डालीं ।

झुमरी बोली, “अरे बेटे, घबरा मत, चल सब उंगली डाल दे, हाथ भी चला जाएगा तेरा, मेरे बेटे का लौड़ा है तेरे हाथ जितना”

मैने चार उंगलियाँ झुमरी की भोसड़ी में डाल दीं । सच में भोसड़ी क्या थी, भोसड़ा था!

“हाथ डाल ना पगले… खेल ले मन भर कर, फिर चूसने लग जा”

झुमरी को भोसड़ी चुसवाने की जल्दी हो रही थी । मैने उंगलियाँ आपस में सटाकर धीरे से अपनी हथेली अंदर डालना शुरू की । उसकी भोसड़ी रबर की थैली जैसे फैल गयी और सट से मेरा हाथ अंदर चला गया । लग रहा था जैसे मखमल की गीली तपती थैली में हाथ डाला है ।

“झुमरी बाई, बहुत अच्छा लग रहा है… गरम गरम है तुम्हारी भोसड़ी”

“और अंदर डाल! देख झुमरी बाई की भोसड़ी की गहराई! अरे मैं तो तुझे पूरा अंदर ले लूँ, तेरा हाथ क्या चीज़ है!”, झुमरी मस्ती में आकर बोली ।

मैने हाथ और अंदर घुसेडा । आधी कोहनी तक मेरा हाथ घुस गया । हाथ में अंदर कुछ गोल गोल गेंद जैसा आया । उसे पकड़ा तो मज़ा आ गया ।

“ये क्या है झुमरी बाई?” मैने पूछा ।

सिसकारियाँ लेते हुए झुमरी बोली, “मेरी बच्चेदानी का मुँह है राजा… हाय मुन्ना, आज मज़ा आ गया…. बहुत दिन बाद किसी ने हाथ डाला अंदर… बचपन में घोटू डालता था…. अब लौड़ा डालता है, बच्चेदानी तक…. पर हाथ से ऐसे पकड़ने में बहुत मज़ा आता है…. अंदर बाहर कर ना अपना हाथ! ज़रा दबा मेरी बच्चेदानी का मुँह” ।

मैं हाथ अंदर बाहर करके झुमरी की मूठ मारने लगा । बीच में उंगलियों से उस गेंद को मसल देता था ।

झुमरी को इतना मज़ा आया कि वो कसमसा कर झड़ गई । हांफ’ते हुए दो मिनिट रुकी और फिर बोली, “निहाल कर दिया रे लडके तूने, मज़ा आ गया… अगली बार कंधे तक तेरा हाथ भोसड़ी में लूँगी…. मेरा बस चले तो तुझे पूरा अपनी भोसड़ी में घुसेड़कर छुपा लूँ! पर अब चूस ले रे मेरे राजा… आज तो इतना शहद निकाला है तूने, तेरा हक है उस पर” ।

मैने हाथ झुमरी की भोसड़ी से बाहर निकाला । उसपर गाढा सफेद घी जैसा लगा था । झुमरी मेरी ओर देख रही थी कि मैं क्या करता हूँ । मैने जब अपना हाथ चाटकर सॉफ किया तो आनंद से उसकी आँखें चमकने लगीं । हाथ पूरा चाट कर फिर मैं झुक कर झुमरी की भोसड़ी चाटने लगा । झुमरी ने मेरा सिर अपनी भोसड़ी पर दबा लिया और कमर हिला हिला कर भोसड़ी चुसवाने लगी ।

झुमरी ने खूब देर अपनी भोसड़ी मुझसे चटवायी । अलग अलग तारीके सिखाए । कुत्ते जैसे पूरी जीभ निकालकर भोसड़ी को ऊपर से नीचे तक चाटना, छेद के अंदर जीभ डालना, मुँह में भगोष्ठ लेकर आम जैसा चूसना, दाने को जीभ से रगड़ना, सब मैने उसी दिन सीख लिया । वो बहुत खुश थी ।

“मस्त चूसता है तू मुन्ना… एक दिन में अनुभवी हो गया बदमाश! मालकिन बहुत खुश होगी… दिन रात अपने बेटे से भोसड़ी चुसवाएगी वो हरामन”, प्यार से गाली देते हुए वो बोली ।

“अब मुझे चोदने दो ना बाई”, मैने आग्रह किया । लौड़ा कसकर तन्नाया था और मुझसे रहा नहीं जा रहा था ।

“आज नहीं बेटे, अभी मैं चूस लेती हूँ. चुदवाऊंगी कल घोटू के सामने… पर आज रात मैं तेरे साथ सोऊंगी…. रात भर मज़ा करेंगे” ।

“घोटू आज नहीं आएगा बाई?” मैने पूछा । मुझे निराशा भी हुई थी कि घोटू का लौड़ा चूसने का मौका अब कल ही मिलेगा । खुशी भी थी कि झुमरी के साथ अकेले मज़े करूँगा । घोटू का लौड़ा आज लेने से बच गया इससे भी एक राहत सी लग रही थी, नहीं तो वो ज़रूर मेरी मार लेता ।

“आज उसे काम है मुन्ना. कल से वो भी हमारे साथ सोएगा, जब तक तेरी माँ ठीक नहीं हो जाती… अब आ, मुझे लौड़ा दे अपना”, झुमरी बोली

मुझे पास खींचकर उसने मेरा लौड़ा मुँह में लिया और दो मिनट में चूस कर झाड़ दिया । मुझे बहुत मज़ा आया । झुमरी के चूसने का ढंग अलग था पर घोटू के चूसने का जादू कुछ और ही था । झड़ कर मैं सुस्ताने लगा । होंठो पर जीभ फेरती हुई झुमरी बोली, “अब आराम कर… मैं खाना बनाती हूँ… पर पहले जाकर मालकिन का दूध पी आऊँ… उनकी चूचियां भर कर सनसना रही होंगीं” ।

“मैं भी आऊँ माँ का दूध पीने?” मैने उत्साह से पूछा ।

“नहीं, इन माहवारी के दिनों में वो चिडचिडी हो जाती है… मुझे छोड़ कर किसी को पास नहीं आने देती, घोटू को भी नहीं”, कहकर झुमरी चली गयी ।

मैं पड़ा पड़ा रात के बारे मे सोचने लगा । रात को सब सॉफ सफाई करके झुमरी मेरे कमरे में आई तो मैं नंगा पड़ा पड़ा लौड़ा मुठिया रहा था ।

“मुट्ठ मार रहा है शैतान? अब इस घर में कभी मुट्ठ मारी तो बहुत मारूँगी…. जब भी लौड़ा खड़ा हो, मेरे पास चले आना”, झुमरी ने कपड़े उतारे और मुझे लेकर पलंग पर लेट गयी । मेरा सिर अपनी भोसड़ी में खींचते हुए बोली, “अब पहले चूस ले मेरी भोसड़ी, तू बहुत अच्छा चूसता है…. आज मन भर कर चुसावाऊंगी…. दो घंटे कैसे बीत गये पता ही नहीं चला”

झुमरी ने लगातार मुझसे भोसड़ी चुसवाई, मुम्मे दबवाए और मुझसे अपने चूचुक चुसवाए । उस रात उसने कटोरी भर भोसड़ी का रस मुझे पिलाया होगा । अख़िर मैं तडपने लगा । लौड़ा अब ऐसा उछल रहा था कि मैं पागल हुआ जा रहा था । मेरी हालत देख कर वो बोली , “चल अब तुझे इनाम देती हूँ…. गांड मारेगा मेरी? मैं खुशी से उछल पड़ा ।

“बाई, मक्खन लाऊँ? तुम्हारी गान्ड चिकनी करने को?”

झुमरी झिल्लाई, “तू इधर आ, बड़ा आया है मक्खन वाला …. मक्खन लगेगा कल जब घोटू आएगा…. मैं घोटू का लेती हूँ गान्ड में, तेरी प्यारी मिर्ची तो ऐसे ही चली जाएगी…. अब आ और मैं कहती हूँ वैसे कर…. मुझ पर चढ और मेरी भोसड़ी में लौड़ा डाल…. छोड़ दो मिनिट…. झडना नहीं… नहीं तो मार मारूँगी”

मैं खुशी खुशी झुमरी पर चढा और उसकी भोसड़ी में लौड़ा डाल दिया । तपते गीले उस कुएँ में वो ऐसा समाया कि पता ही नहीं चला । झुमरी ने मुझे छाती से चिपटा लिया और मेरे मुँह में चूची ठूंस दी । मैं झुमरी की चूची चूसता हुआ चोदने लगा । भोसड़ी ढीली थी फिर भी मज़ा आ रहा था । झुमरी ने एक उंगली अपनी भोसड़ी के पानी से गीली की और मेरी गान्ड में डाल दी । मैं चिंहूक उठा ।

“क्या कर रही हो बाई? दुखता है!”

“अरे एक उंगली में तू कसमसा गया? फिर कल तेरा क्या हाल होगा लल्ला? इस गान्ड में तो अभी क्या क्या घुसने वाला है… तुझे मालूम नहीं” , झुमरी ने उलाहना दिया । मैं डर से सकपका गया । दो मिनिट बाद झुमरी ने मुझे उठने को कहा । मैं उठ कर बैठ गया । झुमरी पलट कर ऑंधी लेट गयी ।

अपनी उंगली पर अपनी भोसड़ी का पानी लेकर वो अपनी ही गान्ड में चुपडते हुए बोली, “देख क्या रहा है? मेरी गान्ड गीली कर ऐसे ही” । मैने अपनी उंगलियों में झुमरी की भोसड़ी का रस लेकर उसकी गान्ड में चुपडना चालू कर दिया । झुमरी की गान्ड मस्त थी, बहुत तंग नहीं थी फिर भी उसकी गान्ड का छल्ला मेरी उंगली को पक पक करके पकड़ रहा था ।

“अब चढ जा इसके पहले कि रस सूख जाए” , झुमरी के कहने पर मैं उस पर चढ कर अपना लौड़ा उसकी गान्ड में पेलने लगा । सट से एक बार में पूरा लौड़ा अंदर हो गया । झुमरी ने मेरे लौड़े को गान्ड में जकड़ लिया और मुझे बोली , “अब मार राजा, जितना मन चाहे मार” । झुमरी पर लेट कर मैं उसकी गान्ड मारने लगा ।

“हाथ मेरे नीचे डाल और मेरी चूचियाँ दबा” झुमरी बोली । उसकी चूचियाँ दबाते दबाते मैं कस कर उसकी गान्ड चोदने लगा । आराम से मेरा लौड़ा उसकी गान्ड में अंदर बाहर हो रहा था । झुमरी बीच बीच में उसे जकड़ लेती थी जिससे मेरा मज़ा दूगना हो जाता था । मैं मज़े से सिसक उठा ।

झुमरी बोली, “मज़ा आया ना मुन्ना? अरे अब मरवा मरवा कर ढीली हो गयी है मेरी गान्ड, नहीं तो ऐसी तंग थी कि लौड़ा घुसता नहीं था…. अब तुझे असली मज़ा आएगा अपनी माँ की कुँवारी गान्ड मारने में. बस तीन चार दिन रुक जा, फिर तुझे तेरी माँ पर चड़वा देती हूँ मैं”

आख़िर मैं झड़ा और सुस्ताने लगा । झुमरी ने मुझे हटाकर नीचे लिटाया और मेरे ऊपर चढ कर अपनी भोसड़ी मेरे मुँह पर देकर बैठ गयी ।

“अब चूस राजा, तुझसे मरवाकर फिर भोसड़ी पसीज रही है मेरी… रात भर चूस…. मुझे खुश किया तो फिर एक बार और मारने दूँगी अपनी गान्ड” । रात भर हमारी रति चलती रही । झुमरी ने मुझसे खूब भोसड़ी पूजा करवाई । बीच में थक कर मैं सो गया पर झुमरी ने रात में कई बार मुझे जगाया और भोसड़ी चुसवाई । आखरी बार सुबह सुबह मुझे उठ कर उसने भोसड़ी चुसवा ली और फिर इनाम में मुझे अपनी गान्ड एक बार मारने दी । उसकी गान्ड मार कर में जो सोया वो स्कूल जाने के समय ही उठा ।

जल्दी जल्दी तैयार होकर मैं घोटू के साथ निकला । स्कूल का समय हो गया था । आज घोटू बीच में जंगल में नहीं रुका, सीधा मुझे स्कूल ले जाने लगा । उसका लौड़ा वैसे ज़ोर से खड़ा था । मुझे साइकल के डंडे पर बैठकर अपनी पीठ पर उसका दबाव महसूस हो रहा था । उसे चूसने को मैं लालायित हो उठा था । मैं ज़रा निराश होकर घोटू से बोला, “घोटू भैया, आज नहीं रुकोगे जंगल में?”

घोटू मुझे चूम कर बोला, “नहीं मुन्ना, देर हो जाएगी, और वैसे भी आज मैं अब सीधा रात को मिलूँगा तुझसे, अपनी माँ के साथ…. तब मज़ा करेंगे…. मालूम है, मैं सुबह से नहीं झड़ा हूँ…. माँ को भी नहीं चोदा… तेरे लिए अपना लौड़ा बचा कर रखा है”

शाम को जब मैं घर पहूंचा तो झुमरी माँ के कमरे से मुँह पोंछते हुए निकल रही थी । शायद माँ का दूध पी कर आई थी । मुझे बोली, “मुन्ना, बहुत दूध देती है तेरी माँ, अब तीन चार दिन सिर्फ़ मैं ही पीती हूँ, मेरा पेट भर जाता है, खाना खाने की भी ज़रूरत नहीं लगती …. जब तू चोदने लगेगा तो मैं शर्तिया कहती हूँ, हम तीनों के लायक दूध देगी ये दुधारू गैया…. बेच भी सकते हैं, इतना दूध निकलेगा देखना” । और हंसने लगी । सुबह से मैं झड़ा नहीं था । झुमरी से चिपट कर उसके पेट पर लौड़ा रगडते हुए बोला, “बाई, चलो, चोदेंगे”, झुमरी हंसने लगी, “आज अब रात को मेरे राजा…. जल्दी खाना बनाती हूँ… आज घोटू भी रहेगा… तब तक सब्र कर”

बड़ी मुश्किल से ये तीन चार घंटे कटे । मैं मुट्ठ ना माँरून इसलिए झुमरी ने मुझे अपने सामने ही रसोई में बिठा कर रखा और बोली कि वहीं पढ़ाई करूँ ।

 

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