Pujyaniya Maa Hindi Incest Story

ये कहानी मोहन नाम के लड़के की है जो अपनी माँ बाप और भाई के साथ उत्तर प्रदेश के छोटे शहर में रहता था। मोहन 12th का छात्र था और उसका छोटा भाई सोहन अभी १२ मैं जाने को था पिताजी दिल्ली में नौकरी करते थे जो कि हफ्ते में एक दिन के लिए जरूर घर आते थे मां एक घरेलू महिला थी, मां की उम्र 35 साल की और पिताजी की उम्र 42 साल मां का नाम कविता और पिता का नाम राकेश था राकेश कविता से बहुत प्यार करता था और करे भी क्यों ना कविता की ही इतनी अच्छी घर में सबका ख्याल रखती थी बहुत अच्छा खाना बनाती थी हमेशा सबको इज्जत देती थी और इतनी सुंदर क्यों इस पूरे शहर में उसकी खूबसूरती के चर्चे होते थे और संस्कारी इतनी कि हर संडे को पिताजी के साथ वह मंदिर जरूर जाती थी Pujyaniya Maa Hindi Incest Story पूजनीय माँ ।
और फिर हर संडे की तरह इस संडे को भी कविता अपने पति और बेटों के साथ मंदिर गई उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी माथे पर बिंदी मांग में सिंदूर मंगलसूत्र और हाथ में घर से बनाई हुई मिठाई दो कि उसने प्रसाद के लिए बनाई थी मंदिर में ज्यादा भीड़ नहीं थी। उन्होंने पुजारी को प्रसाद चढ़ाने को दे दिया और आँख बंद कर के भगवान के सामने खड़ी हो गयी।सब लोग भी हाथ जोड़ कर आंख बंद कर के खड़े हो गए।
तब अचानक मच्छर काटने की वजह से मोहन ने अपनी आंख खोली तो मैंने देखा कि पुजारी उसकी माँ की नाभि को घूर रहा था। कविता ज्यादतर अपनी साड़ी नाभि के नीचे से बांधती थी। कविता की नाभि बहुत गोरी चिकनी और मांसल थी जिसकी वजह से न चाहते हुए भी लोंगो की निगाह कविता की नाभि में ठहर जाती थी। मोहन को ये अच्छा नही लगा। फिर सबने आंखे खोली और फूल चढ़ाने के लिए जैसे ही कविता झुकी उसका पल्लू थोड़ा सरक गया और उसके लाल कसे हुए बड़े गले के ब्लाउज से गोरे तने हुए स्तन जिसके बीच मे मंगलसूत्र लटक रहा था और पुजारी अपनी निगाह उस पर से हटा नही पा रहा था।मोहन को ये बहुत बुरा लगा। पर वो करता भी क्या।
फिर सबके घर आने के बाद कविता ने सबको अच्छा लंच कराया।
संडे को ही रात को राकेश दिल्ली चला गया अगले दिन सुबह मोहन रोज की तरह कॉलेज चला गया उस दिन उसका रिजल्ट आने वाला था 12वीं के रिजल्ट में बहुत अच्छे नंबर आ गए फिर मोहन खुशी खुशी घर की तरफ चल दिया
जब वह घर पहुंचा तुम उसका छोटा भाई स्कूल में था और मां घर में पूजा कर रही थी मैंने देखा मैं भगवान से मेरे अच्छे नंबर के लिए प्रार्थना कर रही थी मां उस वक्त नहा कर निकली थी और उन्होंने पीले रंग का पेटिकोट और ब्लाउज पहन रखा था उनके बाल गीले थे
उन्होंने जैसे ही मोहन को देखा झट से पूछा कैसे नंबर मिले बेटा मैंने बोला मां मैंने अपने स्कूल में टॉप किया है मैं खुशी से मुझे गले लगा लिया फिर मैंने कहा मां आप मैं किस स्कूल में एडमिशन लूंगा यहां तो कोई अच्छा स्कूल भी नहीं है मां बोली बेटा मोहन कल ही मैंने तुम्हारे पिताजी से बात की थी उन्होंने तुम्हारे लिए दिल्ली में बहुत अच्छा स्कूल देखा है और अब तुम दिल्ली में पापा के साथ रहकर ही पढ़ना फिर मोहन बोला मां तेरी यहां पर तुम अकेली रह जाओगी इस पर मैंने कहा नहीं बेटा तुम्हारा छोटा भाई सोहन है ना वैसे भी तुम हफ्ते में एक बार पापा के साथ आ जाया करना और मोहन खुशी-खुशी दिल्ली जाने के लिए राजी हो गया
और अगले हफ्ते अपने पापा के साथ दिल्ली के स्कूल में एडमिशन लेने के लिए चला गया वह बेचारा सीधा-साधा लड़का दिल्ली के लड़कों के बारे में कुछ नहीं जानता था उसकी कुछ लोगों से दोस्ती भी हुई पर सब ज्यादातर उसका मजाक ही बनाते थे क्योंकि मोहन ना तो सिगरेट पीता था ना ही बियर और ना ही लड़की देखा करता था फिर भी साथ रहते-रहते 10 15 दिन में उसकी दोस्ती अपने क्लास के कुछ लड़कों से हो गई एक लड़का खालिद जो कि उसके शहर के पास ही रहता था वह उसकी सीट मैं ही बैठता था वह थोड़ा बिगड़ा हुआ था सिगरेट शराब नहीं पीता था पर वह लड़कियों का बहुत शौकीन था यह तो सिर्फ लड़कों का स्कूल था इसलिए कोई लड़की को मिलती नहीं थी इसलिए खालिद क्लास में पढ़ाने वाली महिला टीचर को देख कर ही काम चलाता था एक दिन उसने मोहन से कहा “यार मुझे इस टीचर की चूची बहुत पसंद है देख इतनी टाइट है लगता है ब्रा फाड़ कर बाहर निकल आएगी “मोहन को यह सुनकर बहुत अजीब सा लगा पर उसकी निगाह भी टीचर की चूची पर लग गई पर उसने कैसे भी अपने मन को कंट्रोल कर के पढ़ाई पर ध्यान लगाया फिर इंटरवल के बाद एक दूसरी मैडम का क्लास था खालिद उसको देखकर बोला यार मोहन इस मैडम की नाभि को देखना बहुत मस्त है यह सुनकर मोहन को अजीब सा लगा पर उसने उस मैडम की नाभि को बार बार देखा शायद मोहन को अच्छा लगने लगा था और खालिद मोहन को देख कर हंस रहा था
खालिद -मजा नहीं आया क्या
मोहन शांत रहा
खालिद -रुक तुझको छुट्टी के बाद कुछ बहुत बढ़िया दिखाऊंगा मजा आ जाएगा
मोहन फिर भी शांत रहा छुट्टी होने पर खालिद मोहन को ग्राउंड में ले गया और वहां अपने फोन पर पोर्न मूवीस दिखाने लगा मोहन ने कहा यह सब देख कर पढ़ाई खराब हो जाएगी और हमारा कैरियर भी
खालिद -यार यह सिर्फ मजा लेने के लिए है थोड़ा मनोरंजन भी होना चाहिए ऐसा कर अकेले में देखा कर बहुत मजा आएगा उसके बाद मन लगाकर पढ़ाई करना
मोहन ने कोई जवाब नहीं दिया घर जाकर उसके दिमाग में पॉर्न मूवीस मैं दिखने वाली लड़कियों के बदन घूमने लगे मैं जब दोपहर को घर पहुंचा उस वक्त उसके पिताजी घर पर नहीं थे उसने अपने मोबाइल में पॉर्न मूवी चालू कर ली अचानक ही उसका हाथ अपनी अंडरवियर के ऊपर पहुंच गया मोहन का लंड पहली बार इतना ज्यादा टाइट हुआ था उसने अपनी अंडरवियर के अंदर हाथ डालकर अपने लैंड को पकड़ लिया और पॉर्न मूवी देखकर हिलाने लगा उसको इतना मजा पहले कभी नहीं आया था और अपना लंड हिलाते हिलाते पता नहीं कब मोहन का वीर्य निकल गया उसको बहुत हल्का फील हो रहा था फिर उसने रात तक मन लगाकर पढ़ाई की अगले दिन जब खालिद से मिला
खालिद- क्यों भाई कल देखी तुमने मजा आया क्या
मोहन – हां
खालिद- अब रोज देखा कर चल जल्दी से क्लास में मैडम आने वाली होंगी उनकी चूची को ध्यान से देखना बहुत मस्त है
मोहन बस मुस्कुराता रहा और फिर साड़ी वाली मैडम का क्लास था
खालिद – नाभि देखना इसकी
मोहन -हां भाई जरूर मोहन अब मैडम की नाभि को घूर रहा था उसको बहुत अच्छा लग रहा था उसका लंड खड़ा हो रहा था मैडम की नाभि को देखकर उसके मन में पोर्न मूवीस की तरह मैडम को नंगी करके चोदने का मन होने लगा था
और मोहन सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर चुका था ।
अगले दिन जब मोहन कॉलेज पहुंचा तो
खालिद -क्यों भाई मजा आया कल पॉर्न मूवी देखकर
मोहन -हां भाई बहुत
फिर क्लास में चूची वाली मैडम आई उसको देख कर
खालिद -देख मोहन साली की चूची कितनी तनी हुई है मन कर रहा है कपड़े फाड़कर दोनों चूचियों को पकड़कर नोच नोच कर मसाज करो और मुंह लगाकर सूचियों का सारा दूध पी जाऊं
मोहन ने मुस्कुरा दिया फिर नाभि वाली मैडम का क्लास था। उसकी नाभि देख कर
खालिद -मोहन क्या मस्त नाभि है बिल्कुल चिकनी और गोरी मन कर रहा है साड़ी नहीं कर उतार कर नंगी कर दूँ मैडम नंगी होकर पढ़ाएगी तो कितना अच्छा लगेगा।
मोहन मैडम के नंगे बदन की कल्पना में खो गया और मोहन का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। छुट्टी के बाद 3:00 बजे घर पहुंचा और साइंस पढ़ने लगा 4:00 बजे खालिद का फोन आया
खालिद- क्या कर रहा है भाई
मोहन- पढ़ाई कर रहा हूं
खालिद -पॉर्न मूवी नहीं देखी आज
मोहन- नहीं खालिद यार तू एकदम पागल है अगर देख लेगा कुछ देर तो क्या बिगड़ जाएगा अच्छा बता तेरे पापा किस टाइम आते हैं
मोहन -रात को 9:00 बजे
खालिद -ठीक है मैं 5:00 बजे तेरे घर आऊंगा और हम लोग साथ में पॉर्न मूवीस देखेंगे
मोहन -ठीक है ।
खालिद ठीक 5:00 बजे मोहन के घर पहुंच गया
खालिद- क्या यार तू इतना शर्म आता क्यों है मजा नहीं आता क्या सोच अभी दोनों मैडम आकर हमारे सामने पूरी नंगी हो जाए तो कितना मजा आए ।
मोहन -हां यार ।
खालिद- यार तू सिर्फ हां या ना ही बोलता है अगर तुझे मेरी दोस्ती नहीं पसंद है तो मैं तुझसे बात नहीं किया करूंगा ।
मोहन -नहीं भाई मुझे थोड़ी शर्म आती है और अजीब सा भी लगता है मैंने कभी ऐसी बातें नहीं की ।
खालिद -तो फिर अब किया करना दोनों को ही मजा आएगा कोई एक ऐसा दोस्त भी होना चाहिए जिससे हम अपने मन की सब बातें शेयर कर सकें ।
मोहन -हां भाई खालिद तो बोल मैडम का तुझ को क्या क्या पसंद है ?
मोहन- मैडम के दूध ।
खालिद- दूध नहीं चूची बोल चूची।
मोहन -हां मैडम की चूची ।
खालिद -गुड और बता नाभि वाली मैडम का क्या पसंद है ।
मोहन -यार तू भी ना ।
खालिद -यार अब तो ना शर्मा देख तेरा लौड़ा भी खड़ा हो गया है ।
मोहन का लौड़ा खड़ा हो चुका था सेक्स उसके दिमाग पर चढ़ गया था ।खालिद- चल पोर्न मूवी देखते हैं ।
उन लोगों ने एक पोर्न मूवी चालू की
खालिद -देख कैसे लौड़ा चूस रही है सोचो हमारी मैडम आकर हम दोनों का लौड़ा ऐसे ही चूसे तो कितना मजा आए।
मोहन – हां भाई मजा आ जाएगा ।
खालिद – क्या करने में बोल।
मोहन -मैडम को अपना लौड़ा चुसवाने में।
अब मोहन का लोड़ा पूरी तरीके से तड़पने लगा था और भी अपना लंड पैंट के ऊपर से ही मसलने लगा।
खालिद -सोच मैडम की साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार कर ब्रा पैंटी में आ जाये तो ?
मोहन- उफ़्फ़
खालिद -मैडम की पैंटी में नाक घुसा कर सूंघेगा ।
मोहन – हाँ
खालिद -और मैडम तुम्हारा लौड़ा पकड़ कर चाटने लगी तो?
मोहन – मैं मैडम की पैंटी में जीभ डाल दूंगा।
खालिद -हिला न अपना लौड़ा बाहर निकाल कर ।
मोहन- नही !
खालिद – रुक
खालिद ने मोहन की पैंट सरका दी और फिर बोला !
खालिद- अब हिला।
मोहन शरमाया पर खालिद ने अपनी पैंट भी उतार दी अब दोनों अपना अपना लंड हिला रहे थे और पोर्न मूवी देख कर मैडम के बारे में गंदी बाते भी बोल रहे थे मोहन का लंड 5 इंच का था पर खालिद का 8 इंच का और बहुत ही मोटा था।दोनो बहुत स्पीड से हिला रहे थे ।

Pujyaniya Maa Hindi Incest Story

खालिद- मैडम की चूत आह आह !!
मोहन -मैडम मेरा चूसो आह आह आह
खालिद- साली रंडी की चूत चूस लूँगा ।
मोहन- मैं मैडम की चूत को पी जाऊंगा आह आ आह।
दोनो के ही लंड जवान और मजबूत थे बहुत कस कस के 30 मिनट तक हिलाने के बाद दोनों के वीर्य निकल गया फिर खालिद पहले बाथरूम जा कर अपना लौड़ा साफ किया । और आराम से बैठ गया फिर मोहन बाथरूम गया और बोला यार मैं अब नाहा कर आऊंगा तो मेरे मोबाइल में गेम खेल लो। खालिद ने मोहन का मोबाइल उठाया और ऐसे ही फोटो गैलरी खोल ली खालिद की नज़र जैसे ही घर की फोटोस पर पड़ी उसने मोहन की माँ को देखा तो उसको यकीन नही आ रहा था कि कैसे कोई औरत इतनी अच्छी हो सकती है एक फोटो में मोहन की माँ ने काली साड़ी पहनी थी मांग में सिंदूर माथे में बिंदी ओठो में लिपिस्टिक चिकनी सुराहीदार गर्दन स्लीवलेस ब्लाउज में गोरी गुदाज़ बाहें ब्लाउज में किसी हुई गोल मोटी और तनी हुई चूचियाँ नीचे उनकी गहरी गदराई नाभि जो कि काली साड़ी में बहुत खिल रही थी ।5.4 feet लंबाई तंदरुस्त गदराया बदन और नीचे से थोड़ी फैली हुई गांड खालिद ने कभी भी इतनी अच्छी गांड का शेप नही देखा था जैसे कोई अप्सरा हो । लंड से पानी निकालने के बाद भी खालिद के 8 इंच के लौड़े की नसों में खून दौड़ने लगा खालिद की आखों में मोहन की माँ की नंगी तस्वीर घूमने लगी थी।उसने जल्दी से मोहन की माँ की कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल में सेव कर ली। तभी मोहन के आने की आहट से उसने गैलरी बन्द कर के गेम खेलने लगा जैसे कि उसमें कुछ देखा ही न हो । फिर 7 बजे खालिद लौट गया और मोहन पढ़ाई में लग गया । खालिद रास्ते भर मोहन की माँ के बारे में सोचता रहा और अपने घर आ कर मोहन की माँ को देख कर मुठ मारी रात को देर तक मोहन की माँ के बारे में सोचता रहा और मोहन की माँ के सपने देखता रहा इतना टाइट उसका लौड़ा पहले कभी नही हुआ था। सुबह तक खालिद 3 बार मुठ मार चुका था । और मोहन इस बात से अनजान था।
अगले दिन कॉलेज में
खालिद- यार कल बहुत मज़ा आया था तेरे घर पर।
मोहन- हा यार मुझे भी।
क्लास में मैडम के आते ही दोनो मैडम की चूची को देखने लगे । खालिद के मन मे मोहन की माँ की चूचियाँ घूम रही थी।
मोहन- यार खालिद लंड खड़ा हो रहा है साली की चूची देखकर।
खालिद – हाँ यार
पर खालिद का लंड तो मोहन की माँ की चूचियों को याद कर कर के पागल हो रहा था। फिर नाभि वाली मैडम की क्लास में ।
मोहन – यार इसकी नाभि में लंड घुसेड़ दूँ।
खालिद- साली कुतिया की गांड भी चाट लूँगा।
और मन ही मन मोहन की माँ की गांड को याद कर के क्लास में ही अपना लंड रगड़ने लगा।
छुट्टी के बाद
मोहन -आज घर आएगा?
खालिद -हां साथ मे हिलाएंगे।
खालिद 4 बजे ही मोहन के घर पहुंच गया
मोहन- आओ यार लंड बहुत मचल रहा है।
खालिद – मेरा भी लौड़ा तड़प रहा है।
खालिद ने अपने मोबाइल पर milf वाली पोर्न लगाई।
मोहन- ये milf क्या होता है ?
खालिद- mom I would like to fuck मतलब अपनी माँ की उम्र की औरत की चुदाई।
मोहन – अच्छा
और खालिद ने mom and son वाली पोर्न मूवीज खोल दी।
खालिद- कैसा माल है
मोहन – मस्त है यार क्या चूची है मोटी गोल कसी हुई
खालिद- हाँ यार इस उम्र की औरतों की गांड भी मोटी और टाइट और बाहर निकली हुई होती है।
मोहन – यार बहुत मज़ा आ रहा है देख कर
खालिद ने अगली चाल चली और बोला
खालिद-कभी स्टोरी पढ़ी है इन्सेस्ट ?
मोहन – इन्सेस्ट क्या होता है
खालिद- पढ़ेगा तो पता चलेगा। बोल पढ़नी है।
मोहन – हाँ
खालिद ने incest stories का पेज खोल दिया।
कहानी के topic देखने लगा।
कहानी के topic थे माँ की चुदाई, माँ की मीठी चूत, नंगी माँ, मम्मी का रसीला भोसड़ा, रंडी माँ, माँ को गर्भवती किया etc…
ये देख कर मोहन बोला
मोहन – यार ये सब स्टोरी कौन लिखता है?
खालिद – यार हमारे तुम्हारे जैसे लोग ही लिखते है जो रियल में करते है या फिर उनकी fantasy होती है।
मोहन- ऐसा कैसे हो सकता है ।
खालिद – यार तेरे सामने है खुद ही देख ले और पढ़ कर मज़ा लेने में क्या जाता है। बोल कौन सी पढ़े?
मोहन – कोई भी जो तुझे पसंद आये।
खालिद ने “माँ का रसीला भोसड़ा ” open की
मोहन – भोसड़ा क्या होता है?
खालिद- चुदाई से पहले लड़की की बुर होती है फिर लौड़ा घुसने के बाद वो चूत बन जाती है और जब चूत चुद चुद कर बच्चा निकाल देती है तो चूत का भोसड़ा बन जाता है। और सबसे ज्यादा चुदाई की आग भोसड़े में होती है।कितना भी मोटा लौड़ा अपने भोसड़े में घुसवा लेती है।
फिर दोनों स्टोरी पढ़ने लगते है।
कहानी में एक बेटा अपनी माँ को रंडी की तरह चोदता है अपनी माँ के भोसड़े को चूसता है अपनी माँ के मुँह में अपना लौड़ा डालता है
खालिद- मज़ा आ रहा है।
मोहन – हाँ बहुत
खालिद- लंड बाहर निकाल और हिला
दोनो अपने लंड निकाल कर हिलाने लगे।
बार बार माँ शब्द आने पर दोनों के लौड़े ज्यादा जोश में आ जाते थे।
दोंनो अपना लौड़ा तेज़ी से हिला रहे थे लौड़े ऐसे सख्त हो गए थे जैसे किसी ने उसमें लोहे की रॉड डाल दी हो।
लंड हिला हिला कर दोनों के हाथ मे दर्द होने लगा। पर लंड न तो पानी निकाल रहा था और न ही थक रहा था। फिर अचानक मोहन के पापा ने दरवाजा खटखटाया दोनो ने मोबाइल बंद किया और पैंट पहन ली।
मोहन ने दरवाजा खोला
मोहन- पापा आज आप बहुत जल्दी आ गए?
राकेश- हाँ बेटा तबियत ठीक नही है
मोहन- क्या हुआ?
राकेश- शुगर बहुत बढ़ गयी है और ब्लूडप्रेशर भी बढ़ा है।
मोहन – ठीक है आप आराम कीजिये । और हां ये मेरा फ्रेंड खालिद है हम लोग एक ही क्लास में है आज साथ मे पढ़ाई कर रहे थे।
खालिद- नमस्ते अंकल
राकेश- नमस्ते बेटा
दरअसल मोहन के पापा को ये बीमारी 5 साल से थी और उनकी सिगरेट पीने की आदत की वजह से सांस भी फूलने लगती थी बाहर रहने की वजह से खाना पीना ठीक से नही हो पाता था और काम के प्रेशर की वजह से आराम भी नही मिल पाता था इसलिए अब उनकी बीमारी ज्यादा बढ़ने लगी थी।
खालिद- अच्छा मैं अब चलता हूं कल कॉलेज में मिलना।
मोहन – ठीक है
मोहन के पापा दूसरे रूम में चले गए
जाते जाते दरवाजे पर खालिद ने मोहन के कान में बोला
खालिद- मुठ मार कर पानी जरूर निकाल देना वरना रात भर नींद नही आएगी।
मोहन- हां भाई जरूर और तू भी निकलना।
खालिद के जाने के बाद मोहन ने पापा के साथ खाना खाया और पापा को दिखाने डॉक्टर के पास ले गया । पर उसके मन मे सिर्फ और सिर्फ कहानी के शब्द घूम रहे थे जो उसके लौड़े को चैन से नही बैठने दे रहे थे।
रात को मोहन बिना मुठ मारे ही सो गया।
पर मोहन का लंड जाग रहा था।
मोहन को रात को सपना आया कि
” एक औरत जंगल मे दौड़ रही है उसने पीले रंग की साड़ी पहनी है और मोहन भी उसके पीछे दौड़ रहा है बारिश हो रही है औरत की साड़ी और ब्लाउज भीग कर बदन से चिपक गए हैं ।
औरत के मुँह में कपड़ा बंधा है औरत की साड़ी और पेटीकोट चूतड़ से चिपके है और दौड़ते समय औरत के दोनों चूतड़ मादक तरह से हिल रहे है फिर मोहन उसका पल्लू पकड़ कर खींचता है। साड़ी खुलने लगती है ।
अब औरत पेटीकोट ब्लाउज में भागने लगती है । पीले पेटीकोट के अंदर काली चड्ढी नज़र आने लगती है। मोटे गोरे टाइट चूतड़ और चिपका हुआ ब्लाउज औरत की चूची को और नुमाया कर रहे थे। गोरा खुला हुआ पेट और गहरी नाभि भीगे हुए ब्लाउज के अंदर काली ब्रा साफ दिख रही थी ।
ब्लाउज का गला बड़ा होने की वजह से तनी हुई गोरी चूचियों की दरार के बीच मे मंगलसूत्र लटक रहा था। तभी अचानक ठोकर लगने की वजह से औरत गिर जाती है और उसका पेटीकोट ऊपर हो जाता है और मोहन को उसकी घुटने के ऊपर तक कि गोरी चिकनी और मोटी केले के तने जैसी जाँघे दिख जाती है।
फिर वो अपना पेटीकोट नीचे करने लगती है पर तभी मोहन झपट कर उसका पेटीकोट उठा देता है और जांघो को चूमने लगता है और दूसरे हाथ ब्लाउज के ऊपर से मोटी पत्थर की तरह टाइट चूचियों को मसलने लगता है। गोरी चिकनी नाभि में जीभ डाल कर चाट लेता है।
औरत खुद को छुड़ाने की कोशिश करती है पर मोहन उसकी गदराई तंदुरुस्त जवान जिस्म को नोचने में लगा रहता है। फिर मोहन जबरदस्ती उसके पेटीकोट का नाडा खोल देता है और ब्लाउज को फाड़ने लगता है।
जल्दी ही औरत सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में होती है औरत की गोरी गोरी जांघो के बीच मे कसी हुई काली पैंटी और मोटे संगमरमर के तराशे हुए चूतड़ जो कि आधे पैंटी के बाहर थे।
टाइट काली ब्रा में कसी हुई चूचियाँ जैसे बाहर निकलने के लिए तड़प रही हो। पानी से भीगा हुआ संगमरमर सा बदन पा कर मोहन अपना मुंह जांघो के बीच मे रख कर चूत को सूंघने लगा।
औरत की चूत की खुशबू से मोहन के नथुनों में नशा आ गया उसने औरत की चूत को पैंटी के ऊपर से ही दांत से काट लिया औरत ने कस के मोहन के कंधे पर लात मारी। मोहन ने कस के औरत के हाथ पैर पकड़ लिए और उसकी चूत दांत से काटने लगा ।औरत चिल्लाने लगी औरत के चिल्लाने की आवाज मोहन को कुछ अजीब लगी ।
फिर मोहन ने उसकी चूत पर और कस के पैंटी के ऊपर से ही दांत गड़ाकर काटा जिससे वो और कस के चीखी अबकी मोहन से रहा नही गया और उसने औरत के मुँह में बंधा हुआ कपड़ा हटा कर जब औरत का मुंह देखा तो उसके होश उड़ गए वो मोहन की सगी माँ कविता थी ।”
हड़बड़ा कर मोहन की नींद खुल गयी उसका पूरा बदन पसीने से भीगा था सांसे बहुत तेज़ थी और उसके लौड़े से वीर्य टपक रहा था।
अगले दिन फिर कॉलेज में फिर से मैडम को देख कर दोनों ने लंड मसला ।
छुट्टी होने पर
खालिद – आज भी आऊंगा भाई तेरे घर मुठ मारने ।
मोहन – आज पापा आफिस नही गए घर पर ही रेस्ट कर रहें हैं।
खालिद – चल फिर थोड़ी देर कॉलेज के ग्राउंड पर ही हम गपशप करते है। आधे घण्टे बाद घर चले जाना।
वो दोनों अकेले एक पेड़ के नीचे बैठ गए।
खालिद – कल बहुत मज़ा आया था यार तुमने मेरे जाने के बाद मुठ मारी थी क्या?
मोहन- नहीं पापा को लेकर डॉक्टर के पास जाना पड़ा था।आज रात को हम घर जा रहे है। कल संडे है इसलिए । सोमवार को मिलूंगा।
खालिद – ( अनजान बनते हुए पूछा) तुम्हारे घर मे कौन कौन है।
मोहन – मैं मम्मी पापा और भाई।
खालिद- मुझसे भी मिलवा कभी हम फैमिली फ्रेंड्स बन जाएंगे।
मोहन – हां जरूर
खालिद – भाई का नाम क्या करता है
मोहन – सोहन अभी 12वी में है।
खालिद – और माँ
मोहन- कविता हाउसवाइफ है।
खालिद- फैमिली फोटो है क्या?
मोहन – हाँ
खालिद – दिखा
मोहन ने मोबाइल खोला और खालिद को दिखाने लगा।
खालिद – तेरा भाई तुझसे एक साल ही छोटा है बस?
मोहन – हाँ
खालिद- और माँ
मोहन – 35
खालिद- पर तुम 19 के हो
मोहन – हाँ माँ की शादी 16 साल में हो गयी थी इसलिए
खालिद अपने ओठों में जीभ फिराते हुए मोहन की माँ को देख रहा था। जब काली साड़ी में खुली हुई नाभि वाली तस्वीर देखी तो पूछा
खालिद – तेरी माँ भी साड़ी नाभि के नीचे से ही बांधती है ना।
मोहन – तू भी पागल है।
और ये कहकर मोहन ने खालिद से मोबाइल ले लिया।
खालिद – यार तू भी बिल्कुल पागल है तेरी माँ भी तो मेरी माँ जैसी ही है। चल कोई स्टोरी पढ़ते है ।
मोहन का लौड़ा सख्त होने लगा और उसने हाँ में सर हिला दिया। खालिद ने “माँ के साथ सुहागरात”
नाम की स्टोरी पड़ने लगा।
दोनो की आंखों में लाल डोरे तैरने लगे और दोनों के लौंडों में गरम खून बहुत तेज़ी से दौड़ने लगा। खालिद के मन मे कविता की नंगी तस्वीर आ रही थी और मोहन ना चाहते हुए भी कल रात के सपने को भूल नही पा रहा था।
मोहन – ( स्टोरी पढ़ते हुए) उफ्फ्फ शश बहुत मज़ा आ रहा है यार खालिद
खालिद- लौड़ा बाहर निकाल लो कोई नही है अभी।
मोहन- हाँ
दोनों ने अपने लौड़े बाहर निकाल कर कहानी पढ़ने लगे । फिर कहानी में लड़का अपनी माँ के निप्पल पकड़ कर खींचता है। और बोलता है “मम्मी मुझे तुम्हारा दूध पीना है”
खालिद- अहह फिर से बोल मोहन
मोहन- मम्मी मुझे तुम्हारा दूध पीना है ।
खालिद – फिर से बोलो
मोहन- मम्मी मुझे तुम्हारा दूध पीना है।
खालिद – अब बोलो मुझे अपनी मम्मी का दूध पीना है।
मोहन- क्या ????
खालिद ने मोहन का लंड पकड़ लिया और बोला
खालिद – साले तू अपनी आंखें बंद कर और मैं जो बोलता हूँ बोलो बहुत मज़ा आएगा।
मोहन – उफ्फ्फ!! भाई क्या कर रहा है तू आहहहहहह !!!
खालिद – मज़ा आ रहा है ना ?
मोहन – हाँ बहुत ज्यादा !
खालिद ने मोहन के लंड को तेजी से हिलाते हुए बोला
खालिद – बोल मुझे अपनी मम्मी के दूध पीने है।
मोहन – मुझे अपनी मम्मी के दूध पीने है।
खालिद – गुड , अब बोल मेरी माँ की चूची टाइट है।
मोहन – मेरी माँ की चूची टाइट है ।
खालिद – बोल मेरी मम्मी की साड़ी उतार दो नंगी कर दो।
मोहन – उफ्फ्फ !!! मेरी मम्मी को नंगी कर दो ।
फिर खालिद मोहन के लंड को कस के दबाते हुए
खालिद – बोल मम्मी मेरा लौड़ा चूसो
मोहन – आह मम्मी मेरा लौड़ा चूसो!!
खालिद – अब अपनी मम्मी को नंगी करो । बताओ पहले क्या उतारोगे ?
मोहन मस्ती में खो गया था एक अजीब सी वासना उसके दिल और दिमाग पर छाई हुई थी । और खालिद लगातार उसके लौड़े को हिला हिला कर उसके मुँह से ही उसकी माँ के बारे में गन्दी से गन्दी बात निकलवा रहा था
खालिद – बोल न कैसे नंगी करेगा अपनी माँ को?
और मोहन के लौड़े को कस के दबा दिया।
मोहन – ओह यार कपड़े उतार कर।
खालिद – पहले क्या उतरेगा ?
मोहन – साड़ी
खालिद – फिर क्या उतरेगा ?
मोहन – ब्लाउज उतारूंगा ।
खालिद – बोल अपनी माँ का ब्लाउज़ उतारूंगा (और मोहन के लंड को मरोड़ दिया)
मोहन – अपनी माँ का ब्लाउज उतारूंगा ।
खालिद – फिर , जल्दी बोल ।
मोहन – अपनी माँ का पेटीकोट उतारूंगा।
खालिद- बोल क्या दिख रहा है। कलर बता मां की ब्रा पैंटी का?
मोहन- ब्लैक कलर ( सपने वाली बात को याद करते हुए )
खालिद- कैसी लग रही है तेरी माँ (मोहन का लंड सहलाते हुए)
मोहन – बहुत अच्छी
खालिद- अपनी माँ की चूचयों का शेप बता ?
मोहन – गोरी ,मोटी तनी हुई ओर गोल गोल !
खालिद- चूसेगा अपनी माँ की चूचियाँ?
मोहन- हाँ
खालिद – फिर अपनी माँ की ब्रा उतार ! कर दे नंगी ।
मोहन – आहहहह माँ !!! उतार रहा हूँ ।
खालिद – निप्पल देख अपनी माँ के बता कैसे है?
मोहन – नुकीले तने हुए भूरे रंग के?
खालिद – यही निप्पल चूस कर तू बड़ा हुआ है और आज फिर से यही निप्पल चूस कर तेरा लौड़ा भी बड़ा हो गया है ( ये कहते हुए खालिद ने मोहन के लौड़े के टोपे को अंगूठे से मसल दिया)
मोहन – आ आ आ मम्मी ! मेरी मम्मी के निप्पल !
खालिद – चल अब चड्ढी उतार अपनी माँ की और बता क्या दिख रहा है ?
मोहन – उतार दी ! उफ्फ्फ!!
खालिद – बोल क्या दिख रहा है तेरी माँ की टांगो के बीच मे क्या कहते हैं उसको?
मोहन – ( कांपती हुई आवाज में ) चु चु चु चूत त त !!
खालिद – किसकी चूत ? ( मोहन के लौड़े को हिलाने की स्पीड बढ़ाते हुए)
मोहन – म म म मेरी माँ की चू चू चूत ।
खालिद- तेरी माँ की चूत नही भोसड़ा है भोसड़ा ! तू और तेरा भाई तेरी माँ की चूत से निकल कर उसको भोसड़ा बनाया है। अब बोल !
मोहन – मेरी माँ का भोसड़ा ।
खालिद अपनी चाल में शत प्रतिशत पास हो रहा था और मोहन से ही उसकी माँ को नंगा करवा रहा था।
खालिद – अपनी माँ का नाम ले कर बोल ! बोल मेरी माँ कविता का भोसड़ा ! ( और खालिद ने मोहन के लौड़े को कस के उमेठ दिया)
मोहन – आ आ आ आ हहहह मेरी माँ कविता का भोसड़ा आ आ आ आ।
खालिद – अब सूंघ कर बता कैसी खुश्बू आ रही है तेरी माँ कविता के भोसड़े से ? ( और खालिद ने दोनों हाथों से मोहन के लौड़े को कस कस के खींचने लगा )
मोहन – आ आ आ उफ्फ्फ बहुत अच्छी सुगंध है मेरी माँ कविता के भोसड़े की।
खालिद – अब अपनी जीभ निकाल और घुसा दे अपनी माँ कविता के खुशबूदार रसभरे भोसड़े में ।
अब मोहन का शरीर झटके लेने लगा था ।30 मिनेट तक लगातार खालिद मोहन के लौड़े को मसल मसल कर निचोड़ दिया था।
मोहन – आ आ आ अहह मैं अपनी माँ कविता का भोसड़ा चूस रहा हूँ । मेरी माँ का भोसड़ा
आ आ आ आ आ आ ममममम मेरी माँ कविता का भोसड़ा आ आ आ उफ्फ्फ ममममममम
उई ईईईईई उम्म म म म म ।
ये कहते कहते मोहन के लौड़े ने झटके दे दे कर ढेर सारा वीर्य उगल दिया या
2 मिनेट बाद मोहन ने आँखे खोली और पैंट पहन लिया वो खालिद से निगाह नही मिला पा रहा था।
फिर वो दोनों उठे और घर के लिए जाने लगे ।
खालिद – क्या हुआ यार मूड क्यों खराब है तेरा मज़ा नही आया क्या?
मोहन – यार ये सब गलत कर रहे है हम लोग। माँ के बारे में ऐसा सोचना पाप है।
खालिद – यार कौन सा रियल में करने जा रहे है ये तो सिर्फ fantasy है ।
मोहन – पर ऐसी fantasy भी गलत है ।
खालिद – यार ये तुम बोल रहे हो पर तुम्हारे लंड को कुछ और ही अच्छा लगता है। अजीब सी मस्ती आ जाती है तुम्हारे लौड़े में।
मोहन ने पास कोई जवाब नही था इसलिए वो चुप रहा । और वो घर की तरफ निकल पड़ा ।
फिर शाम को ही मोहन अपने पापा के साथ घर के लिए निकल गया । देर रात दोनो घर पहुँचे । मोहन सोहन के रूम में और राकेश कविता के रूम में जाकर सो गया।
सुबह सुबह 7 बजे।
कविता – उठो सब लोग जल्दी से फ्रेश होकर नाश्ता कर लो ! आज 9 बजे मंदिर पहुंचना है मथुरा से स्वमी जी आ रहे है ।
सब 8.45 तक तैयार हो गए राकेश मोहन और सोहन ने कुर्ता पायजामा और कविता ने नारंगी रंग की साड़ी पहनी थी।
मांग में सिंदूर और माथे पर लाल रंग की बिंदिया ओठो पर गुलाबी रंग की लिपिस्टिक । कानो में सोने के झुमके और गले मे मंगलसूत्र था। टाइट स्लीवलेस ब्लाउज में कविता का गोरा बदन बहुत खिल रहा था । ब्लाउज के गले से तने हुए स्तन की 1 इंच की दरार नुमाया हो रही थी। जिस पर मंगलसूत्र का लाकेट लटक रहा था। ब्लाउज के बैक में डोरी का डिजाइन था इसलिए गोरी चिकनी पीठ खुली थी। स्लीवलेस ब्लाउज में गोरी गुदाज बाहें पूरी खुली थीं। और कमर के बीच मे गहरी नाभि थी जो कि किसी अप्सरा की योनि से ज्यादा कामुक लग रही थी। टाइट साड़ी बांधने की वजह से कविता के मोटे चूतड़ और बाहर की तरफ निकल आये थे।
मोहन इन सबको नज़रअंदाज़ करते हुए साथ मे ही मंदिर की तरफ चल दिया । राकेश और कविता आगे और मोहन सोहन पीछे पीछे पैदल ही चल रहे थे मंदिर बस घर से 2 किलोमीटर ही दूर था।
चलते वक्त कविता के चूतड़ कुछ ज्यादा ही मटकते थे। जब कविता अपना बायाँ पैर आगे करती तो दायाँ चूतड़ बाहर निकल आता और जब दायाँ पैर आगे करती तो बायाँ चूतड़ बाहर आता ।
तभी एक रिक्शे वाले कि निगाह कविता के मटकते हुए चूतड़ों पर पड़ी और वो भूखी नज़रों से कविता के मोटे गोल मटकते हुए चूतड़ों को घूर घूर कर धीरे धीरे चलाने लगा ।
तभी मोहन की निगाह रिक्शे वाले पर पड़ी तो मोहन ने उसकी नज़रो को देखा जो कि उसकी माँ की नंगी पीठ और मोटे, गोल और हिलते हुए चूतड़ों को निहार रही थीं। मोहन की निगाह भी अपनी माँ के हिलते हुए चूतड़ों पर ठहर गयी । और फिर न जाने कब मंदिर आ गया। ।
मंदिर के दरवाजे पर माथा टेक कर सबने घंटी बजाई । घंटी बजने के लिए कविता ने अपने दोनों हाथ ऊपर किये तो उसकी चिकनी armpit दिखाई दी जो कि बिल्कुल गोरी थी । अपनी माँ पसीने से भीगी हुई खुशबूदार armpit को देखकर मोहन को अच्छा लग रहा था।
अब चारो लोग पुजारी को प्रसाद दे कर आंख बंद कर के भगवान के सामने खड़े हो गए।
बीच मे मोहन ने चुपके से आंख खोल कर देखा पुजारी उसकी माँ की नाभि की गहराइयों में और स्तन की उचाईयों में गोते लगा रहा था। नारंगी रंग के ब्लाउज में कविता के स्तन बिल्कुल रसीले आम के जैसे लग रहे थे। और पुजारी आँखों से उन रसीले आमों का रस पी रहा था।
थोड़ी देर बाद सबने आंखे खोली। कविता ने पुजारी से पूछा ।
कविता – मथुरा वाले स्वामी जी कहाँ ठहरे है ?
पुजारी- मंदिर के पीछे वाले आश्रम में। अभी वो पूजा कर के फ्री हुए है आप मिल सकती हो।
चारो मंदिर के पीछे बने आश्रम में आ गए।
स्वामी जी आंख बंद कर के चारपाई में बैठे थे उनकी उम्र 50 साल होगी और वो सफेद धोती पहने थे । उनके चेहरे में तेज था और शरीर तंदुरुस्त था।
जब स्वामी जी ने आंखे खोली तो माँ उनके पैर धोने के लिए पानी ले आयी और नीचे बैठकर उनके पैर धोने लगी।
स्वामी जी – क्या नाम है तुम्हारा बेटी ।
कविता – कविता । और ये मेरे पति और दोनों बेटे।
स्वामी जी – किसी कष्ट का निवारण चाहती हो?
कविता – बस एक ही कष्ट है कि मेरे पति की सेहत ठीक नही रहती । कुछ ऐसा उपाय बताएं कि वो बिल्कुल स्वस्थ रहने लगे।
स्वामी जी को कविता के हाथों का स्पर्श अपने पैरों में अच्छा लगने लगा। तभी स्वामी जी की निगाह कविता के स्तन पर पड़ी जिसकी थोड़ी सी दरार दिख रही थी और ब्लाउज में तने हुए रसीले स्तन ब्रा में कैद थे। स्वामी जी के मुँह में पानी और लौड़े में खून उतारने लगा। मोहन स्वामी जी की निगाह देख रहा था। स्वामी जी अपना लंड धोती के बाहर निकलने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। माँ ने अच्छे से पैर धोकर स्वामी जी से विदा ली और घर की तरफ निकल गए ।
दोपहर को खाना खा कर सब अपने रूम में सो गए । पर मोहन के दिमाग मे लोगों की निगाहें जो कि उसकी माँ के अंगों को घूर रहीं थी बार बार याद आ रही थी।
मोहन को हस्तमैथुन की आदत भी पड़ चुकी थी अब उसका हाथ स्वतः अपने लौड़े पर पहुँच गया जो कि पहले से ही खड़ा था । तभी खालिद का कॉल आ गया।
खालिद – क्या कर रहा है दोस्त ।
मोहन – लेटा था बस।
खालिद – मुठ मेरी क्या आज ।
मोहन का एक हाथ अभी भी अपने लौड़े पर ही था।
मोहन – अभी तक नहीं।
खालिद – चल साथ मे मरते हैं । क्या बोलते हो दोस्त ?
मोहन भी यही चाहता था।
मोहन – हाँ यार ।
खालिद – और साले तू शर्म मत किया कर खुल कर मज़े लिया कर भाई हुँ मैं तेरा।
मोहन – हाँ बिल्कुल।
खालिद – साले कुछ बोल तो मादरचोद।
मोहन – क्या बोलूं यार?
खालिद – तू साला चूतिया है मैं जो पूछुंगा सिर्फ उसका जवाब देना। बोल देगा
मोहन – हाँ ।
खालिद – तेरी माँ की लंबाई क्या है।
मोहन – 5.4″ फ़ीट
खालिद – वजन क्या होगा।
मोहन – 65 kg के आस पास।
खालिद – अच्छा साइज बता ?
मोहन – किसका ?
खालिद – तेरी माँ का फिगर ?
मोहन – वो तो पता नही ।
खालिद – साले कुछ पता नही तुझे !! अच्छा बता कहाँ है अभी ?
मोहन – पापा के रूम में
ख़ालिद – जा देख कर बता क्या कर कर रही है ?
मोहन – दरवाजा बंद है!!
खालिद- साले key होल से देख और बता!!
मोहन ना चाहते हुए भी मम्मी पापा के रूम की तरफ बढ़ा और की होल से देखा उसकी माँ पेटीकोट और ब्लाउज पहने लेटी थी और मोहन के पापा बगल में सो रहे थे।
मोहन – दोनो सो रहे है ।
खालिद – नंगे?
मोहन – नही
खालिद – क्या पहना है माँ और पापा ने ?
मोहन- मम्मी ने पेटीकोट ब्लाउज और पापा ने कुर्ता पायजामा।
खालिद – तेरा बाप लगता है चोद नही पाता है इसीलिए नंगा भी नही किया ।
मोहन – पता नही
खालिद – साइज बता अपनी माँ के दूध का
मोहन – मुझे कैसे पता होगा ।
खालिद – जा बाथरूम में और उसकी अंडरगार्मेंट्स का साइज देख कर बता।
मोहन बाथरूम में जाता है और उसकी नज़र बातरूम में टंगी हुई ब्रा पर पड़ती है ।
मोहन – 36 है भाई
खालिद – कप भी बता साले
मोहन – C 36
खालिद – अब अपनी माँ की ब्रा को अपने लौड़े पर लपेट लो और अपनी माँ के दूध के बारे में सोचकर अपना लौड़ा हिलाओ।
मोहन ने अपनी माँ की ब्रा अपने लौड़े से लपेट कर कस कस के हिलाने लगा।
खालिद – देख पैंटी भी होगी वहीं पर
मोहन – हाँ पर गंदी है ।
खालिद – साले गन्दी ही चाहिए । अब पैंटी में अपनी मम्मी की चूत वाली जगह सूंघ कर बता
मोहन – बहुत अच्छी खुसबू है
खालिद – अब चाट लो चूत वली जगह थोड़ा सा अपनी मम्मी की पेसाब का टेस्ट भी मिल जाएगा।
मोहन अपना लौड़ा तेज़ी से मसलते हुए अपनी माँ की पैंटी की चूत वाली जगह को चाट रहा था।
ख़ालिद – कैसा स्वाद है तेरी माँ की चूत का।
मोहन – मीठा
खालिद – अब पैंटी के चूत वाली जगह का कपड़ा मुँह में रख कर चूसो ।
मोहन ने वैसा ही किया और अपनी माँ की चूत का पूरा स्वाद ले रहा था।
मोहन – आ आ आ आ मममम
ख़ालिद – अपनी माँ के रसीले भोसड़े के रस को कुत्ते की तरह चाट।
मोहन – आह आह मम्मी ममम उफ्फ्फ
ख़ालिद – अपनी माँ की ब्रा पैंटी लाएगा मेरे लिए मैं भी देखूंगा कैसा स्वाद है तेरी माँ की चूत का।
मोहन – हाँ ले आऊंगा।
ख़ालिद – अब अपनी माँ की चूत के छेद को थोड़ा फैला दो ।
मोहन – हाँ
ख़ालिद – कैसा दिख रहा है तेरी माँ का भोसड़ा।
मोहन – गुलाबी है पूरा छेद अंदर से ।
ख़ालिद – चूस ले अपनी माँ के भोसड़े के रस की एक एक बूंद
मोहन – आह आह माँ उफ्फ्फ ममममम मम्मी आ आ आ
और अपनी माँ की पैंटी चाटते चाटते मोहन के लौड़े से वीर्य की पिचकारी निकल गयी।
मोहन अपना लौड़ा बाथरूम में धो रहा था ।
ख़ालिद – यार मज़ा आ गया आज अपनी माँ की पैंटी लाना मत भूलना
मोहन – अरे यार कैसे लाऊंगा किसी को पता चल गया तो ?
ख़ालिद – यार तू दोस्ती में इतना भी नही कर सकता । तुझे हमारी दोस्ती की कसम।
मोहन – ठीक है यार मैं पूरी कोशिश करूंगा ।
ख़ालिद – ये हुई न दोस्ती वाली बात। अच्छा अभी कहां है तेरी माँ ?
मोहन – जब मैं बाथरूम में आया था तो अपने रूम में थी ।
ख़ालिद – जा बाहर जा कर देख और बता कहाँ है ।
मोहन – हाँ देखता हूं।
मोहन बाहर जाता है उसकी माँ सोफे पर लेटी tv देख रही थी ।
मोहन – भाई मां हॉल में tv देख रही है ।
ख़ालिद – यार vedio call पर दिखा दे plz।
मोहन – अरे यार पागल है तू । मुझे मरवाएगा।
ख़ालिद – यार earphone लगा ले वो सोचेगी कि अपने दोस्त से बातें कर रहा है और तो कैमरा अपनी माँ की तरफ रखना और ज्यादा मत बोलना।
मोहन – ठीक है रुक करता हूं।
और मोहन ने ख़ालिद को vedio call की और अपनी माँ को पीछे से दिखाया
ख़ालिद – वाह क्या मस्त tight ब्लाउज पहना है तेरी माँ ने मस्त गोरी चिकनी पीठ है मन कर रहा है आ कर चाट लूं। गाँड़ भी दिखा न यार ।
मोहन कैमरे को अपनी माँ की गाँड़ की तरफ कर देता है
ख़ालिद – वाह यार क्या चूतड़ है तेरी माँ के और ज़ूम कर चूतड़ों पर।
मोहन अपनी माँ की गाँड़ पर ज़ूम करता है ।
ख़ालिद – आ आह ऐसी गाँड़ तो मैंने अपनी जिंदगी में नही देखी ऐसा शेप तो पोर्न में चुदवाने औरतो का भी नही होता । चल अब आगे से दूध भी दिखा दे ।
मोहन- यार सामने कैमरा नही ले जा सकता ।
ख़ालिद – साइड से ही दिखा
मोहन ने थोड़ा आगे बढ़ कर अपनी माँ के दूध साइड से दिखाए । कविता tv देखने मे busy थी इसलिए उसका ध्यान अपने गिरे हुए पल्लू में नही था और उसके मोटे तने हुए दूध कसे हुए ब्लाउज से थोड़ा सा बाहर निकले थे।
ये देख कर ख़ालिद के मुँह से लार टपकने लगी और मोहन की निगाह भी अपनी माँ के ताजमहल के संगमरमरी गुम्बद जैसे स्तनों में ठहर गयी।
ख़ालिद – यार क्या खाती है तेरी माँ जो इतने टाइट और मोटे दूध हैं ?
मोहन चुप था क्योंकि उसकी माँ उससे कुछ ही दूरी पर थी ।
ख़ालिद -थोड़ा और ज़ूम कर यार plzz
मोहन बेशर्मों की तरह अपनी सगी माँ के जिस्म की नुमाइश ख़ालिद के लिए कर रहा था उसकी आँखों से शर्मो हया का पर्दा हट चुका था और अपनी पूजनीय माँ के जिस स्तन को पी कर वो बड़ा हुआ था उन ही स्तनों को अपने दोस्त के सामने परोस रहा था। और मोहन ने कैमरा अपनी माँ के स्तनों पर पूरा ज़ूम कर दिया।
ख़ालिद – वाह यार ऐसे दूध तो स्वर्ग की अप्सरा के भी नही होंगे। इतने गोरे इतने गोल इतने तने हुए । यार लगता है तेरे पापा ने ठीक से मसला नही है ।
मोहन को ये सुन कर थोड़ा अजीब लगा ।
मोहन – ok bye रखता हूँ।
ख़ालिद – 2 मिनिट और रुक जी भर कर देख लेने दे ।
मोहन रुका
ख़ालिद – यार बुरा क्यों मानता है तेरे पापा नही मसलेंगे तो क्या तू मसलेगा तेरी माँ की चूचियाँ।
मोहन चुपचाप सुन रहा था
ख़ालिद – बोल मसलेगा अपनी माँ की चूचियाँ !बोल ! जल्दी बोल !
मोहन- हाँ
ख़ालिद – good ! तूने तो चूसी भी हैं ये चूचियाँ बचपन मे । फिर से चूस लेगा तो क्या चला जायेगा।
मोहन – हाँ । अब रखता हूं bye।
ख़ालिद – क्यों?
मोहन -( दबी आवाज में ) सोहन आ गया है।
ख़ालिद – अच्छा सुन अपनी माँ की vedio बना कर ले आना ।
मोहन – अरे नही यार
ख़ालिद – साले नंगी vedio नही कपङे पहने हुए तो बना लेगा न पूरा आगे पीछे से बनाना ।
मोहन – ठीक है । bye
और मोहन call cut कर के मम्मी पापा और भाई के साथ tv देखने लगता है।
अगले दिन मोहन सुबह सुबह दिल्ली के लिए निकल गया 10:00 बजे पहुंचने की वजह से वह कॉलेज नहीं गया और घर पर ही रुक गया मोहन के पिताजी गांव में ही थे वह एक हफ्ते वहीं रहने वाले थे तब जब कॉलेज छूटा तो खालिद ने मोहन को फोन किया
खालिद – यार तू आया नहीं आज मोहन यार मैं 10:00 बजे घर पहुंचा था बस लेट हो गई ।
ख़ालिद- अरे यार मिलना बहुत सी बातें करनी है अभी घर आ जाऊं क्या?
मोहन – हां आजा
खालिद स्कूल से सीधे मोहन के घर पहुंच गया।
खालिद -गांव से क्या लाया है मेरे लिए ?
मोहन – यार मां ने यह लड्डू दिए थे
खालिद – साले मुझे तो तेरी मां की रसगुल्ले खाने हैं ला जल्दी से अपनी मां की चड्डी मुझे दे दे ।
मोहन -अरे यार तू तो आते ही शुरू हो गया।
खालिद – यार जब से तेरी मां को देखा है मेरा लौड़ा बैठ ही नहीं रहा।
और खालिद मोहन का बैग चेक करने लगा बैग की अंदर वाली पॉकेट में उसकी मां की चड्डी थी जिसे देखते ही खालिद में अपने मुंह पर रख लिया और सूंघने ने लगा ।
खालिद- वाह क्या महक है तेरी मां की चूत की ।
मोहन – यार यह धुली हुई है ।
खालिद – यार जब धुली हुई चड्डी से इतनी अच्छी मैं आ रही है तो तेरी मां की गंदी चड्डी से कितनी खुशबू आएगी और तेरी मां की चूत में कितनी सुगंध होगी।
यह सब सुनकर मोहन का लौड़ा खड़ा हो गया और खालिद में मोहन के लोड़े को पैंट के ऊपर से ही मसल दिया मोहन आ भाई बहुत मन हो रहा है
ख़ालिद- वीडियो भी दिखाना तेरी मां का ।
मोहन – हां दिखाता हूं
और दोनों मोहन के मोबाइल में मोहन की मां का वीडियो देखने लगे वीडियो में मोहन की मां सो रही थी उनकी साड़ी घुटने तक उठी हुई थी और गाँड़ पीछे निकली हुई थी कविता का पेट पूरा खुला था उसकी गहरी नाभि पूरी तरह से दिख रही थी फिर ऊपर उसका ब्लाउज का गला बड़ा था पल्लू हटा हुआ था और कविता की मोटी मोटी टाइट चूचियाँ सांसो के साथ ऊपर नीचे हो रही थी।
और दोनों अपने लौड़े हिला रहे थे। ख़ालिद ने अपने मोबाइल में पोर्न भी चला दी जिसमे एक 35 साल की औरत को 2 लड़के चोद रहे थे ।
ख़ालिद – सोच मोहन अगर हम दोनों तेरी मां को ऐसे चोद चोद कर मज़ा दे तो ?
मोहन और तेज़ी से लौड़ा हिलाने लगा ।
ख़ालिद – तेरे पापा तेरी माँ की चूत चाटते होंगे कि नही?
मोहन – नहीं।
ख़ालिद – अगर मुझे तेरी माँ मिल जाये तो दिन रात तेरी माँ की पेशाब का छेद चूसता रहूँ ।
ये कहते हुए ख़ालिद ने कविता के पैंटी में चूत वाली जगह पर जीभ फिरा दी।
मोहन- हाँ मैं भी दिन रात चाटउँगा ।
ख़ालिद – सोच तेरी माँ को कितना मज़ा आएगा।
मोहन – हाँ यार मस्त हो जाएगी।
ख़ालिद – तेरे पापा का लंड कितना बड़ा है ।
मोहन – 4 इंच
ख़ालिद – तुझसे भी छोटा साले तेरी माँ की चूत को कभी असली मज़ा नही मिला होगा।
मोहन- हाँ ।
दोनो पोर्न में होने वाली घनघोर चुदाई को देख कर कविता की कल्पना कर रहे थे और अपने लौड़े स्पीड से हिलाते जा रहे थे।
ख़ालिद – ऐसे फाड़ी जाती है चूत देख कितना पानी निकल रहा है तेरे पापा निकाल पाएंगे?
मोहन – नही वो तो बीमार और कमजोर है ।
ख़ालिद- पर तेरी मां तो जवान है देख कैसे चूचियाँ तनी हुई है गाँड़ बाहर की तरफ निकली है चूत से गुलाब के फूल जैसी महक आ रही है ।
खालिद ने पैंटी मोहन की तरफ बढ़ा दी और मोहन ने अपनी माँ की पैंटी अपने मुँह में रख कर सूंघने लगा।
ख़ालिद – लौड़े में लपेट पैंटी को और हिला कस के
मोहन ने वैसा ही किया । ख़ालिद ने अपना लौड़ा मोहन के लौड़े के पास ले जाकर दोनो लौड़े कविता की पैंटी से एक मे बांध लिए। और हिलाने लगे ।
ख़ालिद- ऐसे ही हम दोनों तेरी मां की चूत में एक साथ 2 लौड़े डालेंगे।
मोहन – क्या एक साथ
ख़ालिद – हाँ चूत फाड़ देंगे तेरी माँ की ।
मोहन – आ आ आ ह ह ह मममम मम्मी आ आ आ मम्मी
ख़ालिद – तेरी माँ को रंडी बना देंगे ।
मोहन – रंडी …. आ आ आ मम्मी
ख़ालिद – हाँ तेरी मां को पोर्न वाली रंडी की तरह चोदेंगे
मोहन- आ आ मममममम मम्मी मी मी उफ्फ्फ मेरी माँ रंडी आ हहह।।।।
ख़ालिद – हाँ तेरी माँ की गाँड़ इतना चोदेंगे कि उसकी चूत से पेसाब निकलने लगेगी।
और दोनों के वीर्य की पिचकारी कविता की पैंटी में निकल गई।
दोनों मुठ मारने के बाद अपना अपना लौड़ा साफ किया और आराम से बैठ कर बाते करने लगे
ख़ालिद – यार तेरी माँ के बारे में सोच कर हिलाने में इतना मज़ा आता है तो अगर वो सच मे मिल जाये तो जिंदगी सफल हो जाये।
मोहन – यार ये तो सिर्फ fantasy है सच मे ऐसा नही होता।
ख़ालिद – होता है यार ।
मोहन – अच्छा बता तूने सुना है किसी का कोई बेटा अपनी माँ को चोदता हो?
ख़ालिद – अबे तू पागल है अगर कोई अपनी माँ को चोदता भी होगा तो क्या सबको बताएगा। सोच अगर तू अपनी माँ को चोदेगा तो क्या किसी को बताएगा। और सबकी माँ इतनी गरम माल भी नही होती कि बेटे का लौड़ा खड़ा कर दे।
मोहन – हाँ यार ये तो है।

Watch Ashley Fires, Anya Olsen Family Picnic 2

ख़ालिद – और तेरा बीमार बाप तो चोद नही पाता होगा । तेरी माँ को चुदाई का असली सुख पता ही नही होगा।
मोहन – वो सब तो ठीक है पर असल जिंदगी की बात कुछ और होती है । आँखों मे शर्म के पर्दे होते है । माँ बेटे एक दूसरे से आंख कैसे मिलाएंगे।
ख़ालिद – पर हमको try तो करना चाहिए शायद काम हो जाये।
मोहन – कैसे ?
ख़ालिद – उसका कोई instagram facebook या tweeter वगैरह का account है क्या?
मोहन – हाँ facebook में है पर apni koi फोटो वगैरह नही डालती बस भगवान की pic और भजन वगैरह शेयर करती है ।
ख़ालिद – ला मुझे बता।
और ख़ालिद मोहन की माँ को 8 – 10 पोर्न की फोटो भेज देता है ।
मोहन – यार किसी को पता चला तो
ख़ालिद – तू चिंता मत कर अगर उसको बुरा लगा तो ब्लॉक कर देगी या ज्यादा से ज्यादा तेरे बाप को बताएगी।
उधर कविता राकेश के पास बैठी थी और राकेश बिस्तर पर लेटा था उसका ब्लड प्रेशर कम था और शुगर भी ज्यादा थी ।
कविता मोबाइल में facebook नोटिफिकेशन देख कर open किया। पोर्न pic देख कर चोंक गयी ।
राकेश – क्या हुआ
कविता राकेश को दिखाने ही वाली थी तभी उसने सोचा कि फालतू की टेंशन लेंगे और उसने उस account को ब्लॉक कर दिया ।
कविता – कुछ नही ।
राकेश – आज मंदिर नही गयी ।
कविता – आज शाम को जाना है तैयार होने जा रही हूँ
और कविता अपनी साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज अलमारी से निकाल कर तैयार होने के लिए बाथरूम जाने लगी ।
राकेश – यहीं पर बदल लो ।
कविता – आप भी न ।
राकेश – तुम रात को भी लाइट बुझा देती हो कभी तुमको बिना कपड़ों के नही देख पाता ।
कविता – अरे …सोहन है बगल वाले रूम में दरवाजा बंद करूंगी तो वो क्या सोचेगा ।
राकेश – धीरे से बंद कर लो ।
कविता कमरा बंद कर के कपड़े चेंज करती है लाइट खुली होने की वजह से कविता शर्मा रही थी । क्योंकि मोहन ने कविता को पूरी लाइट में बहुत कम की नंगा देखा था । वो हमेशा लाइट बुझा देती थी।
कविता अपनी Nighty उतार कर रख देती है और ब्रा पैंटी में राकेश को शर्मा कर देखती है ।
राकेश – यहां आओ मेरे पास
कविता राकेश के बेड के पास जा कर खड़ी हो जाती है ।
राकेश- बैठो मेरे पास
और राकेश कविता की पीठ सहलाने लगता है । कविता जैसी अप्सरा को ब्रा पैंटी में देख कर मुर्दे के लौड़े में भी सांसे आ जाती है वही हाल राकेश का था। उसने कविता की ब्रा के अंदर हाथ डालकर निपल्ल को पकड़ कर लगा।
कविता के बदन में करंट लगा और मस्ती आने लगी और राकेश अपने दोनों हाथ कविता की ब्रा में डाल कर उसकी दोनो चूचियाँ मसल रहा था।
फिर कुछ घंटे की ड्राइव के बाद मंदिर आ गया । मंदिर थोड़ी ऊँचाई पर था। सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर पहाड़ी पर जाना था। खालिद ने गाड़ी पार्क की और तीनों मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने लगे। कविता आगे थी और मोहन और खालिद पीछे।
सीढ़ी चढ़ते समय कविता के चूतड़ पूरे हिल रहे थे ।
ख़ालिद – देख यार तेरी माँ के रसभरे चूतड़ कैसे हिल रहे है ।
मोहन – हाँ यार मम्मी के चूतड़ की vedio बना ले।
खालिद मोबाइल में कविता के हिलते हुए मादक चूतड़ों को अपने मोबाइल में कैद करने लगा।
खालिद – यार तेरी माँ नंगी सीढ़ी चढ़ती तो मज़ा आ जाता।
मोहन- हाँ साले सही कहा तूने । फिर सब मंदिर न जा कर मेरी माँ की गांड की पूजा करने लगते।
ख़ालिद – हा हा हा । सोच अगर तेरी मां को मंदिर में नंगी कर के खड़ी कर दिया जाए तो रोज लाखो लोग दर्शन करने आएंगे । रोज कितने लोग तेरी मां की चूत की पूजा करेंगे। तेरी माँ की चूत को दूध से स्नान कराएंगे उसकी गांड पर फूल बरसाएंगे । उसकी चूची निचोड़ कर भक्तो को प्रशाद दिया जाएगा। उसका पेशाब लोग चरणामृत की तरह पियेंगे।
मोहन – यार तेरी बातें सुन कर मज़ा आ जाता है लौड़े में अजीब सा नशा भर जाता है।
फिर लगभग 30 मिनेट सीढ़ी चढ़ने के बाद वो तीनो मंदिर के द्वार पर पहुंचे।
मंदिर के बाहर एक बड़ा सा तालाब था । जिसमें नाहा कर ही मंदिर में प्रवेश करना था। तालाब में पहले से ही बहुत भीड़ थी। ख़ालिद और मोहन ने अपने कपड़े उतार कर अंडरवियर में तालाब में उतर गए।
कविता ने अपनी साड़ी उतारी और पेटीकोट ब्लाउज तालाब की तरफ बढ़ गयी।
दोनो की जैसे लाटरी लग गयी हो।
मोहन – वाह क्या मस्त नज़ारा है ।
ख़ालिद- यार तेरी मां की चूची कितनी टाइट है और नाभि तो देख बिल्कुल भोसड़े के जैसी है।
मोहन – यार अभी नहाने तो दे जब कपड़े बदन से चिपकेंगे तो और मज़ा आएगा।
कविता पानी मे उतर गई । उसका ब्लाउज भीग कर उसके बदन से चिपक गया और उसकी ब्रा साफ दिखने लगी।
ख़ालिद – साली की ब्रा बहुत टाइट है छोटी हो गयी है क्या?
मोहन – नही माँ की चूची मोटी हो गयी है। बहुत दूध पीती है सारा दूध चूचियों में भर गया है।
ख़ालिद – हाँ यार साली को तालाब में ही नंगी कर के पूजा कर दूं क्या?
दोनो कविता के गदराए हुए मांसल जवान जिस्म का रसपान कर रहे थे।
फिर कविता नाहा कर तालाब के बाहर आई।
उसका पेटीकोट उसकी गांड की दरार में घुसा था। और अपने मस्ताने चूतड़ हिलाते हुईं कपड़े बदलने चली गयी।
ख़ालिद – यार तेरी माँ के चूतड़ पर चप्पल से मार मार कर लाल करने का मन हो रहा है।
मोहन – साले अब बाहर निकल वरना तेरा पानी तालाब में ही निकल जायेगा।
फिर तीनो मंदिर जाने वाली लाइन में लग गए मोहन अपनी माँ के पीछे था। और अपनी माँ के गाँड़ की गर्मी को अपने लौड़े में महसूस कर रहा था।
अंदर जा कर कविता ने पूजा की ।
जाते वक्त वी दंडवत करने के लिए झुकी। उसकी गाँड़ बाहर निकली थी ।
ख़ालिद – मन ही रहा है कि अभी साड़ी उठा कर तेरी मां की गाँड़ में लौड़ा पेल दू।
मोहन – साले तू गाँड़ चोदेगा क्या
ख़ालिद – हाँ मैं तेरी माँ की गाँड़ को चीर कर फाड़ दूंगा ।
मोहन – मैं तो मम्मी की रसभरी चूत में डालूँगा।
ख़ालिद- साले तेरी माँ की चूत का छेद ज्यादा टाइट नही होगा पर अगर मैंने तेरी माँ की गाँड़ कस के चोद दी तो कुतिया की तरह चीखेगी।
मोहन – ज्यादा चीखेगी तो मैं अपना लौड़ा मम्मी के मुंह मे घुसेड़ दूंगा।
ख़ालिद – साली को रुला रुला कर मार मार कर पेलने में बहुत मज़ा आएगा। यार इसकी चड्डी में खुजली वाला पाऊडर डाल दूंगा । जब साली बार बार अपनी चूत खुजलायेगी तो अपने आप चूत में आग लगने लगेगी।
ऐसी ही गंदी बाते करते करते दोनो मज़े ले रहे थे।
फिर दर्शन करने के बाद तीनों वापस घर की तरफ चल पड़े।

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