Mummy Ke Petticoat Ka Diwana Beta

रजनी एक बहुत ही सुंदर 45 साल की औरत थी जिसका पति आज से 22 साल पहले शहर गया पैसे कमाने लेकिन आज तक वापस नही लौटा । अपने छोटे से BETA को लेकर वो हर छह आठ महीने बाद शहर जाती अपने पति को ढूंढने लेकिन उसकी कोई खबर ना मिलती लगातार सात आठ सालो तक उसने अपने पति को ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार उसे निराश ही लौटना पड़ा था अब उसने सबकुछ भाग्य पर छोड दिया था सारा गाॅव उसे ताने देता था “अब तो सिंदूर लगाना छोड दे नही लौटेगा तेरा पति।” लेकिन रजनी को विश्वास था की उसका पति जहा भी है सही सलामत है Maa Sax – Mummy Chudi

अब उसके पति को गए 22 साल हो चुके थे रजनी की उम्र भी ढल चुकी थी लेकिन शरीर की सुंदरता और बनावट अब वैसी की वैसी ही थी और हो भी क्यू ना ये वही रजनी थी जो अपने पति से चुदवाने मे भी शर्माती थी ऑखे तक नही मिला पाती थी उससे ।रजनी का पति विरेंद्र अपनी पत्नी को बहुत बेदर्द तरीके से चोदता था जो कि रजनी को स्वर्ग की अनुभूति करवाता था लेकिन रजनी अबतक अपने पति से खुल नही पाई थी शायद बेचारी के भाग्य मे पति का साथ लिखा ही नही था तभी तो भयी JAWANI मे बेचारी का पति लापता हो गया उसकी गोद मे नन्हा सा फूल जैसा BETA देकर जिसे रजनी ने बडे ही जतन से पाला था । अपने पति के प्यार की निशानी को उसने बडे ही सम्मान के साथ संस्कारो के साथ बडा किया था ना ही उसने अपने चरित्र पर कोई दाग लगने दिया ना ही अपने BETA राजू पर कोई ऑच आने दी ।
पति की पुश्तैनी जमीन को उसने अपनी पडोसन दुलारी को KHETI करने के लिए दे दिया था जितनी भी फसल होती वो आधी फसल दूलारी से ले लिया करती । और दो भैंस दो गाय पालकर किसीतरह अपना जीवन व्यतीत कर रही थी सभी सूखो का त्याग कर चूकी थी उसके लिए उसका BETA उसकी जिंदगी से भी बढ़कर था जिसके लिए वो कुछ भी कर सकती थी ।

MAA SAX

दुलारी और रजनी के हालात बिल्कुल एक से थे । रजनी का पति लापता हो चुका था भरी JAWANI मे और बेचारी दुलारी भरी JAWANI मे ही विधवा हो चुकी थी ।इसलिए दोनो एक दूसरे के हमदर्द थी और दोनो मे खूब बनती भी थी, दूलारी के दो BETA थे बडा BETA कल्लू और छोटा BETA मल्लू , दोनो BETA रजनी के दिए हुए खेत मे काम करते थे बचपन से ही खेत मे काम करते करते दोनो मे बैल की तरह ताकत थी , दूलारी 50 साल की जरूर थी लेकिन खेत मे काम करने की वजह से दुलारी के शरीर की बनावट इतनी कामुक थी की क्या जवान लौंडे और क्या बुढे मर्द सभी दूलारी को CHODNE की कल्पना करते रस ही ऐसा था दूलारी के शरीर मे कि जिसे हर कोई मुॅह लगाना चाहे।

दूलारी का BETA कल्लू अपनी माँ के शरीर के शरीर को घूरने से खुद को नही रोक पाता था रोज वो अपनी माँ के शरीर के अंदर झाँकने की कोशिश करता और बहुत हद तक कामयाब भी हो जाता क्यूकी दुलारी अक्सर काम करते हुए या घर मे अपने कपडो को लेकर निश्चिन्त रहती थी उसे कभी ऐसा महसूस ही नही हुआ की उसका बडा BETA कल्लू ही उसके शरीर पर गिद्ध की तरह नजर गडाए हुए जिसे सिर्फ एक मौके की तलाश है मौका मिलते ही वो सारी मर्यादा पार कर जाएगा ।
(सुबह का समय)
रजनी -दूलारी बहन दूध लाई हू (रजनी की गाय का दूध दूलारी के घर रोज सुबह और शाम को आता था )
मल्लू -अरे KAKI आप आज दूध लेकर क्यू आई राजू क्यू नही आया या आपने मुझे या मल्लू को आवाज क्यू नही दी ।
रजनी- अरे राजू को तो मैने ही सिर पर चढा रखा है कितना सुस्त होता जा रहा ! सो रहा है अबतक इसलिए मुझे ही आना पडा । तू बता तेरी अम्मा दिखाई नही दे रही ?
मल्लू – KAKI , वो अम्मा कल्लू भईया के साथ सवेरे ही चली गई ।
(मल्लू बहुत ही भोला था )
रजनी- चली गई? कहा चली गई? पूरी बात बता नासपिटे
मल्लू – KAKI वो बिजली आई है ना रात मे तो दिन उगने से पहले ही अम्मा और भइया खेतो मे सिंचाई करने के लिए गए है सरकारी ट्यूबवेल है बिजली चली गई तो सिंचाई रूक जाएगी
रजनी-अच्छा अच्छा ठीक है ये दूध ले और बर्तन खाली कर के मेरे घर पहुंचा देना और हा अपनी अम्मा से कहना रजनी KAKI आई थी
मल्लू – ठीक है KAKI बोल दूंगा
(रजनी अपने घर की ओर चली जाती है )
(यहा दूसरी तरफ दूलारी और उसका बडा BETA धान के खेतो की तरफ तेजी से जा रहे थे क्यूकी बिजली कभी भी जा सकती थी और खेतो मे सिंचाई जरूरी थी खेत एकदम करीब आई ही चुका था तभी अचानक …..)
दूलारी – तू चल BETA मै 15 मिनट मे आती हू
कल्लू – क्या हुआ अम्मा? बिजली चली जाएगी तो दिक्कत हो जाएगी आज भी फसलो को पानी नही मिलेगा
दूलारी -BETA कह तो रही हू तू चल मै आती हू 15 मिनट मे कुछ काम है
( कल्लू मन ही मन समझ गया की उसकी माँ को शौच जाना है और ये सोचते ही उसका LUND सिर उठाने लगा आज जो महीनो से वो देखना चाहता था आज उसके पास मौका था देखना का जिसे वो खोना नही चाहता था)
कल्लू – ठीक है अम्मा मै चलता हू जल्दी से आ जाना
(इतना कहकर वो आगे बढ गया कुछ देर आगे बढने के बाद रूक गया और पीछे मुडकर देखने लगा तो उसने देखा की उसकी माँ झाडियो की तरफ बढ रही है यह देखकर उसकी ऑखे चमक उठी और वो पैर दबाकर उल्टे पाॅव पीछे आकर उन्ही झाडियो के करीब पेड की ओट मे छिप गया जिन झाडियो की तरफ उसकी माँ गई थी, जैसे ही उसने अपनी माँ की तरफ देखा वो एकदम सन्न रह गया उसकी माँ अपनी घाघरा उठाकर अपनी बडे बडे चौडे चूतड फैलाकर शौच के लिए बैठने जा रही थी
अपनी माँ की नंगी गांडड को पहली बार देखकर कल्लू का LUND एकदम से तनकर खडा हो गया जैसे मानो अभी फट जाए कल्लू से रहा नही गया वो अपनी माँ की नंगी चूतडो को घूरे जा रहा था और अपने LUND को धोती से बाहर निकाल कर मसलने लगा गांड का भूरा छेद उसके ऑखो के बहुत करीब था और इतना देखते ही उसका हाथ उसके LUND पर तेजी से चलने लगा और दो चार बात तेजी से हिलाते ही उसके LUND ने एक तेज पिचकारी छोड दी और पानी छोडते ही उसके मुॅह से तेज सिसकारी निकर गई।)
कल्लू – आहहहहहहह दूलारी…………
(आवाज इतनी तेज थी की दूलारी के भी कानो मे पडी अपना नाम इतने मादक स्वर मे सुनते ही दूलारी तूरंत खडी हो गई और चारो तरफ देखने लगी तबतक कल्लू पेड की ओट मे छिप चुका था उसके दिल की धड़कन बढ गई थी वो बहुत घबरा गया कि कही उसकी माँ उसे देख ना ले !)

कल्लू बहुत ज्यादा डर गया था वो सोचने लगा की कही उसकी माँ ने उसे देख लिया तो क्या सोचेगी इसलिए किसी तरह अपनी माँ से नजरे बचाता हुआ वो वहा से भाग खडा हुआ और सीधे आकर धान के खेतो पर आकर रूका
वही दूलारी मन ही मन सोच रही थी की कोई तो जरूर था जो मुझे छिपकर शौच करते हुए देख रहा था कौन हो सकता है यही सवाल बार बार उसके मन मे आ रहा था फिर वो बिना अपनी GAND धोए ही ट्यूबवेल की तरफ बढ चली और जाते ही ट्यूबवेल पर उसने अपनी GAND धोई और अपने BETA को आवाज देकर पुकारने लगी

MUMMY CHUDI

दूलारी- कल्लू ………ओ कल्लू ………कहा रह गया BETA? जल्दी फावड़ा लेकर आ और नाली बना अपनी खेतो की तरफ वरना बिजली का क्या भरोसा कब चली जाए फसलो की सिंचाई बहुत जरूरी है BETA
कल्लू – (अपनी माँ की तरफ आते हुए )कहा रह गई थी अम्मा? कबसे इंतजार कर रहा था ।
दूलारी – अरे करमजले इंतजार करने की बजाय खेतो की तरफ नाली बना दिया होता बैल की तरह हो गया है पता नही कहा ध्यान रहता है जरा भी अक्ल नही लगाता चल जल्दी नाली बना
(अपनी माँ से इस तरह डाट सुनने पर एक दम चिढचिढा हो जाता है )
कल्लू – बनाता हू अम्मा इसतरह डाटा मत करो आप की राह देख रहा था अचानक कहा चली गई थी
दूलारी – (थोडा नरम होते हुए ) अरे BETA तू नही जानता इस गाउँ कितने ठरकी है सब मुझ पचास साल की बुढ़िया को भी छिपछिपकर देखते है सब
कल्लू – क्या मतलब अम्मा? क्या हुआ क्या देखा कौन देखा ?
दूलारी -जाने दे मेरे लाल तू नही समझेगा चल जल्दी काम कर
( कल्लू मन ही मन सारा सीन याद करके खुश हो रहा था कि कैसे आज उसने पहली बार इतनी बड़ी और SEXY GAND देख ली वो भी अपनी खुदकी माँ की इतना सोचते ही उसकी धोती मे फिर हरकत होने लगी , तब तक बिजली चली गई और दूलारी गुस्से से लाल हो गई )
दूलारी – करमजले कबसे जगा रही थी चल खेतो पर चलना है घोडे बेचकर सोता रहा दूसरा है तो वो भी तेरी संगत मे सुस्त रहता है कब सुधरोगो रे दोनो कर्म फूट गए मेरे …….. अगर समय से सिंचाई नही हुई तो धूप से फसल जल जाएगी और ये बात याद है ना फसल बर्बाद होगी तो रजनी बहन दूसरे किसी को खेत दे देगी BETA समझता क्यू नही ?
कल्लू – अम्मा इसमे मेरा क्या दोष है बिजली चली गई तो अब कल रात मे 3 बजे ही उठकर आना पडेगा तभी फसल की सिंचाई हो पाएगी वर्ना नही हो पाएगी
दूलारी – तू ठीक कह रहा है BETA ….मैने खामखा तुझे इतना डाट दिया माफ करदे
( इतना कहते ही दूलारी ने अपने BETA कल्लू को अपने गले से लगा लिया। ये एक माँ का प्यार था अपने BETA के लिए लेकिन कल्लू अपनी अम्मा के शरीर को उसकी चूचियो को महसूस कर के अपना LUND खडा कर रहा था और अपनी अम्मा की पीठ सहलाते हुए धीरे धीर अपना हाथ चूतडो की तरफ बढ़ाने लगा तभी
दूलारी – चल घर चल BETA बहुत काम है कम से कम खाना तो आज जल्दी बना लू
(इतना कहकर दूलारी अपने BETA से अलग हो जाती है और कल्लू फावड़ा उठाकर अपनी माँ के साथ घर की तरफ बढ चलता है।)

कल्लू अपनी मा के साथ घर को चल देता है ।
उधर दूसरी तरफ रजनी घर आकर सीधे अपने कमरे मे जाती है और अपनी साडी उतार देती है उसकी आदत ही थी वो घर मे सिर्फ ब्लाउज और PETTICOAT पहनती थी ।
राजू अभी भी सो रहा था, रजनी रसोई मे जाती है और चाय बनाकर राजू को चाय देने जाती है लेकिन राजू के कमरे मे पहुंचकर देखती है कि उसका BETA अबतकर चद्दर तान कर सो रहा है
रजनी उसे डाटती है
राजू- कबतक सोता रहेगा ….😠 तू उन कल्लू मल्लू के साथ रह कर बिगड गया है सारी उन्ही की आदते तुझमे आ रही है कल्लू और मल्लू के साथ दिखा ना तो तेरी खैर नही
(रजनी ने बडे ही अनुशान से पाला था राजू को MAAके प्यार के साथ साथ कभी बाप की कमी महसूस नही होने दी थी )
राजू- सोने दो ना MAA…. ( अंगड़ाई लेते हुए ) कितना अच्छा सपना देख रहा था मेरा सपना आपने बीच मे ही काट दिया
रजनी -उठता है या पीनी से भरी बाल्टी डाल दू बिस्तर पर 😠….?
(राजू हडबडा कर उठता है और तूरंत खडा हो जाता है अपनी MAAकी डर से लेकिन उसे इस बात का जरा भी ध्यान नही था कि अभी जो वो सपने मे दूलारी KAKI की गांड मार रहा था जिसवजह से अब भी उसका LUND लूंगी मे तनकर खडा है। वैसे तो राजू अभी तक रजनी के बारे मे कभी गलत सोचा था जबकि रजनी हमेशा PETTICOAT ब्लाउज पहनकर ही घर मे रहती थी ।)
राजू के इस तरह अचानक एकदम से उठकर खडे होने से रजनी को हसी आई लेकिन उसने अपनी हॅसी उजागर नही की वह अपने BETA के सामने बहुत गंभीर रहती थी हालांकि उसकी नजर भी राजू के तने हुए LUND पर गई लेकिन उसने नजरअंदाज किया ।
रजनी- अरे BETA इतनी देर तक कोई सोता है भला सूधर जा
राजू – क्या करू मम्मी रात मे देर से सोया था
रजनी – कितनी बार मना कर चुकी उस कल्लू के साथ मत घूमाकर वो तो खुद बिगडा हुआ है और तुझे भी बिगाड़ देगा
राजू – ठीक है मम्मी ।
इतना कहकर राजू फ्रेश होने चला जाता है और रजनी रसोई मे खाना बनाने चली जाती है
उधर दूसरी तरफ दूलारी और कल्लू घर पहुचते है
दूलारी – मल्लू … ..ओ मल्लू?
मल्लू – हा अम्मा
दूलारी – BETA तुझसे बोली थी रजनी बहन के यहा से गोबर लाकल सारा एक जगह इकट्ठा कर के रखदेना उपले बनाने है और तूने वो काम भी ना किया
मल्लू- मै करने ही वाला था अम्मा लेकिन तबतक रजनी KAKI आ गई थी दूध लेकर और आपको पूछ रही थी
दूलारी – क्या कहा रजनी बहन ने
मल्लू – कुछ नही अम्मा मै भूल गया
(दोस्तो मल्लू थोडा भोला और बहुत भुल्लकड था )
दूलारी – अच्छा अच्छा चल ठीक है BETA चल के अब जरा सा गोबर एक जगह इकट्ठा कर दे ……..और तू कल्लू!
कल्लू – हा अम्मा
दूलारी – तू अभी मेरे साथ चलेगा और लकड़ीया काटेगा घर के पिछे वाला पेड सूख गया है BETA
कल्लू – ठीक है अम्मा चलिए
(मल्लू रजनी की घर की तरफ गोबर लेने के लिए चला जाता है और दूलारी और मल्लू घर के पीछे सूखे हुए पेड को काटने के लिए जाते है )
कल्लू – अम्मा ये पेड अभी सूखा नही है इसमे हरियाली बाकी है
दूलारी – सूख गया है BETA देख नही रहा इसकी डालियो पर एक भी पत्ता ना है चढ जा BETA कुल्हाड़ी मै थमाती हू
(कल्लू पेड पर चढ जाता है और कुल्हाड़ी थामने के लिए जैसे ही हाथ नीचे बढाता है ……………..धडाम की आवाज के साथ पेड की टहनी लेकर नीचे गिरता है )
दूलारी – कल्लू ………. (चिल्लाकर ) BETA कही चोट तो नही लगी ना मेरा राजा BETA संभालकर चढना था ना
कल्लू -अरे अम्मा चोट नही लगी (इतना कहते ही जैसे ही वो उठने की कोशिश करता है दर्द से चिल्ला पड़ता है?)
आहहहहहहहहहहह……….अम्मा
दूलारी – क्या हुआ BETA
कल्लू – मोच आ गई है खडा नही हुआ जा रहा घर ले चलो लकडी किसी और दिन काट ली जाएगी
(रजनी आगे बढकर उसके माथे को चुमती है और उसका एक हाथ अपने कंधे पर रखकर उसे उठाने की कोशिश करती है लेकिन कल्लू नही उठ पाता कल्लू का शरीर भारी था रजनी दो तीन बार और प्रयास करती है लेकिन नही उठा पाती और खुद ही BETA को उठाने के चक्कर मे अचानक ही अपने BETA की गोद मे जा गिरती है कल्लू अपनी MAA को अपनी गोद मे पाकर उसे अपनी बाहो से घेरकर पकड लेती है और दूलारी को उठने नही देता )
कल्लू – अम्मा बहुत दर्द हो रहा है मोच के कारण
दूलारी – उसकी गोद मे बैठे हुए कहती है BETA चल मै तेल से रगड दूंगी दर्द खत्म हो जाएगा
(कल्लू का LUND इतना खडा हो चुका था की दूलारी उसे अपनी GAND मे महसूस कर सके , दूलारी की एक सिसकारी निकल जाती है )
दूलारी -आहहहहह……..BETA तुझे दर्द हो रहा है और मै बच्चो की तरह तेरी गोद मे जमीन पर बैठी हू चल घर चल BETA
कल्लू -क्या हुआ अम्मा (LUND पूरी तरह कडकनाथ बनकर दूलारी के गांड गुफा पर ठोकर मार रहा था और दूलारी कई अरसो बाद किसी का LUND महसूस कर रही थी और उसे भी अच्छा लग रहा था वो भी अपने BETA की गोद मे ज्यादा जोर देकर बैठ रही थी )
दूलारी – कुछ नही …..चल घर चल BETA (इतना कहकर उठजाती है और उसे महसूस होता है कि आगे उसका घाघरा गीला हो चुका था आज बरसो बाद अपने BETA के LUND को महसूस कर के दूलारी की BUR गीली हो चुकी थी )
कल्लू – कहराते हुए दूलारी का हाथ पकडकर उठ जाता है और दूलारी के कंधे मे बाहे डालकर घर आ जाता है ।
दूलारी मन ही मन अपने आप को कोस रही थी की क्यू उसने अपने BETA के LUND को महसूस किया
दूलारी -(मन मे ) छी मै क्या सोच रही हू अपने ही BETA के बारे मे ……लेकिन कल्लू का LUND बहुत मोटा और लंबा मालूम पड़ता है ……. छी छी ये मै क्या सोच रही हू आखिर इस निगोडे ने अंजाने मे ही मेरी दबी हुई आग को हवा दे ही कल्लू के बाबू जी को गए इतने बरस हो गए कभी मुझे ऐसा महसूस नही हुआ लेकिन आज अपने ही BETA के स्पर्श से मेरी BUR ने पानी छोड दिया (मन मे इसी प्रकार के द्वंद्व लेकर दूलारी कल्लू को लेकर घर आ जाती है ।)

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